फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जुलाना नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा नेता संजय कुमार जांगड़ा एक ठेकेदार से तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में कमीशन के ढाई लाख रुपये वसूलते रंगे हाथों पकड़े गए। ठेकेदार के अनुसार जांगड़ा ने अपने कमीशन का रेट ढाई प्रतिशत तय कर रखा है। इसके हिसाब से दस करोड़ में 25 लाख रुपये चेयरमैन को जाने थे, सवा दो लाख रुपये तो पहली किस्त थी। ये तो चेयरमैन हैं, बेचारे ठेकेदार को अभी पार्षद (सभासद), जेई, एसडीओ, चीफ इंजीनियर और अकाउंट ब्रांच में चढ़ावा चढ़ावा चढ़ाना होगा। लगता है कि ठेकेदार कुछ ईमानदारी से काम करना चाहता था, अन्यथा जैसा तेरा दाल भात वैसी मेरी फातिहा की तर्ज पर वो भी सबके साथ चेयरमैन को भी कमीशन बांट कर तालाब में दो चार फावड़े चलवाता और भुगतान लेकर चलता बनता। जब सबको कमीशन बांट रहा था तो चेयरमैन साहब को ढाई फीसदी देने में क्या चला जाता। समझा जा सकता है कि सबको लेने-देने के बाद ठेकेदार को कुछ नहीं बच रहा होगा तभी मजबूर होकर उसने यह कदम उठाया।
संजय कुमार जांगड़ा लंबे समय से भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता रहा है। ठीक ठाक निजी अस्पताल का मालिक होने के कारण उसकी गिनती शहर के धनवान लोगों में है। बीते 11 साल के कार्यकाल में उसने सांसद, विधायक, मंत्री, स्थानीय निकाय हर जगह सत्तापक्ष की लूटमार को न केवल देखा, यह भी समझा कि भ्रष्टाचारी नेता-मंत्री-अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नही होती।
सरकार केवल कार्रवाई का ढोल बजाने का नाटक करती है। सो उसने भी भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोने और नहाने की तैयारी की थी। इसके लिए नेताओं की जनसभाओं में जिंदाबाद-मुर्दाबाद करने वाली भीड़ जुटाने, सांसद-विधायकों के कार्यक्रमों में मंच पर उनके साथ बैठने के लिए मोटा खर्च करने से लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं की जा-बेजा इच्छाएं पूरी करने तक सब करना पड़ा। बताया जा रहा है कि चेयरमैन पद भी पचासों लाख रुपये देकर खरीदा था। अंधभक्त जनता के कारण अतिविश्वास का आनंद ले रही भाजपा के नेताओं को भी मालूम है कि अगर वो किसी गधे को भी टिकट दे देगी तो जनता उसे भी जिता देगी। ऐसे में टिकट उसे ही मिलता है जो सबसे बड़ी रकम खर्च करता है। जब संजय जांगड़ा लाखों- करोड़ों रुपये खर्च कर चेयरमैन की कुर्सी हथियाएगा तो लूटमार और कमीशनखोरी ही तो करेगा, आखिर सारी वसूली भी तो करनी है। जानकार मानते हैं कि भले ही विजिलेंस ने जांगड़ा को रंगेहाथ पकड़ा है लेकिन सीएम सैनी की नौकरी करने वाला यह महकमा जांच को अंजाम तक पहुंचा पाएगा, यह कहना मुश्किल है। सैकड़ों जांचों की तरह इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। निर्लज्ज भाजपा की तो रीति नीति ही अपने किसी मंत्री-संत्री से इस्तीफा नहीं लेने की रही है, ऐसे में संभव है कि जांगड़ा भी चेयरमैन बने रहें और जमानत पर बाहर आने के बाद अपना कार्यकाल भी पूरा करे। जाहिर है कि चेयरमैन साहब पद का दुरुपयोग करते हुए नगर पालिका से ठेकेदार का हुक्का-पानी बंद करवा दें, या उसके खिलाफ जांच खुलवा दें। ऐसे में बहुत संभव है कि कुछ दिन बाद ठेकेदार ही अपने बयान से पटल जाए।
यहां तो पूरे कुंऐ में ही भांग पड़ी है संजय जांगड़ा का ठेकेदार से महज सवा दो लाख रुपये लेने के भ्रष्टाचार का यह एकमात्र केस नहीं है। प्रदेश के सभी नगर पालिका, नगर निगम या अन्य स्थानीय निकाय में जन प्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार का यही आलम है। संघी पृष्ठभूमि से आने वाली फरीदाबाद की मेयर प्रवीाण बत्रा जोशी ने कुर्सी संभालते ही मेयर आवास में सात नए एसी लगाने का फरमान सुना दिया। चंडीगढ़ में चंद दिनों की ट्रेनिंग लेकर लौटते ही मेयर ने निगम के मोटी ऊपरी कमाई वाले विभाग अवैध निर्माण, अवैध कब्जे और अतिक्रमण की जानकारी मांगी।
