गोरक्षकों की धमकी से झुकी सरकार, एसपी का तबादला

गोरक्षकों की धमकी से झुकी सरकार, एसपी का तबादला
April 30 16:02 2025

पलवल (मज़दूर मोर्चा) बिटुआ से बिट्टू बने गोरक्षक ने बीते दिनों धमकी दी थी कि यदि गिरफ़्तार किए गए इंस्पेक्टर राधेश्याम को यदि रिहा नहीं किया गया तो वे हाईवे जाम कर देंगे। सांप्रदायिक तत्वों की पनाहगाह बनी सरकार ने तुरंत धमकी के सामने झुकते हुए, 21 अप्रैल की शाम को एसपी चंद्रमोहन का तबादला पंचकूला स्थित पुलिस टेलीकॉम ब्रांच में कर दिया। इस ब्रांच में भेजा जाना महकमे में एक प्रकार की सजा समझा जाता है।

15 अप्रैल, 2025 को थाना शहर पलवल एसएचओ राधेश्याम के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करके गिरफ़्तार कर लिया गया था, उस पर आरोप था कि उसने कोटा राजस्थान से पकड़ कर लाए गए आबिद को भयंकर यातनाएं दीं उसे न केवल मिर्ची का घोल पिलाया गया बल्कि गुप्तांगों में भी मिर्ची का घोल सिरिंज के द्वारा इंजेक्ट किया। आबिद के साथ यह अमानवीयता राधेश्याम ने 5 दिसम्बर 2024 को की थी। समझा जा सकता है कि इतने अमानवीय टॉर्चर से किसी व्यक्ति की क्या हालत हो सकती है। आबिद से 15 अप्रैल 2025 को शिकायत मिलने पर एसपी चंद्रमोहन ने एक डीएसपी से जांच कराई, पीडि़तके आरोप सही पाए जाने पर वाजिब धाराओं में मुकदमा दर्ज कराके एसएचओ को गिरफ़्तार करने के बाद अदालत में पेश किया जहां से उसे न्यायियक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। पुलिस द्वारा प्रताडि़त लोगों की सुनवाई प्राय: न के बराबर होती है और पुलिस के उच्चाधिकारी तो इस तरह की शिकायतें सुनना तक भी पसंद नहीं करते लेकिन चंद्र मोहन ने न्यायोचित कार्रवाई करके पीडि़त को काफी हद तक राहत पहुंचाने का प्रयास किया था। राधेश्याम के बारे में यह भी पता चला है कि पिछले दिनों साइबर थाने के एसएचओ ने अपने कुछ आरोपियों को थाना सिटी की हवालात में बंद किया हुआ था। पता लगने पर राधेश्याम ने उनको हवालात से निकाल कर बेवजह बुरी तरह से मारापीटा था जबकि इसका उन मुल्जिमों से कोई ताल्लुक नहीं बनता था। एसएचओ साइबर थाने की शिकायत पर एसपी ने इसको लाइन हाजिर भी किया था।

समझा जाता है कि राधेश्याम के संबंध गौरक्षकों से काफी प्रगाढ़ हैं, गोरक्षा के इस तथाकथित धंधे से होने वाली लूट कमाई का रहस्य अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। दूसरी ओर संघी-भाजपाइयों की सरकार जिस सांप्रदायिकता की खुराक पर फल फूल रही है उसमें इन गोरक्षकों का काफी महत्व समझा जाता है। सुधी पाठक भूले नहीं होंगे कि ये वही बिटुआ है जो बीते दिनों मेवातियों का जीजा और दामाद बन कर बारात लेकर नूंह के इलाके में गया था और मेवातियों के विरोध की ताब न लाकर चप्पल छोड़ कर भागा था। तत्कालीन खट्टर सरकार ने बिट्टू जैसे दो चार प्यादों पर दिखावटी सा केस दर्ज करके तुरंत जमानत भी करा दी थी जबकि सैकड़ों मेवातियों के घर-दुकानें तबाह कर दिए गए थे और महीनों तक जमानत भी न होने दी। यह वही बिटुआ है जिसने कुछ मुसलमानों पर हत्या का केस दर्ज कराने के चक्कर में अपने ही भाई को जला कर मार डाला था। दरअसल, हुआ यूं था कि इसने अपने भाई पर पेट्रोल डाल कर जलने का नाटक करना चाहा था लेकिन आग बेकाबू हो गई और वो जल मरा था। तब इसके भाव और भी बढ़ गए जब तत्कालीन सीएम खट्टर शोक प्रकट करने इसके घर आया था।

इस तरह के टटपूंजियों की धमकियों के आगे यदि सरकार झुकने लगेगी तो आम जनता इस प्रशासन से क्या उम्मीद रख सकती है? जो सही काम करने वाले पुलिस अफसर को ही संरक्षण न दे सके वह सरकार जनता को क्या सुरक्षा प्रदान करेगी ? यह तथ्य भी किसी से छिपा नहीं कि यदि सरकार इसकी धमकी के आगे न झुकती तो इन सांप्रदायिक तत्वों में इतना दम नहीं कि सड़क जाम कर देते, इन तत्वों में इतना दम नहीं कि पुलिस के चार सोटे भी सहन कर सकें। दरअसल हकीकत तो यह है कि भाजपाई सरकार खुद इन तत्वों को प्रोत्साहित करके, पूरे पुलिस महकमे व अन्य अफसरों को संदेश देना चाहती है कि सांप्रदायिक तत्वों को अधिक से अधिक बढ़ावा एवं प्रोत्साहन मिलता रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2015 बैच के आईपीएस (एसपी) चंद्र मोहन के बारे में भ्रष्टाचार के कोई आरोप सामने नहीं आए और वे एक न्यायप्रिय अफसर होने के साथ-साथ राजनेताओं की चापलूसी में कोई बहुत ज्यादा विश्वास नहीं करते थे।

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Mazdoor Morcha
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