विष्णु नागर ‘मेरा तो मन करता है कि श्रीराम मंदिर अयोध्या के ध्वजारोहण के समय मंदिर से मोदी जी की प्रतिमा का अनावरण कर दिया जाए।मोदी जी के जन्म पर भी बारिश हो रही थी, बिजली गडग़ड़ा रही थी, जैसे रामावतार हुआ हो।’ -सुधांशु त्रिवेदी , भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोदी जी के अंदर हमने स्वयं राम जी की छवि देखी है ,सपने में।हो सकता है राम अवतार हों मोदी जी। – धीरेन्द्र शास्त्री,हिंदू राष्ट्रवादी कथावाचक जब अयोध्या में मोदी जी ध्वजारोहण कर रहे थे,उस समय उनके अंदर हनुमान जी समा गए थे।उनके अंदर हनुमान जी की शक्तियां आ गई थीं। – मोहन भागवत ,संघ प्रमुख ये बिलकुल ताजा वक्तव्य हैं। स्वयं मोदी जी से लेकर उनकी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, धीरेन्द्र शास्त्री,संघ प्रमुख सब एक स्वर से एक ही बात कह रहे हैं कि मोदी जी ईश्वरीय अवतार हैं। और थोड़ा पीछे जाएं तो अमित शाह, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और न जाने किन -किन नेताओं के ऐसे वक्तव्य मिल जाएंगे। लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री जी भी अपने को नान बायोलॉजिकल बताकर अपनी हंसी उड़वा चुके हैं और बीच- बीच में कहते रहते हैं कि ईश्वर ने मुझे एक विशेष उद्देश्य के लिए भेजा है।
ध्यान रखिए संघियों की यह प्रजाति दो- चार -दस प्रतिशत लोगों द्वारा अपनी हंसी उड़ाए जाने से घबराती नहीं।उसका लक्ष्य हिंदुओं की बड़ी आबादी तक अपनी बात पहुंचाना होता है? और वह जानती है कि उसकी बात सभी माध्यमों से लोगों तक सत्ता के दम पर पहुंचती है।यह छवि निर्माण ही इस खोखले व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत है वरना इसकी हालत भी आडवाणी जैसी होती! तो मोदी जी की ईश्वरीय छवि बनाने का उपक्रम खासतौर से लोकसभा चुनाव के बाद से चल रहा है और वह स्वयं भी यह काम वक्तव्यों से ही नहीं मंदिर मंदिर जाकर, वहां अपनी पूजनीय छवि बनाकर,कल अयोध्या में तथाकथित ध्वाजारोहण करके बना रहे हैं और यह काम आगे भी दिन रात चलता रहेगा।
मोदी जी को समझ में आ गया है कि पांच किलो अनाज,बीच- बीच में नकदी सहायता, राममंदिर,धारा 370 हटाना, दुनिया में भारत का डंका बज रहा है,वोट चोरी आदि उपायों से लंबे समय तक उनकी लोकप्रियता बनी नहीं रह सकती।उनकी दैवीय छवि बनानी पड़ेगी,ताकि धार्मिक हिंदू डरे और चुनाव में उन्हें हराने का मतलब ईश्वर को अपमानित करना माने।डरे कि इन्हें हराया तो पता नहीं ईश्वर क्या कहर ढाये कि पापी हिंदुओं तुमने मेरे अवतार को पैदल कर दिया, तुम्हारा सर्वनाश निश्चित है!
इस तरह का प्रयोग भारतीय राजनीति में पहली बार हो रहा है और इस मामले में मोदी, अपने मेंटर लालकृष्ण आडवाणी से सौ कदम आगे है। इसलिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को इस षडय़ंत्र से भी निबटने की रणनीति सोचनी होगी और यह काम राहुल गांधी या अन्य किसी की इसी तरह की ईश्वरीय छवि बनाने से नहीं हो पाएगा।इनके खेल में फंसकर बुरी तरह मात ही मिलेगी।मोदी द्वारा बनाई जा रही इस छवि को ़़ध्वस्त नहीं किया गया तो यह खेल लंबा चलेगा और दुनिया में भारत, चीन ही क्या नेपाल और पाकिस्तान से भी पिछड़ता जाएगा और बर्बादी की रामायण लिखता जाएगा।
और अंतिम बात। दशरथ के ये कलयुगी पुत्र – जो राम जी के भाई बनने की कोशिश में हैं- कह रहे हैं कि राजा दशरथ आकर कहते हैं कि उठो पुत्र, अपना कार्य पूरा करो।यह काम क्या है भाई और क्या है जो इन तथाकथित दशरथनन्दन ने पिछले ग्यारह साल में नहीं किया है और अब दशरथ जी के आह्वान पर करना चाहते हैं? इसके गंभीर आशय समझने की कोशिश कीजिए।