फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जीएसटी, सेस जैसे अप्रत्यक्ष करों और महंगाई के बोझ से कराह रहा श्रमिक-मज़दूर वर्ग सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अपने हक के प्रति एकजुट होने लगा है। बृहस्पतिवार को इंक़लाबी मज़दूर केंद्र की अगुवाई में मज़दूरों के जत्थे ने श्रम उपायुक्त कार्यालय पर दमदार प्रदर्शन किया और सीएम नायब सैनी को संबोधित सात हजार मज़दूरों द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ ज्ञापन श्रम उपायुक्त को सौंपा गया। ।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मज़दूर नेताओं में से एक संजय मौर्य ने कहा कि बीते दस वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़कर दैनिक और मासिक वेतनभोगी मज़दूरों के लिए विकराल हो चुकी है। महंगाई जिस अनुपात में बढ़ी श्रमिकों के वेतन उस अनुपात में नहीं बढ़ाए गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि पहले से ही तंगी से जूझ रहा मज़दूर वर्ग विपन्नता का शिकार होता चला गया। वक्ताओं के अनुसार खाने-पीने के सामान से लेकर, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, इलाज, कमरे का किराया, बिजली का बिल आदि सभी चीजें महंगी हो गई हैं।
इस महंगाई के दौर में भी प्रदेश सरकार मजदूरों का न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं कर रही है। मज़दूर को कंपनियों को 12 से 14-16 घंटे खटना पड़ता है फिर भी परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन उपलब्ध कराने भर का धन नहीं जुट पाता। हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद मज़दूर के परिवार अभाव में जीवन गुजारने का अभिशप्त हैं। मौजूदा वेतन में बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए कर्ज लेना पड़ता है, घर में कोई ब्याह शादी हो तो कर्ज लेते हैं, कोई बीमार पड़ जाए तो पहले कर्ज देने वाले को ढूंढते हैं और फिर अपना पेट काट-काट कर सालों-साल उस कर्ज को उतारते रहते हैं। क्योंकि हमारी सरकारों द्वारा तय न्यूनतम वेतन मजदूरों को बस किसी तरह जिंदा रखने के लिए तो पर्याप्त है उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए नहीं।
जब तक मजदूरों की श्रम शक्ति का मूल्य बढ़ाकर 26,000 रुपए मासिक नहीं किया जाता, तब तक मजदूर-मेहनतकश जनता अपने जीवन स्तर को ऊपर नहीं उठा पाएगी। इंक़लाबी मज़दूर केेंद्र ने न्यूनतम वेतन 26 हज़ार रुपये किए जाने के लिए एक महीने तक मज़दूरों के बीच हस्ताक्षर अभियान चलाया। सात हज़ार मज़दूरों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया। मज़दूरों हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन मुख्यमंत्री नायब सैनी को भेजने के लिए श्रम उपायुक्त को सौंपा गया। मज़दूरों का कहना था कि 7000 से अधिक हस्ताक्षर इस बात का सुबूत हैं कि मौजूदा महंगाई के इस दौर में परेशान हताश मजदूर आबादी बेहतर जीवन की आशा में न्यूनतम वेतन रिवाइज करने को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। यह इस बात का भी सूबूत है कि न्यूनतम वेतन रिवाइस न होने पर यही मजदूर आबादी कागज में अपनी आवाज उठाने के बजाय सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाएगी।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से निम्न मांगे रखीं। 1. हरियाणा में मजदूरों का 08 घंटे का न्यूनतम वेतन 26000 लागू करो। 2. हरियाणा स्तर पर न्यूनतम वेतन रिवाइज करो। 3. सभी कंपनियों व संस्थानों में समान काम का समान वेतन लागू करो। 4. मोदी सरकार द्वारा बनाई गई घोर मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को हरियाणा सरकार लागू न करें। 5. सभी कंपनियों, संस्थानों में न्यूनतम वेतन लागू करो।