फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बडख़ल विधानसभा क्षेत्र के एनआईटी एक, दो, तीन, पांच और सैनिक कॉलोनी में बड़े पैमाने पर चूहा फ्लैट, चौथा तल, फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) को ताक पर रखकर बिना सबडिवीजन के डबल फ्लैट बनाए जा रहे हैं। ये तब हो रहा है जब निगमायुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने अवैध निर्माण खास कर चौथा फ्लोर तोडऩे के आदेश जारी कर रखे हैं। निगमायुक्त के आदेश का असर यह हुआ है कि तोडफ़ोड़ और सर्वे ब्रांच वालों ने रेट बढ़ा दिए हैं और केवल वही अवैध निर्माण तोड़ा जा रहा है जिसके लिए विधायक धनेश अदलखा ने हुक्म सुनाया हो।
निगमायुक्त यदि सच में गंभीर होते तो अवैध निर्माण होने पर सबसे पहले सर्वे और तोडफ़ोड़ ब्रांच के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते कि उनके रहते हुए निर्माण हुआ कैसे? सच्चाई यह है कि सत्तापक्ष के नेताओं की कठपुतली बने खडगटा में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह इन अधिकारियों या सभी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर सकें । कारण साफ है, कमाई वाली तोडफ़ोड़ शाखा में केंद्रीय मंत्री गूजर ने पहले अपने खास चेले और चुनाव में उनके लिए खुल कर प्रचार करने वाले प्रवीण बैंसला को लगवाया था, उसकी बदनामी हुई तो उसकी जगह दूसरे चहेते सजातीय जेई हर्ष चपराना को लगवा दिया। एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा गूजर और अदलखा दोनों का चरण चुंबक है। निगमायुक्त में इतनी हिम्मत कहां कि वह गूजर और अदलखा के इशारे पर काम करने वाले इन दोनों कमाऊ पूतों को कोई आदेश दे दें या फिर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत करें।
निगम के जानकार कहते हैं कि निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने चौथे फ्लोर, चूहा फ्लैट आदि को तोडऩे का आदेश खुद नहीं दिया है बल्कि विधायक धनेश अदलखा के ही भोंपू बने हैं। यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि एनआईटी एक, दो, तीन, पांच और सैनिक कॉलोनी में एफएआर, सबडिवीजन का उल्लंघन कर सैकड़ों इमारतें बनी हुई हैं लेकिन तोडफ़ोड़ उन्हीं में की जा रही है जिनके मालिक विधायक धनेश अदलखा को भाव नहीं देते या उनका विरोध करते रहे हैं, उनके अलावा धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी हैं।
निगम सूत्रों के अनुसार इधर चौथे फ्लोर तोड़े जा रहे हैं उधर एनआईटी तीन एच ब्लॉक में प्लॉट 107 बी में पांच तल पर डबल फ्लैट बना दिए गए। इतना ही नहीं स्टिल्ट पार्किंग की जगह दुकानें बना दी गई हैं। एनआईटी पांच के एन ब्लॉक में 10ए, 19ए और 38ए में धड़ल्ले से चूहा फ्लैट बनाए जा रहे हैं। संदर्भवश बता दें कि बिल्डर अवैध रूप से स्टिल्ट पार्किंग की जगह और ऊपर के तलों पर छज्जे बढ़ा कर छोटे छोटे कमरे बना देते हैं जिन्हें चूहा फ्लैट कहा जाता है। बिल्डर इन्हें बेच कर निकल लेते हैं बाद में कभी कोई कानूनी कार्रवाई हो तो खरीदार भुगतता रहे। जानकार कहते हैं क्योंकि ये सारे निर्माण सत्ता पक्ष और विधायक धनेश अदलखा के समर्थकों के हैं इसलिए निगमायुक्त के आदेश के बावजूद एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा या जेई हर्ष चपराना कार्रवाई नहीं करेंगे, सच्चाई ये है कि खुद निगमायुक्त भी इन्हें तोडऩे का आदेश देने की हिम्मत नहीं कर सकते।
पाठकों को याद दिलाते चलें कि जुलाई-अगस्त 2022 में किए गए सर्वे में एनआईटी 3 के ई ब्लॉक में 44, 13बीपी, 18बीपी, 74, 75, 71बीपी, 31बीपी, 199 और डी ब्लॉक के प्लॉट 60 में अवैध निर्माण पाए गए थे। इसी तरह एनआईटी दो के जे ब्लॉक में 84, एन ब्लॉक में 67, जी ब्लॉक में 17, ए ब्लॉक में 19 व 20, बी ब्लॉक नेहरू ग्राउंड में 462, 598 ई 30 और सी 72 में अवैध निर्माण पाया गया था। एनआईटी एक के ब्लॉक में 69, 20, ई ब्लॉक में 21 बीपी, सी ब्लॉक के 102 के साथ ही एनआईटी 5 ई ब्लॉक 2बीपी में अवैध निर्माण पाया गया था। तत्कालीन निगमायुक्त यशपाल यादव ने इन सभी इमारतों को सील कर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। तब भाजपा की बडख़ल विधायक सीमा त्रिखा के इशारे पर कागजों पर तो इमारतें सील कर दी गईं लेकिन अधिकतर की बिना सबडिवीजन किए ही प्रॉपर्टी आईडी भी बन गईं और फ्लैटों की बडख़ल तहसील में रजिस्ट्री भी हो गई। कागजों में तो ये इमारतें आज भी सील हो सकती हैं जबकि हकीकत में इनमें बनाए गए फ्लैट बिक चुके हैं, पार्किंग में बनाई गई दुकानों में कारोबार चल रहा है और चूहा फ्लैटों की भी रजिस्ट्री हो चुकी है।
दरअसल, अवैध निर्माण नगर निगम की सबसे मोटी ऊपरी कमाई का जरिया है, तोडफ़ोड़ विभाग में उसी जेई एसडीओ को लगाया जाता हो जो मंत्री विधायक का चहेता हो या फिर बहुत मोटी रकम देकर कुर्सी खरीदी हो, समझा जा सकता है कि मोटी रकम देकर कुर्सी हासिल करने वाला पांच से दस गुना तो कमाएगा ही, साथ ही कुर्सी पर बने रहने के लिए ऊपर तक चुग्गा पानी डालता रहेगा, सत्ता पक्ष के इशारे पर अवैध निर्माण करवाने या तोडऩे को तत्पर रहेगा।