फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) संघ की पाठशाला से पढ़ कर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर दोनों ही संघी-साथियों को फायदा पहुुंचाने के लिए जनता को लूटने की योजनाएं बनाने में माहिर लगते हैं। अपने लगभग दस साल के कार्यकाल में खट्टर ने फरीदाबाद के लिए कई हजार करोड़ रुपयों के विकास कार्यों की घोषणा कर डाली लेकिन उनमें से शायद ही कोई सिरे चढ़ी हो। सडक़-पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, सामुदायिक भवन, स्टेडियम, पार्क आदि खट्टर ने जिसके भी निर्माण, जीर्णोद्धार की घोषणा की करोड़ों रुपये लुटा दिए गए लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात जैसा ही रहा।
खट्टर ने पहले कार्यकाल में 24 अप्रैल 2017 को शहर में दो सौ करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की थी। इनमें प्रमुख थी डबुआ कॉलोनी में पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास एक करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण। सेक्टर 22-23 में खेल मैदान के लिए 2 करोड़ 65 लाख रुपये जारी किए थे। इनके अलावा एनआईटी एवं बल्लभगढ़ में कई सडक़ें और सीवर लाइन के लिए डेढ़ सौ करोड़ से अधिक के कार्य भी शामिल थे। सामुदायिक भवन एक वर्ष में बन कर तैयार हो जाना था लेकिन खट्टर के दूसरी बार सीएम बनने के बावजूद आज तक पूर्ण नहीं हुआ।
केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और सीमा त्रिखा के इशारे पर उनके चहेते ठेकेदार को निर्माण कार्य सौंपा गया। ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया लेकिन उसे सारा भुगतान कर दिया गया। भु्गतान होने के बाद ठेकेदार आधा अधूरा भवन छोड़ कर चलता बना। सवाल जवाब न हो इसके लिए नगर निगम के अधिकारियों ने सीएम खट्टर द्वारा लगाया गया शिलान्यास का पत्थर भी हटवा दिया। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद खंडहर हो रहे इस सामुदायिक भवन में वर्तमान में नशेबाजों का कब्जा है और स्थानीय लोग इसमें अपने पशु बांध रहे हैं। पास ही चाय की दुकान रखने वाले पंडित जी ने बताया कि करीब सात साल से यह बिल्डिंग ऐसे ही पड़ी है, अगर बन जाती तो जनता को काफी फायदा होता, इस टूटी हुई इमारत कां भी आसपास के गरीब लोग साफ सफाई करवा कर शादी ब्याह में इस्तेमाल करते हैं, यदि यह पूरी तरह बन जाए तो नगर निगम की भी आय होगी और लोगों को भी फायदा होगा। लेकिन निगम के भ्रष्ट अधिकारियों को बर्बाद हो रहे 1.66 करोड़ रुपयों का कोई गम नहीं है।
खट्टर ने इसी दिन सेक्टर 22-23 में खेल मैदान बनाने की घोषणा की थी। इसमें भी मंत्री मूलचंद के चहेते ठेकेदार को ठेका दिया गया था। 2.65 करोड़ रुपये से मैदान में बाउंड्री, रनिंग ट्रैक, खिलाडिय़ों के लिए कमरे, ओपन जिम आदि बनना था। मैदान बड़ा करने के लिए वहां मौजूद स्कूल के दो कमरे भी तोड़ दिए गए। ठेकेदार मैदान में कमरे बनाने के बजाय एक टिन शेड डाल दिया और रनिंग ट्रैक बनाने के बजाय वहां पहले से बने फुटपाथ को उखाड़ कर पूरा धन ऐंठकर चलता बना। स्थानीय लोगों के अनुसार जितना काम हुआ है उसका अनुमान बहुत ज्यादा लगाया जाए तो भी पांच से छह लाख रुपये ही बनता है, यानी बाकी धन का बंदरबांट हो गया। कमरे टूटने के कारण स्कूल में विद्यार्थियों को समस्या हो रही है सो अलग। पूर्व पार्षद राजेंद्र भामला के अनुसार मैदान में कुछ भी नहीं बनाया गया है, यदि जांच हो तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
