जमीनी नेताओं की कमी खल रही कांग्रेस को

जमीनी नेताओं की कमी खल रही कांग्रेस को
March 03 12:22 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार का सामना करने वाली कांग्रेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में भले ही सिंबल बांटा हो लेकिन इसके प्रत्याशी दम नहीं लगा पा रहे। लगाएं भी कैसे जब दस साल से भंग पड़े संगठन में कार्यकर्ता ही नहीं बचे हैं। एनआईटी-2 में रहने वाले मानकचंद भाटिया जैसे खांटी कांग्रेसी परिवार के राजेश भाटिया तक पाला बदल कर भाजपा में जा रहे हैं, ऐसे में कांग्रेसियों को कार्यकर्ता कहां से मिलें। शायद यही कारण है कि अधिकतर प्रत्याशी बैनर पोस्टर पर खर्च नहीं कर रहे हैं। इसकी जगह सोशल मीडिया और ग्रुपों को प्रचार प्रसार का सहारा बना रहे हैं। मतदान का दिन नजदीक आता जा रहा है लेकिन कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी लता चंदीला के बैनर पोस्टर नगर निगम की राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले एनआईटी एक, दो, तीन और पांच में तलाशने पर भी नहीं दिखाई दे रहे। यही हाल प्रत्याशियों का है। अधिकतर प्रत्याशी अपनी उम्मीदवारी वाट्सएप स्टेटस लगाकर फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि सोशल प्लेटफार्म पर पोस्ट डालकर जता रहे हैं।

भाजपा निगम चुनाव को लेकर कितनी गंभीर है कि सीएम सैनी अपने प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो कर रहे हैं। सीएम की बेशर्मी और उनके ‘मुस्तैद? प्रशासन का दुस्साहस तो देखिए डबुआ कॉलोनी 60 फुट एयरफोर्स रोड पर जहां से सीएम का काफिला गुजर रहा था वहां सड़क पर सीवर ओवरफ्लो की गंदगी बह रही थी। यदि जनता की समस्याओं को समझने वाला सीएम होता तो इस गंदगी को देख कर जनता से माफी मांगता, लेकिन सैनी तो झूठ और पाखंड की पाठशाला संघ के अनुयायी तो बेशर्मों की तरह इसे भी भाजपा की उपलब्धि समझ कर वोट मांगते नजर आए।

गुडग़ांव से कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह तो सीएम सैनी से भी दो हाथ आगे निकल गए, वो तो वोटरों को धमकाते घूम रहे हैं कि भाजपा प्रत्याशी को नहीं जिताया तो मत कहना कि काम नहीं हुआ, सफाई नहीं हो रही, विकास नहीं हो रहा। दरअसल, इन भाजपाइयों को कोई काम करने, सफाई कराने की आवश्यकता नजर नहीं आती। इन्हें मालूम है कि हिंदुत्व और चुनाव आयोग के दम पर सत्ता उनको ही मिलने वाली है।

इसके विपरीत कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा या सीएम पद की दावेदार कुमारी सैलजा, सुरजेवाला आदि रोड शो करना तो दूर अपने समर्थक प्रत्याशियों की खोज खबर भी नहीं ले रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष उदयभान भी सिंबल बांटने के रोल से आगे नहीं बढ़े, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की तो प्रत्याशियों के लिए वोट नहीं मांगे बल्कि आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर भाजपाइयों पर आरोप लगाकर अपनी पीठ थपथपा ली। स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की हालत देख कर स्पष्ट हो गया कि पार्टी की जड़ें जमीन से उखड़ चुकी हैं और इसे कामयाबी के लिए नए प्रतिनिधत्व व नेतृत्व की जरूरत है।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles