खट्टर-सैनी की स्पेशल काउ प्रोटेक्शन फोर्स ने अवैध पिस्टल से की आर्यन की हत्या

खट्टर-सैनी की स्पेशल काउ प्रोटेक्शन फोर्स ने अवैध पिस्टल से की आर्यन की हत्या
September 16 08:53 2024

गोरक्षा के नाम पर मानव हत्या का अधिकार किसने दिया?

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। खट्टर के गोरक्षकों ने 23 अगस्त की रात आर्यन मिश्रा नाम के युवक की अवैध हथियारों से गोली मार कर हत्या कर दी। हत्या में पकड़े गए वरुण, कृष्ण, सौरभ, आदेश और सरगना अनिल कौशिक पुरखासिया ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पशु तस्कर समझ कर आर्यन की हत्या की थी। पुलिस ने इस मामले में पांचों हत्यारोपियों का जेल भेज दिया है लेकिन सवाल ये है कि गोरक्षा के नाम पर किसी की हत्या करने या बुरी तरह पीटने का अधिकार उन्हें किसने दिया है। दरअसल, सरकार संरक्षित इन गोरक्षक गुंडों को पुलिस का भी पूरी तरह समर्थन रहता है, यही कारण है कि ये लोग निजी गाडिय़ों पर पुलिस का फ्लैशर लगाकर और अवैध हथियार लेकर खुलेआम घूमते हैं लेकिन पुलिस इन्हें नहीं पकड़ती, समझा जा सकता है कि जो पुलिस इनके आगे पीछे घूमती है वो इन्हें क्या सजा दिला पाएगी।

पकड़े गए अनिल कौशिक ने पुलिस को बताया कि 23 अगस्त की रात उन्हें मुखबिर ने बताया था कि कुछ गोतस्कर डस्टर और फॉच्यूनर से रेकी कर रहे हैं। उनके इशारे पर साथी कैंटर लाते हैं और गाय उठा ले जाते हैं। इस पर अनिल कौशिक साथी वरुण, कृष्ण, सौरभ और आदेश के साथ इन कारों की तलाश कर रहे थे। उन लोगों ने सीमा त्रिखा के घर के पास डस्टर कार देखी तो रोकने का प्रयास किया, डस्टर नहीं रुकी बल्कि चालक ने कार भगा दी, इस पर पीछा किया और डस्टर गदपुरी टोल तोड़ते हुए निकल गई। पीछा करते हुए उन्होंने कार मेें अगली सीट पर बैठे आर्यन को गोली मार दी। हत्या करने के बाद वो सब दिल्ली की ओर भाग गए, हत्या में प्रयुक्त पिस्टल बवाना नहर में फेक दी।

सवाल ये है कि जब अनिल कौशिक को गोतस्करों की जानकारी हुई तो उसने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? जबकि खट्टर-सैनी की पुलिस गोरक्षकों के लिए हर समय उपस्थित रहती है। उन्हें अवैध हथियार रखने और किसी की हत्या करने का अधिकार किसने दिया ? निजी कार में पुलिस फ्लैशर लाइट लगाना अपराध है लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकती क्यों नहीं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं करती? दरअसल, ‘लिव फॉर नेशन नामक संस्था चलाने वाले गोरक्षक अनिल कौशिक पुरखासिया की पुलिस में अच्छी खासी पैठ है। उसे न सिर्फ संघ, बजरंग दल जैसे कट्टरपंथी हिंदू संगठनों से समर्थन प्राप्त है, पूर्व सीएम खट्टर का भी वरद्हस्त प्राप्त है।

सुधी पाठकों को याद होगा कि पूर्व सीएम खट्टर ने जुलाई 2021 में हरियाणा स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स का गठन किया था। इस टास्क फोर्स की जिला कार्यकारिणी में अध्यक्ष के रूप में उपायुक्त, जिला पुलिस प्रमुख, आयुक्त (नगर निगम/समिति), मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद-विकास और पंचायत विभाग, जिला अटॉर्नी और डिप्टी और निदेशक (पशुपालन एवं डेयरी) इसके सदस्य हैं। गैर-सरकारी सदस्यों में हरियाणा गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामित तीन व्यक्ति और गौरक्षक समितियों/प्रसिद्ध गौसेवकों के खाते से (उपायुक्त द्वारा नामित) दो व्यक्ति शामिल होते हैं। बताया जा रहा है कि अनिल कौशिक को हरियाणा गो सेवा आयोग के अध्यक्ष सरवर्न गर्ग द्वारा नामित किया गया था। यानी अनिल कौशिक पुरखासिया को न केवल पुलिस अधिकारी बल्कि सभी प्रशासनिक अधिकारी अच्छी तरह से पहचानते हैं। यहां तक कि गोरक्षा के अनेक अभियानों में पुलिस उसके साथ रही है।

