शराबी-कबाबी बाबू रामफल ने संपादक को फोन पर धमकी दी ‘मज़दूर मोर्चा’ की 5-11 मार्च को छपी खबर से फऱीदाबाद, पलवल, चंडीगढ़ और पंचकूला में हडक़ंप मच गया है और ऐसी खबरें आ रही हैं कि इस विभाग में ऊपर बैठे अधिकारी व मंत्री अपने आप को बचाने की मुद्रा में आ गए हैं व एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। कर्नल अमन यादव उफऱ् अमन सिंह उफऱ् अमन सिंह यादव से फऱीदाबाद विभाग की सरकारी गाड़ी गुडग़ांव में ही रखने व दुरुपयोग करने समेत अन्य आरोप तय करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। वहीं दूसरी तरफ़ कर्नल अमन यादव ने फऱीदाबाद में विभाग के कर्मचारियों को आदेश दिया है कि संपादक को यह जानकारी देने वालों का पता करो। इसी सिलसिले में कार्यालय के बाबू रामफल का इस संपादक के पास धमकी भरा फ़ोन भी आया। कर्नल अमन यादव ने विभाग में कार्यरत चमचों को यह पता लगाने के लिए आदेश जारी किए कि ये पोल किस-किस ने खोली है।
कई पूर्व सैनिकों व अर्धसैनिकों ने इसे “देर आए पर दुरुस्त आए” की संज्ञा दी और यह भी बताया कि हालांकि समाचार पत्र में छपी सभी बातें न केवल सत्य है बल्कि और भी कई इश्यू इसमें कवर नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया की बाबू रामफल की हरकतें कोई नई नहीं है और इसने फऱीदाबाद में अपना दबदबा बनाया हुआ है जिसके कारण यहां पर लगे ऑफि़सर भी इसको नजऱअन्दाज़ करते रहे हैं, माने ये कि बाबू रामफल व उसके एक चमचे का (जो इस विभाग में अपने पिता जी के स्थान पर अनुकंपा पर लगा है) पूरा वर्चस्व है।
इस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की कई बार ट्रांसफऱ की कोशिश की गई लेकिन अपनी भ्रष्ट कमाई का हिस्सा चंडीगढ़ और पंचकूला पहुंचाने के चलते ये फऱीदाबाद में ही कई-कई वर्षों से जमे हुए हैं। बाबू रामफल और उसके मातहत काम करने वाले चमचे बड़े-बूढ़े मजबूर पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, वीरनारियों की प्रॉपर्टी को बेचने व खऱीदने, ब्याज पर लोगों को पैसा देने, क्रिकेट मैच, मौसम, बारिश होने या न होने पर सट्टा लगाने, सरकारी स्टेशनरी को बेचने, पंचायत लगा कर फ़ैसले करने व इस बाबत मोटी रक़म वसूलने, शाम व रात्रि में जुए व शराब की महफि़ल जमाने आदि काम में संलिप्त हैं। इसी के चलते यह भी आशंका जतायी जा रही है कि इस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने व इनकम टैक्स पेमेंट ना करने की जांच करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आयेंगे।
क्या सरकार ध्यान देगी? विभाग के शीर्ष पर बैठे विजेन्द्र कुमार, आईएएस, (एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी) तथा कैप्टेन मनोज,आईएएस अपने विभागीय कर्मचारियों को लूट-कमाई की आजादी देने के बजाय लाखों पूर्व सैनिकों, अद्र्ध सैनिकों का वेलफेयर देखें, जिनके लिए मूलत: यह विभाग बनाया गया है। पहली पंक्ति में खड़े इन चोर,डाकू,चरित्रहीन, फ़ौज से भी पेंशन लेने वाले और हरियाणा सरकार से भी वेतन भोगी इन सरकारी कर्मचारियों को नहीं बल्कि अंतिम छोर पर खड़े बड़े-बूढ़े, सीनियर सिटीजन पूर्व सैनिकों, वीरनारियों, वीरांगनाओं का भला करने की ओर ध्यान दें।