ऋषि आनंद एक और वर्ष, क्रिसमस के साथ ही देश भर में हिंदुत्व समर्थकों द्वारा हमलों की खबरें सामने आ गई हैं। हिंदुत्व, जो 2014 से सतत खतरे में बताया जा रहा है, एक बार फिर आम लोगों द्वारा क्रिसमस मनाने के खिलाफ आक्रामक को उठा है। – मध्य प्रदेश में एक भाजपा नेता ने क्रिसमस भोज के दौरान दृष्टिबाधित बच्चों पर हमला किया। – दिल्ली में हिंदुत्व समर्थकों ने सांता क्लॉज़ की टोपी पहने महिलाओं और बच्चों को धमकाया। – रायपुर में हिंदुत्व समूहों ने क्रिसमस की सजावट नष्ट करने के लिए एक शॉपिंग मॉल में तोडफ़ोड़ की। – असम में बजरंग दल के सदस्यों ने एक स्कूल में क्रिसमस समारोह को तहस-नहस कर दिया। – केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं ने क्रिसमस कैरोल गाते बच्चों पर हमला किया। – उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व समूहों ने क्रिसमस समारोह में बाधा डालने के लिए एक चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने क्रिसमस की छुट्टी रद्द कर दी और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के आयोजन को अनिवार्य कर दिया है। पूरे भारत में ये राज्य-संरक्षित आपराधिक संगठन अचानक आम लोगों को डराने-धमकाने और उन पर हमले करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। धर्म के नाम पर ये लोग उस कुरूपता को छिपाते हैं, जिसे सत्तारूढ़ पार्टी के घृणा-प्रचार से पोषण मिलता है।
पिछले एक दशक में इन आपराधिक संगठनों ने हर त्योहार—चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो या ईसाई—को धार्मिकता के नाम पर गुंडागर्दी और आम लोगों पर हमलों का अवसर बना दिया है। राम नवमी और हनुमान जयंती के दिनों में ये भीड़ सुनियोजित रूप से हिंसक जुलूस निकालती हैं, मस्जिदों के सामने अपमानजनक गाने और गालियाँ बजाती हैं, और कई बार इन धार्मिक स्थलों पर हमले भी करती हैं। इन आपराधिक संगठनों का वास्तविक एजेंडा हिंदुओं की रक्षा करना नहीं, बल्कि हिंदुओं को डराना और धर्म को अपने फासीवादी एजेंडे के लिए कब्ज़े में लेना है। सभी भारतीयों को घृणा फैलाने वालों के खिलाफ खड़े होना चाहिए और उनके विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए।