आने लगे मोदी-खट्टर की विदेशों में नौकरी योजना के परिणाम
कैथल मज़दूर मोर्चा ब्यूरो बेरोजगारी के चलते भुखमरी से बचने के लिए कैथल निवासी रवि ने रूसी सेना में भर्ती होना बेहतर समझा। विदित है कि न केवल हरियाणा में बल्कि पूरे देश में भाजपा सरकार द्वारा रोजगार के अवसर बढ़ाने के बजाय घटाने पर पूरा जोर दे रखा है। बेशर्मी इतनी कि विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर भाजपाई सरकारें मजबूर लोगों को युद्धरत इजराइल व रूस तक नौकरी करने के लिए भेज रही हैं। पिछले दिनों बड़े धूम धमाके के साथ बड़ी संख्या में हरियाणा व अन्य प्रांतों से मज़दूरी करने के लिए युवकों को इजराइल भेजा गया था। उसी तरह, युवाओं की कमी झेलते रूस ने भी भारतीय युवाओं का आकर्षित करना शुरू कर दिया। विदित है कि रूस-युक्रेन युद्ध के चलते वहां बड़े पैमाने पर जनहानि हो रही है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार कोई भी देश भारतीयों को अपनी सेना में भर्ती नहीं कर सकता और न ही भारत सरकार भर्ती होने की इजाज़त देती है।
यहां सवाल पैदा होता है कि मांग और आपूर्ति आधारित बेहतर रोजगार के लिए, गरीब देशों से सदा से ही युवा दूसरे देशों में जाते रहे हैं। इजऱाइल की तरह आज रूस में भी युवाओं की जबरदस्त मांग है। दूसरी ओर भारत में युवाओं की इतनी बेकद्री है कि वे जान की परवाह किए बगैर जि़ंदा रहने के लिए कहीं भी और कोई भी नौकरी करने को तत्पर रहते हैं। यहां के अग्निवीर की अपेक्षा वहां की मज़दूरी, चाहे सैनिक के रूप में ही हो, उसे करना युवक बेहतर समझते हैं। अपनी इसी बेहतरी के लिए रवि भी एजेंटों के माध्यम से जैसे तैसे रूस पहुंच गया। क़ानूनी तौर पर तो उसे रूसी सेना में भर्ती नहीं किया जा सकता था लेकिन वहां दिसंबर 2024 सेना में भर्ती कर लिया गया।
रवि के भाई अजय के मुताबिक वहां रवि की युद्ध में मौत हो गई और वहां के दूतावास ने उनके परिवार को यह सूचना देने की भी जहमत नहीं की। आशंका पर 21 जुलाई को उसने रूस में भारतीय दूतावास को पत्र लिखा तब जाकर उन्होंने जवाब दिया कि रवि की युद्ध में मौत हो गई है। शव की मिलान करने के लिए परिवार के सदस्य का डीएनए मांगा गया। मुफ्त चिकित्सा के नाम पर आयुष्मान और चिरायु की नौटंकियां करने वाली सरकार ने अजय की डीएनए की जांच का खर्चा वहन तक करने से इनकार कर दिया, उसे खुद अपने खर्च पर यह जांच करानी पड़ी। फिलहाल खबर लिखे जाने तक न शव का डीएनए मिलान हो सका है और न ही कोई खबर आई है।
अपने आप को विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बताने वाली भारत सरकार किस प्रकार अपने नागरिकों की दुदर्शा कर रही है यह उसका एक छोटा सा उदाहरण है। हरियाणा में दस साल पहले चार लाख स्वीकृत पद थे, इनमें कोई बढ़ोत्तरी करने के बजाय भाजपा सरकार ने सवा दो लाख पदों को खाली रखा हुआ है। इसी तरह भारत सरकार ने भी पचासों लाख से अधिक पद खाली रखे हुए हैं, खाली पड़े पदों के चलते जहां देश का विकास बाधित हो रहा है, जनता को वांछित सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, वहीं काम करने के इच्छुक युवा बेरोजगारी का शिकार बने हुए हैं। अर्थशास्त्र के सिद्धांतों का सामान्य ज्ञान रखने वाला भी समझता है कि जब लोगों के पास रोजग़ार होगा तो उनके पास खर्च करने के लिए पैसा आएगा और जब पैसा आएगा तो विभिन्न उत्पादों की मांग बढ़ेगी जिससे अर्थव्यवस्था का पहिया घूमने लगता है, लेकिन भाजपाइयों की किताब में तो ऐसे कोई सिद्धांत लिखे नजर आते नहीं।
रूस जाने वालों में रवि अकेला नहीं था उसके साथ गांव के ही बलदेव सिंह (32 साल), राजेंदर सिंह (30 साल), मोहित (22 साल), मनजीत (22 साल), साहिल सिंह (22 साल) भी रोजगार की तलाश में रूस गये हुए हैं। बताया जा रहा है कि मनदीप और हर्ष को भी रूसी सेना में शामिल किया गया है। गोदी मीडिया के मजबूत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने रूसी दोस्त से भारतीय युवाओं को युद्ध में शामिल न करने की गुहार तो लगा चुके हैं लेकिन आज तक पुतिन ने एक भी भारतीय को रूसी सेना से अलग कर भारत नहीं भिजवाया है।