फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मैडम मोना ए श्रीनिवास ने अपने कार्यकाल में करोड़ों रुपये बना डाले, उनके कुर्सी पर रहते तो सब चुप थे लेकिन हटते ही भुक्तभोगियों के करीबी मुखर होने लगे हैं, और मैडम के काले पीले कारनामे सुना रहे हैं।
पाठकों को याद होगा कि मज़दूर मोर्चा ने 18-24 जनवरी 2024 के अंक में सोने के बिस्कुट वाली मैडम का ‘दिल मांगे मोरÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि निगमायुक्त मैडम संबंधित अधिकारियों को बिना साथ लिए ही मिर्जापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का औचक निरीक्षण करने पहुंच गई थीं। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार ठेकेदार गिरधारी लाल के करीब छह करोड़ रुपया बकाया हैं। निगमायुक्त का 0.40 प्रतिशत कमीशन तय हुआ था, ठेकेदार गिरधारी लाल वह रकम यानी 2 लाख 40 हजार रुपये देने को भी राज़ी था लेकिन मैडम मोना ने अपने कलेक्शन एजेंट फाइनेंस कंट्रोलर (एफसी) दिनेश के जरिए गिरधारी लाल को मैसेज करवा दिया था कि वह पूरा एक प्रतिशत यानी छह लाख रुपया कमीशन लेंगी। ठेकेदार ने प्रोजेक्ट पिछडऩे से लागत बढऩे के कारण नुकसान होने का रोना रोया लेकिन मैडम का दिल नहीं पिघला था।
यह भी बताया जा रहा है कि बेहतर लूट कमाई के लिए ही मैडम ने भ्रष्ट दिनेश को नगर निगम एफसी पद पर बुलवाया था। बताते चलें कि नगर निगम में दो सौ करोड़ का घोटाला होने के बाद भ्रष्टाचारी विशाल को हटाए जाने के बाद दिनेश को यहां का लेखाधिकारी बनाया गया था। मैडम मोना ए श्रीनिवास के लिए दिनेश इसलिए खास था कि उसने मैडम का कमीशन आधा प्रतिशत से बढ़ा कर एक प्रतिशत वसूलना शुरू कर दिया था। यही नहीं वह मैडम के लिए महंगे गिफ्ट, जॉनी वॉकर की पेटियों की व्यवस्था अतिरिक्त सेवा के रूप में उपलब्ध कराता था। मैडम के इस कमाऊ पूत का तबादला कर दिया गया था।
दिनेश जैसे सिद्धहस्त भ्रष्टाचारी के चले जाने से मैडम बेचैन हो उठी थीं। इसके लिए पहले उसे एफएमडीए में बुलाया गया। वहां आने के बाद मैडम ने दिनेश को नगर निगम का एडिशनल चार्ज दिला दिया। दिनेश ने भी मैडम के इस अहसान का बदला उनके लिए सोने के बिस्कुट की व्यवस्था करने, जॉनी वॉकर की पेटियां पहुुंचाने और ठेकेदारों से रुटीन से ज्यादा कमीशन वसूल कर चुकाया।
ये वही दिनेश कुमार है जिसने पानीपत नगर निगम में रहते हुए ठेकेदारों से मिलकर कागजों पर सफाईकर्मी लगे दिखा कर करीब पंद्रह करोड़ रुपयों की बंदरबांट कर डाली। 2022 के उस मामले में उसके खिलाफ पानीपत एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है। यदि उसके कार्यकाल की ऑडिट स्थानीय नगर निगम में भी की जाए तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।
आईएएस मोना ए श्रीनिवास की तगड़ी रिश्वतखोरी के चर्चे भी खूब हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि मैडम ने ओल्ड और बडख़ल जोन की तोडफ़ोड़ शाखा से तीस लाख रुपये महीने वसूली के लिए पूर्व एसडीओ सुमेर सिंह और एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा को लगाया था। इन दोनों को पंद्रह-पंद्रह लाख रुपये महीने नजराना मैडम को देना होता था। हुआ यूं था कि सुमेर सिंह की नौकरी का अंतिम महीना था। 31 अगस्त 2024 को उसकी सेवानिवृत्ति थी, मैडम को लगा कि यह तो रिटायर हो जाएगा और पंद्रह लाख मारे जाएंगे, तो उन्होंने सुमेर सिंह से पंद्रह लाख रुपये एडवांस मांगे।
सुमेर सिंह ने लाख समझाया कि कुछ दिन पहले ही वसूली की थी कम से कम पच्चीस दिन बीतने दो, तो वसूली करके दूंगा। लेकिन लूटा-खाई की आदी मैडम ने धमकी दी कि मुझे तुझ पर विश्वास नहीं है, रुपया दे। सुमेर वसूली नहीं कर सका तो मैडम ने 22 अगस्त को उसे निलंबित कर दिया, अंतिम दिन वह कोर्ट के जरिए अपनी बहाली करवा सका। समझा जा सकता है कि मैडम रुपयों के लिए किसी का कॅरियर दागदार करने में भी पीछे नहीं रहतीं। चीफ इंजीनियर बीके कर्दम, एक्सईएन नितिन कादियान ये तो मैडम के चहेते कलेक्शन एजेंट थे, इनके अलावा मैडम सभी जेई, एसडीओ, एक्सईएन, चीफ इंजीनियर सब से वसूली करती रही हैं।
यह संभव नहीं है कि इतनी बड़ी बड़ी डकैतियां मैडम केवल अपने ही दम पर मार रही थीं, मुख्यालय पंचकूला में बैठे उच्चाधिकारी भी इससे अनभिज्ञ नहीं हो सकते थे। शहर में मौजूद सत्ताधारी विधायक और मंत्री भी अंधे और बहरे नहीं हो सकते थे। जाहिर है यह सारी लूट उनकी नजऱों के सामने बल्कि उनकी हिस्सापत्ती के बल पर ही चलती रही थी।
तबादला तो होता ही रहता है किसी भी एक अधिकारी को लूट का स्थायी अवसर तो नहीं दिया जा सकता न। अब यदि कोई अफसर ईमानदारी से काम करना भी चाहे यह जरूरी नहीं कि खून मुंह लगे उच्चाधिकारी व नेता काम करने दें।