फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा पहली बार विधायक क्या बना खुद को प्रशासन का सुपरबॉस समझने लगा है, इस तरह की चर्चाएं न केवल भाजपाइयों के बीच हो रही हैं बल्कि सरकारी महकमों में भी अदलखा के फरमान अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। कर्मचारियों में इस बात को लेकर आश्चर्य है कि महकमे के अधिकारी विधायक के इशारे पर तुरंत कार्रवाई में जुट जाते हैं, जबकि उन्हें अपने बॉस से आदेश या अनुमति मिलने के बाद ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि इस तरह के सारे कर्मचारियों को विधायक अदलखा ने ही अपने हिसाब से लगवाया है इसलिए वो अपने बॉस की सुनने के बजाय, सुपर बॉस के इशारे पर चल रहे हैं। विधायक धनेश अदलखा का सबसे ज्यादा प्रकोप नगर निगम में है, यहां के जेई, तोडफ़ोड़ दस्ता, जल कल शाखा, इंजीनियरिंग शाखा जैसे लूट कमाई वाले विभागों का सुपर बॉस अदलखा को बताया जा रहा है। यदि उन्हें कोई काम होता है तो निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से कहने के बजाय सीधे संबंधित जेई, एसडीओ को फोन कर आदेश सुना देते हैं। बताया जा रहा है कि अधिकतर मामलों में आदेश मिलने पर जेई-एसडीओ आला अधिकारियों को सूचना देना भी उचित नहीं समझते।
सुधी पाठकों को याद होगा कि होटल डिलाइट के पास स्थित मॉल के सामने आ रहे एक विकलांग व्यक्ति के वैध बूथ को अदलखा के इशारे पर निगम के जेई ने निजी जेसीबी लगा कर गिरवा दिया था। इंजीनियरिंग शाखा का भी यही है, एनआईटी दो पंचकुइयां रोड की अधूरी बनी पुलिया को अदलखा ने विधायक बनते ही जबरन खुलवा दिया, नतीजा यह हुआ कि पुलिया कमजोर हो गई। इसके बाद दो बार मरम्मत करवा कर लाखों की हेराफेरी की गई। निगमायुक्त की हिम्मत नहीं हुई उस पुलिया की मरम्मत के नाम पर लाखों की रुपये की बर्बादी पर सवाल पूछने की। बीते दिनों अदलखा ने एक बार फिर निगमायुक्त को बाईपास कर नगर निगम के जेई-एसडीओ के साथ बैठक कर पानी के टैंकर मुफ्त भेजने का आदेश सुनाया। इसके लिए बाकायदा अपने कार्यालय के नंबर जारी किए कि जिसे पानी का टैंकर मुफ्त चाहिए फोन करे।
बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सबसे अच्छी मानी जाती है, यहां पानी आपूर्ति के लिए रैनीवेल के अलावा दो सौ से अधिक बोरवेल लगाए गए हैं, बावजूद इसके विधायक की राजनीति चमकाने का प्रयास किया जा रहा है, जानकार आशंका जताते हैं कि मुफ्त सेवा के नाम पर कागजों में रोजाना सैकड़ों टैंकर पानी आपूर्ति दिखा कर मोटा भुगतान का खेल खेला जाएगा। प्लानिंग ब्रांच तो अदलखा के इशारे पर तब से चल रही है जब वह केवल पार्षद और गूजर का चेला हुआ करता था। यहां तैनात बिंटू अदलखा को शहर की प्रापर्टियों की जानकारी मुहैया कराता है। इसके बाद अदलखा उसे हड़पने के जुगाड़ तैयार करता है। बताया जा रहा है कि ङ्क्षबटू ने तिकोना पार्क के पास मोटर मार्केट वाली सौ करोड़ कीमत वाली सरकारी जमीन की जानकारी दी है, उसे खाली कराने के लिए अदलखा सत्ता और रसूख का इस्तेमाल करवा वहां तोडफ़ोड़ अभियान चलवा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि अदलखा मुख्य मार्ग पर बनी मार्केट जो कि लीज की दुकानें हैं उन्हें भी हटवाने का जोर लगा रहा है। इन दुकानदारों से कहा गया है कि तुम्हारी दुकानें मुख्य सड़क से हटा कर पीछे शिफ्ट की जाएंगी, इन दुकानों के एवज में तुम्हें जमीन दी जाएगी।
