मंत्री गूजर का ‘बेटा ओमदत्त बहाल

मंत्री गूजर का ‘बेटा ओमदत्त बहाल
September 01 12:00 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस का पाखंड करने वाले पूर्व सीएम खट्टर की तर्ज पर नए नगर निकाय मंत्री सुभाष सुधा भी छवि चमकाने के लिए ढोंंग कर रहे हैं। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के नाम पर पहले तो एक्सईएन ओमदत्त को निलंबित कर वाहवाही लूटी, फिर दो सप्ताह में ही बहाल कर उसे फिर से लूट कमाई का ठेका दे दिया। चर्चा है कि इतने कमाऊ महकमे का मंत्री होने के बावजूद कुछ भी हासिल नहीं होने पर मंत्री ने विभाग के मोटे असामी ओमदत्त की गर्दन कसी थी, उनका निशाना सही जगह लगा और उन्हें वो सब हासिल करा दिया गया जिसकी उन्हें चाहत थी। इसके बाद तो भ्रष्टाचारी एक्सईएन ओमदत्त को कामगारी मान कर बहाली दे दी गई।

चर्चा है कि चुनाव की घोषणा से पहले मोटी कमाई करने की जुगत में ये सब खेल किए गए। मंत्री के औचक निरीक्षण के नाम पर निगम के मोटी कमाई वाले अधिकारियों की पहचान की गई। नगर निगम फरीदाबाद में मंत्री गूजर के बेटे ओमदत्त के काले कारनामों का तो पूरा रजिस्टर ही बना पड़ा है, चहेते ठेकेदारों के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को हैक करना हो या, बिना टेंडर प्रक्रिया ही करोड़ों के काम का वर्क ऑर्डर मुंह लगे ठेकेदार को बांट कर बंदरबांट करने का मामला हो, कागजों में नाला सफाई करा करोड़ों रुपये हड़पने का मामला हो या नगर निगम में शामिल किए गए 24 गांवों में पहले से बनी पक्की सड़क, इंटर लॉकिंग का टेंडर निकाल कर पूरी रकम डकारने की कला में माहिर गूजर के बेटे की पहचान की गई।

अब ओमदत्त भले ही मंत्री गूजर का बेटा है लेकिन अपने ही महकमे के मंत्री को चढ़ावा दिए बगैर कब तक ड्यूटी करता। चंद महीनों के लिए मंत्री बने सुभाष सुधा को अपनी हनक तो दिखानी ही थी, कुछ हिस्सा पत्ती भी तलाश की जा रही होगी, ताकि चुनाव में उससे वोटरों के लिए शराब-शबाब-कबाब का इंतजाम किया जा सके। सो 9 अगस्त को मंत्री जी ने ओमदत्त को निलंबित कर मुख्यालय चंडीगढ़ से अटैच करने का फरमान सुना दिया। खास बात ये रही कि निलंबन का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जनता की थुक्का फजीहत झेल रहीं मंत्री सीमा त्रिखा ने भी श्रेय लेने के लिए पत्रकारों को बता दिया कि वह पिछले आठ साल से सीवर लाइन डलवाने का प्रयास कर रही हैं लेकिन ओमदत्त ने अड़ंगा अटकाया हुआ था जिस कारण उसका निलंबन करवाया गया। इधर मंत्री सुभाष सुधा ने भी दमदार मंत्री की तरह काम करने का सुबूत पेश कर दिया।

होना वही था जो पहले से तय था। अभी निलंबन के न आरोप तय किए गए, न चार्जशीट बनी, न निलंबन के दौरान की जाने वाली कोई औपचारिकताएं पूरी की गई। चंडीगढ़ मुख्यालय में बैठे आला अधिकारियों को ओमदत्त ने ‘संतुष्ट कर दिया, आला अधिकारियों के जरिए मंत्री भी ‘संतुष्ट हो गए, और पंद्रह दिन में ही गूजर का बेटा निगम में लूट कमाई के पुराने हाथ दिखाने के लिए बहाल कर दिया गया। दिखावे के लिए बताया गया कि ओमदत्त ने सफाई दी कि सीवर लाइन डालने का काम तो 2016 से लटका है उसे तो बडख़ल विधानसभा का चार्ज महज नौ महीेने पहले ही मिला था, मानो ये तथ्य मंत्री सुभाष सुधा या निदेशालय में बैठे अधिकारियों को मालूम ही नहीं थे।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि ओमदत्त तो बहाल हो गया लेकिन सीमा त्रिखा का यह बयान कि उनकी ही शिकायत पर उसे निलंबित किया गया था इस चुनाव में उनको भारी पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि इससे ओमदत्त और मंत्री गूजर दोनों नाराज हैं। इसका खामियाजा सीमा त्रिखा को चुनाव के ठीक पहले भुगतना भी पड़ा, इधर बेटा निलंबित हुआ, उधर पिता समान गूजर ने बडख़ल विधानसभा में किसी भी नए विकास कार्य का शिलान्यास, उद्घाटन नहीं किए जाने का मूक फरमान अधिकारियों को सुना दिया। चुनाव के नज़दीक जहां दूसरे विधायक अपने इलाके में विकास कार्यों के नारियल फोड़ रहे थे सीमा त्रिखा कुछ नहीं कर पा रही थीं। इधर बेटा बहाल होने के बाद फिर से बडख़ल विधानसभा ही संभाल रहा है, सीमा त्रिखा उससे कुछ करवा पाएंगी यह नामुमकिन लग रहा है।

इधर सीमा का टिकट कटने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में ही नहीं खुद भाजपा में तेज है, ऐसे में अधिकारी भी डूबते सूरज को सलाम करने के बजाय मंत्री गूजर की जी-हुजूरी करते ज्यादा नजर आ रहे हैं।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles