मजदूर मोर्चा ब्यूरो गजब है खट्टर-सैनी सरकार का भी, लूट कमाई के लिए न जाने कहां कहां से योजनाओं के नाम लेकर आते हैं। कई बार तो आदमी काफी देर तक नाम का अर्थ ही खोजता रहता है, ऐसा ही एक नाम लाया गया है ई अधिगम योजना। शिक्षा विभाग ने इसे जुलाई 2024 में लागू किया, ई अधिगम योजना यानी ई लर्निंग स्कीम। जिस तरह इसका नाम लोगों की समझ के बाहर था उसी तरह इसका लागू किया जाना भी छात्रों से लेकर शिक्षकों तक के लिए मुश्किलों का सबब बना। नई नई घोषणा हुई थी तो छात्रों को टैबलेट बांटे गए, नेटवर्क चालू रहे इसके लिए सिमकार्ड भी बांटे गए। बताया गया कि छात्र टैबलेट पर ही सारे विषय पढ़ेंगे। सरकार की नीयत तो ई लर्निंग कराने की थी नहीं, उसे तो टैबलेट खरीद, प्राइवेट कंपनियों के सिम खरीद में मोटा कमीशन काटना था तो 11 सौ करोड़ खर्च कर टैबलेट खरीदे गए, कई सौ करोड़ रुपये सिम और नेटवर्क खरीद के नाम पर भी खर्च किए गए। कमीशन मिलते ही सबसे पहले सिम बंद करवाए गए, और अब टैबलेट भी बेकार साबित हो रहा है। नेट बंद होने से टैबलेट में अनेक विषय ही गायब हो गए हैं यानी डिस्कनेक्ट हो चुके हैं। छात्रों के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी और गणित को छोड़ कर बाकी विषय टैबलेट से गायब हो चुके हैं। यानी ई अधिगम औंधे मुंह लोट पोट हुआ पड़ा है।
तकनीकी जानकारों के अनुसार यदि किसी विषय के किसी टॉपिक पर एक मात्रा का भी बदलाव किया गया तो टैबलेट में उस विषय के या शिक्षा से जुड़े एप को अपडेट करना पड़ेगा। अपडेट करने के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है। योजना की शुरूआत में तो छात्रों को टैबलेट के साथ सिम कार्ड भी दिए गए थे, बाद में शिक्षा विभाग ने इंटरनेट बंद करवा दिया यानी सिम रिचार्ज करवाने बंद कर दिए। एक ही स्कूल की सभी कक्षाओं में बैठे विद्यार्थियों के टैब को हाईस्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों के पास कोई आधारभूत ढांचा नहीं है। इतने सारे छात्रों को पढ़ाने के लिए हर स्कूल में वीसैट वेरी स्मॉल अपर्चर टर्मिनल आधारित वाईफाई व्यवस्था होनी चाहिए जो महंगी होने के कारण नामुमकिन है। ऐेसे में जो विषय अपडेट किए गए हैं इंटरनेट नहीं होने के कारण टैबलेट में उनका पुराना वर्जन या तो काम नहीं करेगा या डिस्कनेक्ट होने के कारण काम नहीं करेंगे और वही हो रहा है। समझा जा सकता है कि स्कूलों में हाईस्पीड इंटरनेट की सुविधा के बगैर टैबलेट खरीदी केवल कमीशनखोरी और लूट कमाई के लिए ही की गई थी। केवल फरीदाबाद में ग्यारहवीं-बारहवीं के 22 हजार छात्रों को टैबलेट बांटा गया था, ऐसे मेें पूरे प्रदेश में लाखों छात्रों की पढ़ाई चौपट होना तय है।