कबाड़ हो चुके स्मार्ट शौचालय भ्रष्ट अधिकारियों को फिर देंगे लूट कमाई का मौका

कबाड़ हो चुके स्मार्ट शौचालय भ्रष्ट अधिकारियों को फिर देंगे लूट कमाई का मौका
May 27 00:39 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक दशक पहले सत्ता में आई भाजपा की डबल इंजन सरकारों में तो विकास के नाम जनता की गाढ़ी कमाई की बुरी तरह से लूट-बांट हुई। अब ट्रिपल इंजन सरकार है तो जनता को कैसे भी मूर्ख बनाकर लूटने की रंग बिरंगी योजनाएं बनाई जा रही हैं। उनमें से एक है जुमलेबाज प्रधानमंत्री मोदी की स्मार्ट सिटी के स्मार्ट शौचालय। कबाड़ हो चुके दो करोड़ के शौचालयों को अब दोबारा चलाने की योजना है यानी नेता-अधिकारी कबाड़ के विकास के नाम पर फिर से करोड़ों रुपये डकारेंगे।

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के महाप्रबंधक रमेश बागड़ी के अनुसार स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए दस स्मार्ट शौचालयों की जांच करने के लिए शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी (पूर्व मुख्य सचिव हरियाणा सरकार) ने कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। कमेटी यह देखेगी कि वर्तमान में शौचालयों की क्या हालत है, इनमें किस प्रकार सुधार किया जा सकता है, इस काम में कितना खर्च आएगा। इसके साथ ही शुरू से लेकर अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट भी तलब की है।

सुधी पाठकों को बताते चलें कि इवेंटजीवी नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में सौ स्मार्ट सिटी बनाने का जुमला उछाला था। भविष्य में नेता-अधिकारियों की लूट कमाई की सबसे बड़ी योजना साबित होने वाले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में फरीदाबाद को भी शामिल किया गया। इसके तहत शहर में दो करोड़ रुपये खर्च दिखाकर दस स्मार्ट टॉयलेट स्थापित किए। बीस- बीस लाख कीमत वाले ये शौचालय स्थापित तो कर दिए गए लेकिन पानी की सप्लाई और जल-मल निकासी प्रबंधन न होने के कारण केवल उद्घाटन के दिन ही चल सके। स्टेनलेस स्टील के बताए गए ये टॉयलेट टिन शीट से बने निकले और एक साल के अंदर ही जंग लगकर सड़ गए। बीस लाख रुपये कीमत वाला प्रत्येक शौचालय अब कबाड़ में तौल के हिसाब से ही बिकने लायक बचा है।

ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाली डबल-ट्रिपल इंजन सरकारों ने शौचालय के नाम पर बर्बाद किए गए दो करोड़ की जांच करा, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। करती भी कैसे जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में खुद नेताओं ने अधिकारियों के साथ जमकर लूट खसोट की है। होना तो यह चाहिए था कि मोदी-सैनी भ्रष्टाचार की जांच करा बर्बादी की रिकवरी कराते, इसके विपरीत भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए लीपापोती की जा रही है। ढेसी की कमेटी यह पता नहीं करेगी कि शौचालय चले क्यों नहीं? इनमें जंग कैसे लगा?

बाजार में साढ़े तीन से पांच लाख रुपये में खुदरा रेट पर उपलब्ध शौचालय की कीमत बीस लाख रुपये कैसे हो गई? बल्कि यह पता करेगी कि इन शौचालयों को दोबारा कैसे चलाया जाए। यानी कमेटी कबाड़ को ठीक करने के लिए फिर करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट बनाएगी। विकास कार्याेे के जानकारों का मानना है कि जंग से बर्बाद हो चुके इन शौचालयों की मरम्मत कराना घाटे का सौदा साबित होगी। मरम्मत के बाद भी ये ज्यादा दिन चल नहीं पाएंगे। इससे बेहतर होगा कि नए शौचालय लगा दिए जाएं। संदर्भवश सुधी पाठकों को बता दें कि ये दस शौचालय जिन स्थानों पर लगाए गए वहां इस्तेमाल ही नहीं हुए, यानी जनता की जरूरत के हिसाब से लगाए भी नहीं गए थे।

यही कारण है कि आठ साल बीतने के बाद भी कभी इन शौचालयों को सही कराने की मांग किसी नागरिक या समाजसेवी संगठन ने नहीं की। इसका अर्थ हुआ कि यदि ये दोबारा बना भी दिए गए तो भी इनका इस्तेमाल नहीं होगा। यही तो भ्रष्टाचारी अधिकारी भी चाहते हैं कि वो करोड़ों रुपये खर्च कर ऐसा विकास करें जिसे जनता इस्तेमाल ही न करे। इस्तेमाल नहीं होगा तो सवाल नहीं उठेंगे, सवाल नहीं उठेंगे तो उसे दोबारा ठीक करने के नाम पर फिर लूटपाट की जाएगी।

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Mazdoor Morcha
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