नगर निगम ही नहीं, अदलखा ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले चारों थानों और उनकी चौकियों में अपने चेलों को तैनाती दिला दी है। अब आका ने कुर्सी दिलवाई है तो नमक का हक तो अदा करना ही होगा। अब जहां भी अदलखा महोदय अधिकारियों के साथ बैठक करने पहुंचते हैं, वहां उनके गनर और सिक्योरिटी में तैनात पुलिसकर्मी तो जाते ही हैं, संबंधित थाने-चौकी के इंचार्ज भी एक-दो कांस्टेबल के साथ पहुंच जाते हैं मानो उनके लिए विधायक की चाकरी करना ही इलाके की कानून व्यवस्था सुधारने की बेहतरीन ड्यूटी होती है। सूत्रों की मानें तो अदलखा किसी रेहड़ी को हटवाने, कार्रवाई करने या किसी को धमकाने के लिए संबंधित एसआई, एएसआई को सीधे फोन कर आदेश देते हैं और काम हो जाता है।
यही नहीं विरोध करने वाले पत्रकारों को धमकाने के लिए पुलिस से लेकर सीआईए तक का इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हटता है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया के एक ठाकुर पत्रकार को सीआईए पकडऩे के लिए घूम रही थी। कारण बताया जा रहा है कि इस पत्रकार ने सैनिक कॉलोनी की गड़बडिय़ों, अवैध चार फ्लोर और अदलखा के गुर्गों की गौशाला में लूटमार से संबंधित खबरें चलाईं तो विधायक बौखला गया और सबक सिखाने के लिए पुलिस को लगा दिया। वो तो भला हो पुलिस विभाग में तैनात पत्रकार के शुभचिंतकों का, जो उन्होंने उसे सारी कहानी बता दी। बताया जा रहा है कि जानकारी होते ही पत्रकार पहले तो अंडरग्राउंड हो गया और बचते बचाते सीधे अदलखा के आका केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की शरण में पहुंचा। गूजर ने दोनों को आमने सामने बैठा कर शिकवे शिकायत दूर कराए, तब कहीं पुलिस ने पीछा छोड़ा। सिर्फ पत्रकार ही नहीं भूमाफिया, नशा कारोबारियों के खिलाफ भी ‘समाजसेवक’ अदलखा पुलिस का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते नजर आते हैं। लीडर से डीलर बने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के लिए जमीन कब्जे करने, हूडा के रिज्यूम प्लॉट की ऑनलाइन खरीद मेे मोटा पैसा बनाने के खिलाड़ी अदलखा ने विधायक बनने के साथ ही तहसील को भी अपने कब्जे में ले रखा है। एसडीएम त्रिलोकचंद तो उनके इशारों पर नाचते हुए किसी भी रजिस्ट्री में आपत्ति लगाने जैसे अनेक कारनामे करने में कोई गुरेज नहीं करते। बताया जा रहा है कि नेहरू कॉलोनी में रिहैबिलिटेशन की जमीन, एनआईटी एक तिकोना पार्क के पास पड़ी बेशकीमती जमीन पर अदलखा की नजर है तो उनके इशारों पर इन इलाकों में अवैध कब्जों को हटाने के लिए नोटिस देने और तोडफ़ोड़ की कार्रवाई की चर्चा जोरों पर है।
हाल ही में अदलखा ने शिक्षकों के साथ बैठक भी की थी, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं पर बातचीत की थी। समझने वाली बात यह है कि इस बैठक में अदलखा ने जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं बुलाया था, जिले भर के स्कूलों में कितने जर्जर भवन है, कितना फर्नीचर कम है, किन विद्यालयों कन्याओं के लिए शौचालय नहीं है, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है और सबसे बड़ी बात कि शैक्षणिक स्टाफ की कितनी कमी है ये जिला शिक्षा अधिकारी से बेहतर कोई नहीं बता पाता। जानकार कहते हैं कि अदलखा शिक्षामंत्री भी नहीं है जो शिक्षकों की समस्याएं दूर करने के तुर्त फुर्त कुछ कदम उठाते, उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान करना था ही नहीं। उन्होंने तो शिक्षकों को यह बताने के लिए इकट्ठा किया था कि अब सीमा त्रिखा न तो शिक्षा मंत्री हैं और न ही विधायक, इसलिए मुझे देखा और समझा जाए।