खट्टर ने दस साल पहले बडख़ल झील को भरे जाने की भी घोषणा की थी। जो बडख़ल झील मुफ़्त में भरी जा सकती थी उसके लिए खट्टर ने पिछले नौ सालों में कई सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए। सालों की कवायद और कई सौ करोड़ रुपये लुटाने के बाद झील में एसटीपी का वो पानी जिससे हाथ भी नहीं धोया जा सकता, करीब आठ फीट तक भरा जा सका है। सुधी पाठक जान लें कि शहर के पर्यावरणविदों ने झील को बरसाती पानी से भरने का प्रस्ताव दिया था। इसके अनुसार झील को खुदाई कर गहरा किया जाना था। इसका खर्च खुदाई से निकली मिट्टी बेच कर पूरा होता। बरसात का पानी इकट्ठा होने से झील प्राकृतिक रूप से भरती और भूजल का स्तर भी बढ़ता। यानी झील मुफ़्त में ही भरती लेकिन खट्टर ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर कई सौ करोड़ खर्च करना बेहतर समझा क्योंकि इसमें उनके चहेते संघी-साथियों की मोटी कमाई होनी है।
खट्टर के काल में ही शुरू हुआ राजकीय नेहरू कॉलेज सेक्टर 16 की इमारत का निर्माण कार्य पिछले दो साल से बंद पड़ा है। कारण ये कि ठेकेदार ने भुगतान नहीं मिलने के कारण काम रोक रखा है। करीब 55 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट दो साल से रुका होने का सबसे ज्यादा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है लेकिन घोषणावीर खट्टर और अब सैनी सरकार इस गतिरोध को दूर करा इमारत बनाने की इच्छुक नजर नहीं आ रही हैं।
सीएम घोषणा की सिर्फ यही परियोजनाएं आधी-अधूरी नहीं छूटी हैं। 24 अप्रैल 2017 को ही खट्टर ने पचास करोड़ की लागत से सीवरेज लाइन, इंटर लॉकिंग टाइल्स और ड्रेन वर्क, 22 करोड़ 50 लाख से एनएच तीन पुलिया से गाजीपुर डबुआ से सोहना रोड तक आरएमसी सडक़ का निर्माण, प्याली चौक से पर्वतिया कॉलोनी जाने वाले 60 फुट रोड का निर्माण, 11 करोड़ से सिटी पार्क से ऊंचा गांव होते हुए आरसीसी नाला, हरि विहार की सीवरेज लाइन आदि की भी घोषणा की गई। इनमें से कोई भी काम पूर्ण नहीं हुआ, जैसे आरसीसी सडक़ बनाने के बाद फुटपाथ में इंटरलॉकिंग गायब कर दी गई। सिटी पार्क से गुप्ता होटल तक तो नाला बनाया गया इसके बाद नाला नाली में तब्दील हो गया। नाले की ढाल सही नहीं होने के कारण बहाव बाधित रहता है, यही कारण है कि हल्की सी बरसात में भी जलभराव हो जाता है।
सीएम अनाउंसमेंट के विकास कार्यों में जब इतनी धांधली है तो समझा जा सकता है कि दो सौ करोड़ सहित करोड़ों रुपये के अन्य घोटालों के लिए कुख्यात नगर निगम के अधिकारी अन्य विकास प्रोजेक्टों में कितनी लूट कमाई करते होंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीएम अनाउंसमेंट की व्यवस्था ही इसलिए की गई थी कि संघी और भाजपाई ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री, जनता दरबार आदि में बड़ी बड़ी घोषणाएं कर जनता में अपनी छवि चमकाते जबकि फायदा उनके चहेते ठेकेदार उठाते। नगर निगम में करीब दो दशक से ठेकेदारी कर रहे एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संघियों और भाजपाइयों के कारण सामान्य ठेकेदारों को काम ही नहीं मिल पाता है। कोई भी टेंडर निकलता है उससे पहले ऊपर से ठेकेदार का नाम आ जाता है। अधिकतर ठेकेदार बाहर से आते हैं, और भुगतान मिलते ही काम अधूरा छोड़ कर चलते बनते हैं।
ऊपर से दबाव होने के कारण निगम के अधिकारी भी भुगतान कर देते हैं, हालांकि इसमें उनकी भी हिस्सापत्ती तय होती है, सब कुछ ऊपर के आदेश पर होता है इसलिए अधिकारियों को जांच का भी डर नहीं है। वो कहते हैं कि जितने भी अधूरे विकास कार्य हैं वो सब बाहरी ठेकेदारों द्वारा किए गए हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार संघ की विचारधारा हमेशा से आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करने की रही है, सीएम खट्टर हों या कोई और संघी जनहित का ढिंढोरा पीट कर अपने पूंजीपति फाइनेंसरों को मालामाल कराना ही इनका उद्देश्य है। खट्टर ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए संघ की इसी नीति को अपनाया होगा, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।