देश भर में चल रहे गोरक्षा संगठनों से उसका सीधा संपर्क है, यही कारण है कि हरियाणा में ही नहीं उसकी अन्य प्रदेशों के प्रशासन और पुलिस में गहरी पैठ है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दंगाई बिट्टू बजरंगी को फंड उपलब्ध कराने का अनिल कौशिक ही प्रमुख माध्यम था। मोनू मानेसर, बिट्टू बजरंगी जैसे अनेक दंगाई अनिल के सीधे संपर्क में हमेशा रहते हैं। गोरक्षकों, दंगाई बिटुओं के संरक्षक अनिल कौशिक के एक फोन पर सभी थानों की पुलिस तुरंत हरकत में आ जाती है। समझा जा सकता है कि जो पुलिस अनिल कौशिक के आगे नतमस्तक हो, वह उसके खिलाफ मज़बूत जांच कैसे करेगी।

पुलिस की तफ्तीश की दिशा और दशा क्या होगी ये इससे समझा जा सकता है कि जिस अनिल कौशिक, उसके संगठन और साथियों को पुलिस बहुत अच्छी तरह जानती है उसकी और उसके संगठन की पहचान तक उजागर नहीं कर रही है। यही नहीं अभी तक हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद नहीं की जा सकी है और न ही यह तय हो सका है कि आर्यन मिश्रा को किसने गोली मारी थी? जानकारी के अनुसार पुलिस ने एक अवैध पिस्टल अनिल कौशिक के घर से बरामद की है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह वही तमंचा है जिससे आर्यन को गोली मारी गई थी या अनिल कौशिक के अनुसार बवाना नहर में फेके गए तमंचे से, जो अभी बरामद नहीं हो सका है।

जानकारों के अनुसार लगभग सभी गोरक्षक तमंचे, अद्धी आदि अवैध हथियार लेकर चलते हैं ताकि जरूरत पडऩे पर जमकर गोलियां चलाई जा सकें। इस हत्याकांड में पुलिस केवल एक पिस्टल की ही बरामदगी दिखा रही है, बाकी गोरक्षकों से भी यदि ठीक से पूछताछ की जाए तो अन्य अवैध हथियारों का पता चल सकता है, बहुत संभव है कि जिस तमंचे से गोली मारी गई हो वह किसी गोरक्षक के पास ही हो, नहर में फेका ही न गया हो। तफ्तीश का तरीका ही बता रहा है कि पुलिस हत्यारोपियों को संदेह का लाभ दिलाने की भरपूर कोशिश कर रही है। बहुत संभव है कि उस पर आरोपियों को बचाने के लिए खट्टर से लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं और संघियों का दबाव हो।

सरकारी इशारे पर बैलिस्टिक जांच में भी दोषियों को बचाने का प्रयास किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि पुलिस बरामद तमंचे को ही हत्या में प्रयुक्त बताती है और उसका बोर और हत्या में प्रयुक्त तमंचे का बोर अलग हुआ या जांच में तमंचा फायर करने योग्य ही नहीं पाया गया तो ये तथ्य हत्यारोपियों के पक्ष में जाएगा ही। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि आर्यन को पहली गोली चलती हुई कार में लगी थी जबकि दूसरी गोली उसे तब मारी गई जब शैंकी ने कार रोक दी और घायल आर्यन को छोड़कर सब बाहर आ गए थे। बताया जा रहा है अनिल कौशिक ने एक गोली मारने की बात कुबूल है, यदि ऐसा है तो दूसरी गोली किसने मारी? दूसरी गोली भी उसी तमंचे से चलाई गई या किसी दूसरे तमंचे से यह भी तफ्तीश का बिंदु होना चाहिए।

जानकारों के अनुसार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली लगना तो बताया गया है लेकिन बहुत स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मामले की जांच सीआईए 30 कर रही है, जो इन गोरक्षकों के साथ कई ऑपरेशनों में सहभागी रह चुकी है। अब देखना ये है कि पुलिस आर्यन के हत्यारों को सजा दिला पाएगी या नहीं?

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Mazdoor Morcha
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