जस्टिस सूर्यकांत के निशाने पर राज्यसभा के बजाय लोकसभा

जस्टिस सूर्यकांत के निशाने पर राज्यसभा के बजाय लोकसभा
February 13 05:58 2026

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
दिनांक 9-10 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत द्वारा किए गए हिसार, हांसी, नारनौद व गांव पेटवाड़ के दौरे से ऐसा आभास होता है कि सेवानिवृत्त होने के बाद वे पूर्व सीजेआई गोगोई की भांति राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की अपेक्षा हिसार से लोकसभा चुनाव जीतना चाहते हैं। वरना सीजेआई का उक्त स्थानों पर सार्वजनिक सभाएं करने का कोई मतलब नहंी होता। इतना ही नहीं इन तमाम सभाओं में इलाके के भाजपाई विधायक व मंत्रीगण भी शामिल रहे।

अपने पैतृक गांव पेटवाड़ में जनसभा को सम्बोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकान्त ने जिस अंदाज में ग्रामीणों को आश्वासन दिए और उनकी समस्याओं का समाधान किया, उससे प्रतीत होता है कि
सेवानिवृत होने के बाद वे उनसे वोट मांगने भी आएंगे। ग्रामीणों की स्कूल सम्बन्धी मांग के बारे में, वहीं बैठे राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांढा की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल की मांग तो मंत्री जी ने पूरी करनी है लेकिन उनके बिहाफ पर वे खुद ही स्कूल को अपग्रेड करने की घोषणा करते हैं।

अपने गांव की जनसभा के अलावा उन्होंने हांसी जिले में सेशन डिविजन बनाने की घोषणा करते हुए वहां के वकीलों को सम्बोधित किया। इसी इलाके से होने के नाते वहां के अनेकों वकील तथा राजनीतिक व्यक्ति उनके इर्द-गिर्द मंडाराते रहे। इसी जि़ले के अंतर्गत पडऩे वाले नारनौद सबडिविजन में नए न्यायिक मैजिस्ट्रेट को उनकी कुर्सी पर बैठाने के रस्म अदा करने के लिए भी जस्टिस सूर्यकांत जब वहां पहुंचे तो वहां भी इसी तरह की ड्रामेबाजी चली। यही सब नौटंकी करने वे बरवाला सबडिविजन भी पहुंचे। सबसे बड़ा कार्यक्रम हिसार के न्यायिक परिसर में हुआ। यहा हजारों की संख्या में मौजूद वकीलों को सम्बोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्था में सुधार एवं त्वरित न्याय जैसे खोखले जुमलों द्वारा श्रोताओं को बहलाने का प्रयास किया।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान नलवा के विधायक रणधीर पनिहार, बरवाला के विधायक एवं पीडब्लूडी मंत्री रणबीर गंगवा, हासी के विधायक भयाना, नारनौद के विधायक राम कुमार गौतम, राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांढा तथा गोहाना के विधायक एवं जेल मंत्री अरविन्द शर्मा लगभग सभी अवसरों पर इनके साथ रहे। स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी नौ जनवरी की शाम को फरीदाबाद में अपने तमाम कार्यक्रम समेट कर हिसार की ओर दौड़ लिए थे। इन तमाम राजनेताओं के अलावा जिले की सारी जुडिशियरी तो मौजूद रही सो रही, हाईकोर्ट चंडीगढ़ तक के जज साहेबान बड़ी संख्या में उक्त नाटकबाजियों में भाग लेने पहुंचे। समझा जा सकता है कि जनता के लिए यह सारी कवायद न केवल निरर्थक थी बल्कि उनके टैक्स से उगाहे धन की बर्बादी भी दिल खोल कर की गई।

इस सारे कार्यक्रम के दौरान लगभग सभी उक्त स्थानों पर भाजपा विधायकों ने पार्टी चिन्ह कमल के साथ अपनी व जस्टिस सूर्यकांत की तस्वीर वाले बड़े-बड़े फ्लैक्स लगवा कर यह सिद्ध करने का भोंडा प्रयास किया कि सूर्यकांत न केवल सीजेआई हैं बल्कि भाजपाई रंग में भी रंगे हैं। जहां एक ओर भाजपाई राजनेता सीजेआई के साथ अपनी घनिष्टता का अधिकतम प्रदर्शन करने में जुटे थे तो वहीं अनेकों वकील तथा जनसाधारण भी किसी न किसी तरह उनके साथ अपनी निकटता को प्रदर्शित करने का कोई अवसर छोडऩा नहीं चाहते थे। विदित है कि आज की न्यायिक व्यवस्था भी एक व्यापार बन चुकी है इसमें उसी व्यापारी की दुकान अत्यधिक चल पाती है जो जनता को यह बता सके कि उसकी किन-किन जजों के साथ कितनी घनिष्ठता है। न जाने कितने लोगों का कल्याण, जस्टिस सूर्यकांत से घनिष्ठता दिखा कर हो गया होगा।

सीजेआई ने मनाई लोहड़ी हरियाणा भवन में
अब वे जमाने नहीं रहे जब छोटे से छाटा न्यायाधीश भी सार्वजनिक रूप से जनता के बीच आकर किसी तरह की प्रदर्शनबाजी से गुरेज करते थे। उस जमाने में ये लोग समाज से लगभग कटे हुए से ही रहते थे, यहां तक कि घरों पर फोन भी नहीं रखते थे। यदि फोन रखे भी हैं तो विशेष अवसरों पर उन्हें बंद भी करा दिया जाता था। इसके पीछे भावना यही होती थी कि उनके द्वारा दिया जाने वाला फैसला पूर्णतया निष्पक्ष हो सके। किसी को भी यह कहने का अवसर न मिल पाए कि उसके विरुद्ध जज ने पक्षपातपूर्ण फैसला दिया है। इसके विपरीत आजकल तो जज साहेबान खुले में नाचने लगे हैं। उन्हें सार्वजनिक समारोहों में जनता से घुलने-मिलने में कतई कोई संकोच नहीं रहता बल्कि ऐसे अवसरों पर उन्हें ऐसे कई सम्पर्क भी मिल जाते हैं जो न्यायिक सौदेबाजियों में उनके काम आ सकें। कुछ इसी तरह की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए सीजेआई सूर्यकांत, हरियाणा के सीएम सैनी के न्यौते पर लंच खाने चंडीगढ़ पहुंच जाते हैं तो लोहड़ी मनाने के लिए 13 जनवरी की शाम को हरियाणा भवन में उपस्थित हो जाते हैं। चंडीगढ़ में सीएम द्वारा दिए गए लंच के अवसर पर जहां भाजपा के गणमान्य नेता व कार्यकर्ता आदि थे तो हरियाणा भवन में केन्द्रीय मंत्री खट्टर अपनी पूरी मित्र मंडली के साथ मौजूद थे। किसी भी जज विशेषकर सीजेआई का प्रभावशाली लोगों के बीच इस तरह उठना-बैठना, खाना-पीना व खेलना-कूदना, जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता को घटाता है। जनता यह मानकर चलती है कि जिस जज का मेल-जोल उसके विरोधी लोगों से है तो वे भला उसके पक्ष में कैसा न्याय दे पाएंगे?

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