गुरु गूजर के पास चालीस पार्षद, लेकिन चेला गोयल भारी

गुरु गूजर के पास चालीस पार्षद, लेकिन चेला गोयल भारी
September 29 18:41 2025

बिना डिप्टी मेयर के ही चलेगा निगम सदन
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अनुशासन का ढिंढोरा पीटने वाली पार्टी विद डिफरेंस भाजपा के नेताओं में इतने डिफरेंसेंज हैं कि नगर निगम में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर एकमत नहीं हो पा रहे हैं। दरअसल, खुद को जिले का राजा कहलाने वाले केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर इन पदों पर अपना प्यादा बैठा कर शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन उनकी दाल उनके चेले से उनके विरोधी बने कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल गलने नहीं देकर खुद को प्रदेश की राजनीति का कद्दावर नेता साबित करने में जुटे हुए हैं।

सदाचार का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा की रीति नीति रही है कि जब तक परिस्थितियां अनुकूल न हो जाएं तब तक चाहे राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो या स्थानीय निकाय चुनाव, टालते रहो। खट्टर राज में नगर निगम में हुई जमकर लूट खसोट, दो सौ करोड़ का घोटाला, ईकोग्रीन लूट, याशी कंपनी की प्रॉपर्टी आईडी लूट, राजा नाहर सिंह स्टेडियम घोटाले से जनता उकता चुकी थी। जनता के गुस्से से घबराई भाजपा 2019 में नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। भारी जनाक्रोश के बावजूद 2024 में चुनाव आयोग, ईवीएम और वोट चोरी के जरिए सत्ता हासिल करने के बाद ही मार्च 2025 में स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा कर पाई। निकाय चुनाव में भाजपा ने भयंकर जीत हासिल करते हुए 46 में 43 पार्षद पदों पर कब्जा जमाया और संघी पृष्ठभूमि वाली प्रवीण बत्रा जोशी को मेयर पद जितवाया।

इतना प्रचंड बहुमत मिलने के बाद से ही डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के नाम तय किया जाना आसान लग रहा था। परिवारवाद को गाली देकर सत्ता हासिल करने वाले केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने पिछले निगम सदन में अपना रसूख दिखाते हुए अपने देवेंद्र चौधरी नामक खोटे सिक्के को सीनियर डिप्टी मेयर बनवा दिया था। इसी नाकारा सिद्ध बेटे को राज्य की राजनीति में लॉंच करने की नीयत से ही उन्होंने इस बार निगम चुनाव में उसे नहीं उतारा था। इस चुनाव में भी गूजर के चेले चपाटे दावा कर रहे थे कि मंत्री जी ने 43 में से 40 पार्षद बनाए हैं इसलिए वो जिसे चाहेंगे वरिष्ठ उपमहापौर और उप महापौर बना डालेंगे। गूजर के आत्मविश्वास या कहें अति आत्मविश्वास को देखते हुए भाजपाइयों का एक गुट भी मान कर चल रहा था कि निगम में गूजर का एकक्षत्र राज रहेगा।

गूजर के अति आत्मविश्वास की वजह चालीस पार्षदों का बहुमत उनके साथ होना भी बताया जा रहा था, बावजूद इसके मात्र तीन पार्षद वाले कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल लगातार अपनी ताकत दिखाते रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार बात बनते न देख केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने फ्लोर पर शक्ति प्रदर्शन करने का पैंतरा खेला और स्वतंत्रता दिवस से पहले 11 अगस्त को बैठक बुला ली। बैठक में न तो कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल पहुंचे और न ही मेयर जोशी। गूजर चार घंटे तक माथा पीटते करते रहे, केंद्र से लेकर राज्य के कद्दावर भाजपाइयों से मदद मांग डाली, लेकिन अदृष्य रूप से मौजूद कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की ताकत के सामने उनके सारे हथकंडे और संपर्क भोथरे साबित हुए। आखिर में चेले विपुल के सामने मुंह की खाते हुए गूजर मीडिया के सामने झेंप मिटाकर चलते बने थे।

ऐसा नहीं है कि केंद्रीय मंत्री ने प्रयास छोड़ दिए हैं। जानकार बताते हैं कि बीते दिनों गोल्फ क्लब में स्वच्छता अभियान के बहाने से एक बार फिर पार्षदों का जमावड़ा कर निगम सदन में उनका बहुमत होने का संदेश देने का प्रयास किया था। जानकार कहते हैं कि गूजर द्वारा बार बार किया जाने वाला शक्ति प्रदर्शन जनता में भले ही कुछ संदेश दे रहा हो लेकिन आला कमान में प्रदेश सरकार के कार्यों में उनका बेवजह दखल देने के रूप में दर्ज किया जा रहा है। गूजर से ही साम-दाम-दंड-भेद के पैंतरे सीख कर धनपति कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल उनके खिलाफ ही इस्तेमाल कर रहा है।
जानकारों का कहना है कि विपुल गोयल स्थानीय निकाय मंत्री है, ऐसे में सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के चुनाव में गूजर का शक्ति प्रदर्शन करना विपुल के मंत्रालय में हस्तक्षेप करना है, जो कि आला कमान की नजर में उचित नहीं है, यही कारण है कि आला कमान भी गूजर की मदद नहीं कर पा रहा है।

भाजपा के जानकार कहते हैं कि इस लड़ाई में अंतत: गूजर को पीछे हट कर कोई सुलह का मार्ग निकालना होगा, अन्यथा निगम के पांच साल बिना सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के ही खत्म हो जाएंगे। वैसे भी दो दो डिप्टियों से होने से और न होने से न तो कारपोरेशन की सेहत पर कोइ असर पडऩे वाला है और न ही जनता की। जब देश की लोकसभा ग्यारह साल तक बिना डिप्टी स्पीकर के चल सकती है तो एमसीएफ में इन दो डिप्टी मेयरों के बगैर क्या आफत आने वाली है। 3) गऱीब मज़दूरों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा दबंगों, गुंडे, मवालियों, लंपटों का मनोबल तोडा जाए, जिससे अमन-चैन की फिज़़ा क़ायम हो।

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Mazdoor Morcha
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