कलंकित हुई पत्रकारिता फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पत्रकारिता के नाम पर नेताओं की चाटुकारिता और प्रशासन की दलाली करने वाले पत्रकार संगठनों में फरीदाबाद पत्रकार ऐसोसिएशन का भी नाम जुड़ गया है, क्योंकि इसका अध्यक्ष समाचार पत्र विक्रेता राजेश नागर को बनाया गया है। जिस एसोसिएशन का अध्यक्ष (राजेश नागर) समाचार तो दूर की बात एक चिट्ठी भी नहीं लिख पाता हो, जो पत्रकार और रिपोर्टर में भेद नहीं जानता हो उसे अध्यक्ष चुनने वालों का बौद्धिक स्तर क्या होगा समझा जा सकता है।
दरअसल, राजेश नागर को यह ईनाम मंत्री राजेश नागर के दरबार की हाजिरी बजाने, पांव पखारने के एवज में मिला है। अब मंत्री की मंशा है तो फिर उनके द्वारा होली-दिवाली फेके जाने वाले विज्ञापन के टुकड़े खाने वाले पत्रकारों को उनकी बात रखनी ही थी। सो राजेश नागर को अध्यक्ष चुन डाला। पत्रकारिता के लिए इससे काला दिन और क्या होगा कि एक समाचार पत्र विक्रेता पत्रकारों की ऐसोसिएशन का मुखिया बना दिया जाए। पत्रकार तो वो है नहीं और हॉकर होने का फर्ज निभाना भी उसे नहीं आता। उसके आका मंत्री राजेश नागर की काली करतूतों की पोल मज़दूर मोर्चा ने क्या खोली, दरबारी राजेश नागर हॉकर होते हुए भी मजद़ूर मोर्चा के पीछे पड़ गया। उसने क्षेत्र के समाचार पत्र विक्रेताओं पर मज़दूर मोर्चा नहीं बेचने का दबाव बना कर इलाके में सर्कुेलेशन गिराने की नाकाम कोशिश की।
उसकी गिरी हरकतों के बावजूद क्षेत्र में मज़दूर मोर्चा का प्रसार बढ़ा ही है, अनेक समाचार पत्र विक्रेता मज़दूर मोर्चा सीधे तौर पर लेकर अपने पाठकों तक पहुंचा रहे हैं। राजेश नागर को अध्यक्ष चुनने वालों ने खुद को स्तरहीन तो साबित किया ही है पत्रकारिता को भी कलंकित किया है। पत्रकारिता में कुपढ़ों के घुसने के कारण ही आज इस पेशे की शुचिता, निष्पक्षता और निर्भीकता, चाटुकारिता और सत्ता के झूठ का गुणगान करने वाली हो गई है।