सिविल अस्पताल में इलाज कम रिश्वतखोरी ज्यादा पलवल : सिविल अस्पताल में रिश्वत और लापरवाही का खेल दशकों पुराना है। हड्डी तोडक़र फर्जी एमएलआर काटने से लेकर ऑपरेशन करने तक में रिश्वत हावी है। ऑपरेशन हाथ की जगह पैर का करना है या फिर ऑखों में लैंस डालने का। अस्पताल के लिए कुर्सी, मेज और दवाईयों से लेकर, कांट्रेक्टर स्तर पर नौकरी लगाना या फिर सफाई के लिए क्लीनर खरीदने, ऑक्सीजन प्लांट के पाइप खरीदनेे, चादर धुलाई में कमीशन का खेल है। वैक्सीनेशन सर्टीफिकेट बनवाने, फिटनेस मेडिकल तक रिश्वत के दम पर बनाए जा रहे हैं।
आक्सिट्रेटरों की खरीद से लेकर इलेक्ट्रोनिक का सामान खरीद में भी रिश्वत का लेन-देन है। महिलाओं की डिलीवरी, मरीजों को रेफर करना और रेप पीडि़त महिला की सस्पेक्टिड़ रिर्पोट बनाने तक में रिश्वत ली जा रही है। पोस्टमार्टम रिर्पोट बदलने और पोस्टमार्टम के लिए बाहर भेजने तक में रुपया चल रहा है। रिश्वत के इस खेल में डाक्टरों की जगह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बड़े मोहरे हैं।
गांव घोडी निवासी 20 वर्षीय प्रिंस के हाथ की जगह पैर का ऑपरेशन कर दिया और गलत ऑपरेशन के बदले 4 हजार रुपये भी ले लिए। हाथ की जगह पैर का ऑपरेशन और रिश्वत लेने का मामले को तूल पकडता देख सीएमओ डॉ.लोकवीर सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया। ऑपरेशन व रिश्वत लेने के दोनों मामलों की कमेटी जांच करेगी और जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी। डाक्टरों की जांच कमेटी एक डाक्टर के खिलाफ सही रिर्पोट देगी भी या नहीं इसे लेकर भी संदेहे हैं। सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने डॉक्टर संदीप सोनी पर रिश्वत लेने के कई और आरोप लगाए हैं। इससे पहले डॉक्टर नवीन पर भी रिश्वत लेने के आरोप लगते रहे हैं। डाक्टर नवीन के खिलाफ जांच कमेटी बनाई गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।
सीएमओ डॉ.लोकवीर सिंह के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ.अजय माम होंगे और इसमें इंडियन मेडिकल एसोशिएसन का सदस्य, आयुर्वेदिक डॉक्टर सहित पांच डॉक्टरों की जांच कमेटी का गठन किया गया है। जांच कमेटी एक सप्ताह के अंदर मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कब अमल में लाई जाएगी इसे लेकर पीडित के मन में संशय है। सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार चंद्रवती, सुनीता, सुल्तान व साजिदा ने बताया कि उनसे भी ऑपरेशन के नाम पर रिश्वत ली गई है। यह रिश्वत फोर्थ क्लास कर्मचारियों के माध्यम से ली गई है।
उन्होंने बताया कि मरीज ऑप्रेशन थियेटर में ले जाने के दौरान ऑपरेशन से जुड़ी दवाइयां व अन्य सामान की लंबी लिस्ट थमा दी जाती है। तीमारदार से सामान को लाने का दबाब बनाया जाता है या फिर इसके बदले पैसे मांगे जाते हैं। तीमारदार को दवाइयों व अन्य सामान की कीमत भी अधिक बताई जाती है। ऐसे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सामान उपलब्ध कराने के नाम पर पैसों की मांग करता है। मजबूरन तीमारदार को पैसे देने पड़ते हैं। यह राशि चार-पांच हजार से शुरू होकर 15-20 हजार रुपये तक हो सकती है। यह राशि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लेते हैं और उपर तक पहुंचाते हैं। इसी प्रकार डिलवरी के लिए आने वाली महिलाओं से भी रिश्वत ली जाती है। रिश्वत नहीं देने पर प्राईवेट अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। झगडे में धाराएं जुड़वाने और कटवाने का खेल भी अस्पताल में होता है। हड्डी तोडक़र एमएलआर काटने के आरोप में डाक्टर जेल भी जा चुके हैं, लेकिन हालात बदलने की जगह बदतर होने लगे हैं। अस्पताल में रिश्वत के इस खेल में सभी कुछ खुलेआम हो रहा है।