फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मैं इस लोकसभा चुनाव में कृष्णपाल गूजर के साथ कतई नहीं हूं, उनके लिए प्रचार नहीं करूंगा चाहे पार्टी कुछ कहे, कृष्णपाल का नाम हर भ्रष्टाचार में आता है, मैं उनके साथ नहीं हूं, दो माह पहले ये दावे करने वाले पृथला के पूर्व विधायक टेकचंद शर्मा अब कृष्णपाल गूजर के सम्मान कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते दिख रहे हैं। उनकी ये पलटी जनता में चर्चा का विषय बनी हुई है कि राजनेता सत्ता लोलुपता में थूक कर चाटने से भी गुरेज नहीं करते।
दो बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे कृष्णपाल गूजर की स्थिति इस लोकसभा चुनाव में अच्छी नहीं थी। गूजर भले ही दस लाख वोटों से जीतने का दावा कर रहे थे लेकिन जनता का विरोध देखते हुए पार्टी के आला अधिकारी भी उनकी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं थे। अभी तक गूजर के पाले में दिखने वाले नेता उनके कमजोर दिखते ही बगावत पर उतर आए। इनमें विधायक टेकचंद शर्मा भी थे। उन्होंने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृष्णपाल गूजर का खुला विरोध किया था। उन्होंने गूजर पर भ्रष्टाचार करने और भ्रष्टाचारियों का साथ देने का आरोप लगाया था। डंके की चोट पर कहा था कि वह न तो गूजर के पक्ष में प्रचार करेंगे और न ही उनके साथ हैं। यह कहते हुए कि इस बार का चुनाव गूजर के लिए बहुत मुश्किल होने वाला है उन्होंने बंद अल्फाजों में गूजर के हारने की भी घोषणा कर दी थी। गूजर पर चाटुकारों और चेले चपाटों से घिरे होने का भी आरोप लगाया था।
कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी महेंद्र प्रताप द्वारा जबरदस्त टक्कर दिए जाने के कारण कृष्णपाल जैसे तैसे जीत तो गए लेकिन पिछले चुनाव की सफलता नहीं दोहरा सके। उनके जीतते ही टेकचंद शर्मा ने पलटी मारी और जीत की बधाई देने वालों में शामिल हो गए। जिस कृष्णपाल का उन्होंने प्रेस कॉन्फेस कर सार्वजनिक रूप से विरोध किया था रविवार को उसी गूजर के सम्मान में गदपुरी में आयोजित कार्यक्रम में टेकचंद शर्मा भी आगे आगे नजर आए, बुके देकर जीत की बधाई भी दी। माना जा रहा था कि भाजपा नेता होने के कारण औपचारिकतावश बधाई देने पहुंचे हों लेकिन दूसरे दिन पृथला में गूजर ने धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन किया इसमें भी टेकचंद शर्मा पहुंचे, यही नहीं उनके चेले चपाटों ने कृष्णपाल गूजर जिंदाबाद के नारे भी लगाए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार टेकचंद जानते हैं कि गूजर सांसद और केंद्रीय मंत्री होने के नाते विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में अहम भूमिका निभाएंगे। वर्तमान विधायक नयनपाल रावत भी गूजर और भाजपा का करीबी है ऐसे में अपना टिकट बचाने के लिए टेकचंद ने पलटी मारी है, अंदरखाने तो गूजर की जीत पर वह भी चकित हैं लेकिन राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, इसिलिए वह फिर से गूजर की चाकरी में जुट गए हैं।