फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) खुद को विकास पुरुष बताने वाले केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की डबल इंजन सरकारों में विकास कार्यों का इतना टोटा है कि वह मोहल्लों की सड़क-गलियों का उद्घाटन कर खुद को कृतार्थ समझ रहे हैं।
वैसे मोहल्ले की गली-सड़कों का उद्घाटन करने का काम है तो पार्षद स्तर का लेकिन छोटे से छोटे काम का श्रेय लेने की भाजपाई मानसिकता का प्रदर्शन करने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर भी बीते सप्ताह अनंगपुर पहुंच गए थे। उनकी इज्जत और साख तो तब ही कम हो गई थी जब वह गली के निर्माण का नारियल फोडऩे पहुंचे थे, बेइज्जती तो तब हुई जब उन्हें करीब आधा घंटा धूप में खड़े होकर चेले विधायक धनेश अदलखा का इंतजार करना पड़ा। वो इंतजार शायद न भी करते लेकिन पार्षद बिंदे भड़ाना ने बिना धनेश अदलखा के नारियल को हाथ ही नहीं लगाने दिया और उनका इंतजार करने पर अड़ा रहा।
धूप में तपने से ज्यादा अपने घटते रसूख से तिलमिलाए मंत्री गूजर ने एक तरह से धमकी दे डाली कि यदि अदलखा पांच मिनट में नहीं आया तो नारियल फोड़ देना लेकिन उनकी धमकी को एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल दिया गया। अदलखा करीब दस मिनट बाद मौके पर पहुंचा और गूजर के पैर छू कर सम्मान प्रदर्शित किया। कहने को तो उसने ऐसा कर खुद को गूजर का चेला बताया लेकिन उसकी मुस्कुराहट बता रही थी कि चेला अब शक्कर हो चुका है और भाजपाइयों की सत्ता का नया केंद्र भी, जिसके बिना गुड़ गुुरु गूजर भी उद्घाटन नहीं कर पाएंगे।
राजनीतिक जानकार इस घटना को जिले की राजनीति में गूजर की घटती साख के रूप में देख रहे हैं। खुद को गूजर हृदय सम्राट, चक्रधर, फरीदाबाद का चाणक्य आदि कहलवाना पसंद करने वाले कृष्णपाल का रसूख तो तब ही कुुंद माना जाने लगा था जब विधानसभा चुनाव में उनके चिर विरोधी विपुल गोयल, जातिगत प्रतिस्पर्धी राजेश नागर और पलवल में गौतम न केवल टिकट लेकर आए बल्कि अपने दम पर जीत भी हासिल की। नगर निगम चुनाव में भी उनकी सारी कवायदें और दावे तब धरे रह गए जब वह अपने गांव मेवला महराजपुर से ही भाजपा प्रत्याशी को चुनाव नहीं जितवा सके।
वैसे तो वह खुद को गूजर समाज के बड़े नेता की तरह स्थापित करने की कवायद कर रहे हैं लेकिन अनंगपुर गांव में सजातीय बिंदे भड़ाना द्वारा उनको दरकिनार कर धनेश अदलखा के बिना नारियल तोडऩे से मना करना बताता है कि गूजर अपनी ही जाति और गढ़ में नए क्षत्रपों के आगे कमजोर होते जा रहे हैं। भाजपा की नीति रीति से वाकिफ राजनीतिक जानकार अदलखा की तेजी को गूजर की सीट के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं। जानकार कहते हैं कि जिस तरह अदलखा विधायक होने के बावजूद पार्षद से लेकर विधायक और सांसद तक के कार्यक्षेत्र में दखल दे रहा है, और मीडिया के जरिए अपनी छवि चमकाने की कवायद में बहुत तेजी से जुटा है वह उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को इंगित करती हैं। अब गूजर को देखना होगा कि वह विपुल गोयल, राजेश नागर और मंत्री गौतम जैसे खुले राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के अलावा गुरु कह कर उनकी जड़ें काटने में लगे विधायक अदलखा के चक्रव्यूह से कैसे निपटेंगे।