मोटी कमाई की दूसरी मद स्ट्रीट लाइट, पार्कों की लाइट, इलेक्ट्रिक उपकरण की खरीद-इस्तेमाल की जानकारी मांगी। अकूत कमाई वाली विज्ञापन शाखा का भी पूरा हिसाब मांगा था। सारी जानकारियां लिए हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई का न तो ऐलान किया, न ही आदेश दिया, समझा जा सकता है कि मेयर जोशी ने भी अकूत कमाई वाली इन शाखाओं के अधिकारियों से अपना हिसाब किताब तय कर लिया है। वार्ड छह की पार्षद गायत्री देवी ने तो पद और शपथ लेने से पहले ही निगम के जूनियर इंजीनियर आरिफ से ऊपरी कमाई की तरकीबें पूछनी शुरू कर दी थीं। आरिफ से दुखड़ा रोया था कि चुनाव में पचास लाख रुपये खर्च हुए है इनकी भरपाई कैसे होगी बताओ। वार्ड नंबर 15 के पार्षद जसवंत सिंह ने तो अवैध निर्माण करवा रहे एक भाजपा कार्यकर्ता से पांच लाख रुपये यह धमकाते हुए मांगे थे कि नहीं देने पर अवैध मकान गिरवा देंगे। कार्यकर्ता ने जसवंत सिंह को डेढ़ लाख रुपये दिए लेकिन केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से शिकायत भी कर दी। गूजर के कहने पर जसवंत सिंह को रकम लौटानी पड़ी थी।
वार्ड नंबर तीन के पार्षद रवि भगत की दलाली तो नगर निगम में बहुत पहले से ही चल रही थी। जेई परवेज आलम के साथ मिलकर अवैध निर्माण कराना, वसूली करना उसका काम है। मुजेसर में प्रमोद लाला से चार लाख रुपये वसूल कर पहले उसका अवैध निर्माण करवाया, फिर सील होने पर पार्षद ने तीन लाख रुपये वसूली कर डी सील करवाया। निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर तीन मेें करीब बीस करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हो चुके हैं लेकिन पार्षद महोदय कमीशन की राशि से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए काम शुरू नहीं होने दे रहे।
काम रुके होने के कारण जनता जलभराव, गंदगी, पेयजल की समस्या से बुरी तरह जूझ रही है लेकिन भगत जी के मनमुताबिक चढ़ावा नहीं मिलने तक किसी भी विकास कार्य का नारियल नहीं टूट पाएगा। वार्ड 26 के पार्षद लाल कुमार मिश्रा तो बिजली चोरी में पकड़े गए। पल्ला सब डिवीजन के जेई हिमांशु ने विष्णु एन्क्लेव स्थित पार्षद के मकान में बिजली चोरी पकड़ कर उन्हें फोन किया तो उन्होंने ठसके से बताया था कि हां यह घर उन्हीं का है। इस पर हिमांशु ने अस्सी हजार का चालान भी काट दिया था। मज़दूर मोर्चा में खबर प्रकाशित होने के बाद लाल मिश्रा ने सफाई दी थी कि घर उनका नहीं है। वार्ड 41 से पार्षद बनते ही महेश गोयल ने बल्लभगढ़ में अपने वार्ड में अवैध निर्माण की खुली छूट दे दी। सौ फीट रोड स्थित इंडियन बैंक के सामने सजंय बैट्री वाली मार्केट को नगर निगम अवैध बताकर दो बार तोड़ चुका है।
इमारत के मालिक ने निगम चुनाव में महेश गोयल का कार्यालय इस शर्त पर खोला कि जीतने पर वो दुकानें बनवाएगा। पार्षद बनने के बाद महेश गोयल ने वादा पूरा करते हुए यह इमारत बनवा डाली। बताया जा रहा है कि इसके एवज में मालिक ने एक दुकान उपहार में दी है। सेक्टर 23 ए के कम्युनिटी सेंटर पर कब्जेदारी को लेकर वार्ड नंबर चार की पार्षद संगीता के पति ज्ञानेंद्र भारद्वाज और वार्ड पांच की पार्षद शीतल के ससुर धर्मवीर खटाना की लड़ाई सार्वजिक हो चुकी है। धर्मवीर खटाना ने तो कम्युनिटी सेंटर पर कब्जा बनाए रखने के लिए एके-47 तक इस्तेमाल करने की धमकी दी थी। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की विधानसभा क्षेत्र के एक पार्षद ने तो ओल्ड जोन की तोडफ़ोड़ शाखा की मोटी कमाई देखते हुए बाबू डेविड नागर से ही सात-आठ लाख रुपयों का बंदोबस्त करने को कहा था। बंदोबस्त नहीं करने पर कुर्सी पर किसी दूसरे को बैठाने की धमकी तक दी थी। यह चर्चा आज भी ओल्ड जोन में खूब होती है। ये वो लोग हैं जिनका नाम जुलाना के चेयरमैन संजय जांगड़ा की तरह सामने आ गया।
ये तो हांडी के चंद चावल है, इन्हें देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा ने अपने टिकट पर जन प्रतिनिधि के रूप में लुटेरे, कमीशन खोर, अवैध कब्जे करने वाले, अतिक्रमण माफिया को सत्ता में भागेदारी सौंपी हैं। जाहिर है कि ये भ्रष्टाचारी इन पदों पर बैठकर जो लूटमार करेंगे वह खुद भी रखेेंगे और टिकट दिलाने वाले आकाओं के जरिए पार्टी को भी मोटा चढ़ावा पेश करेंगे। रही जनता की बात तो वह जब तक अपने हित के प्रति जागरूक नहीं होगी, धर्म, जाति आदि के नाम पर वोट डालती रहेगी तो उस पर ऐसे ही हरामखोर, मक्कार, लुटेरे राज करते रहेंगे।