फरीदाबाद (मज़दू र मोर्चा) संघ-भाजपा की नफरती पाठशालाओं में गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को पीटने-अधमरा करने और हत्या करने की ट्रेनिंग लेकर निकले कथित गोरक्षक गुंडे अब अपने ही घर में आग लगाने लगे हैं। उनका यह दुस्साहस पुलिस और सरकार का संरक्षण मिलने से और भी बढ़ गया है। गोरक्षकों और पुलिस का गठजोड़ कितना प्रगाढ़ है इस बात से समझा जा सकता है कि पलवल में पुलिस ने दो हिन्दू युवकों को गोतस्करी के शक पर पकड़ कर हवालात में डालने के बजाय कथित गोरक्षकों के हवाले कर दिया। एक जानवर को बचाने के लिए मनुष्य की हत्या करने को हिंदू धर्म कहने वाले इन कथित गोरक्षकों ने एक बेगुनाह की जान ले ली।
वैसे तो पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना और कानून का उल्लंघन करने वालों को काबू करना है लेकिन बीती 22-23 फरवरी की रात को पलवल पुलिस ने खुद हत्यारों का ही साथ दिया। जानकारी के अनुसार उस रात राजस्थान से एक पिकअप दो पालतू गोवंश लादकर लखनऊ जा रही थी। श्रीगंगानगर राजस्थान निवासी पिकअप चालक बालकिशन ने बताया कि केएमपी पर पलवल पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर तथा दो अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। पिकअप पर गोवंश लदा होने पर उससे और साथी क्लीनर संदीप से उल्टे सीधे सवाल पूछे जाने लगे, उन्होंने पशुओं से संबंधित दस्तावेज दिखाए।
यदि पुलिस को दस्तावेज पर शक था तो पशुओं सहित दोनों को हिरासत में ले थाने ले जाकर सत्यापन करते। इसकी जगह पुलिस वालों ने कथित गोरक्षकों को फोन कर दिया। थोड़ी ही देर में एक बाइक पर सवार तीन युवक पहुंचे तो पुलिस ने बालकिशन और संदीप को उनके हवाले कर दिया। इन लोगों ने फोन कर कई अन्य ‘गोरक्षक’ गुंडों को भी बुला लिया। इसके बाद दोनों को एपीजे यूनीवर्सिटी के पास ले गए और गोतस्करी का आरोप लगाकर बंधक बना कर बुरी तरह पीटा और नकदी व फोन लूट लिए। हालांकि पुलिस नहीं बता रही लेकिन बहुत संभव है कि दोनों द्वारा खुद को हिंदू बताए जाने के बावजूद कथित गोरक्षक गुंडे उन्हें मुसलमान ही मान रहे हों जैसे कि फरीदाबाद के आर्यन मिश्रा हत्याकांड में हुआ था। उस मामले में कार में महिलाओं के भी बैठे होने के बावजूद खट्टर के गोरक्षक गुंडे अनिल कौशिक ने आर्यन को सिर्फ इसलिए गोली मार दी थी कि वह उसे मुसलमान समझा था। इस मामले में पिटाई से बेहोश होने पर लुटेरे गोरक्षक दोनों को सोहना रोड स्थित रजवाहे में फेक कर भाग गए। किसी तरह होश में आया बालकिशन तो मशक्कत कर बाहर निकल पाया लेकिन बेहोश संदीप की जान नहीं बच सकी। राहगीरों की मदद से सोहना थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की सूचना दी।
होना तो यह चाहिए था कि पुलिस तुरंत उसका केस दर्ज कर इलाज दिलाती लेकिन सोहना थाने वालों ने केस कैंप थाना क्षेत्र की घटना बताते हुए उसे टरका दिया। किसी तरह कैंप थाना पलवल पहुंचा तो पुलिस ने उसे भर्ती तो कराया लेकिन गायब संदीप को तलाशने की जरूरत नहीं समझी और न ही उसके परिवार वालों को घटना की सूचना दी गई। घटना के आठ दिन बाद संदीप का शव मंडकौला के पास नहर में मिलने पर पुलिस को हरकत में आना पड़ा और परिजनों को घटना की सूचना दी गई। अब पुलिस ने गोरक्षक गुुंडों देवराज, निखिल, नरेश, पवन और पंकज को गिरफ्तार किया है। लेकिन सवाल यह है कि उस सब इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों को हत्याकांड का मुजरिम क्यों नहीं बनाया गया जिन्होंने बेगुनाहों को गोरक्षक गुंडों को सौंपा था। सबसे बड़ा जुर्म तो उनका ही है, लेकिन पुलिस इस मामले को दबाने में जुटी नजर आ रही है। ऐसे में उन उच्चाधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए जो दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास करते रहे हैं।
पुलिस की बताई कहानी में पुलिस टीम की करतूत छिपा ली गई दोनों को पीटने का आरोप सीधे गोरक्षकों पर लगाया गया। जबकि पीडि़त बाल किशन ने मीडिया में बताया कि उसे पुलिस ने ही पकड़ कर गोरक्षकों के हवाले किया। संदीप की हत्या का मुख्य सूत्रधार तो उस सब इंस्पेक्टर को बनाया जाना चाहिए जिसने इन दोनों की पिटाई और हत्या कराने के इरादे से गोरक्षक गुंंडों को बुलाया था।
जुमला पुरुष प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त 2016 में ऐसे गोरक्षकों के बारे में कहा था कि कुछ लोग पूरी रात एंटी सोशल एक्टिविटी करते हैं, लेकिन दिन में वो गोरक्षक का चोला पहन लेते हैं। ”मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि ऐसे जो स्वयंसेवी निकले हैं उनका जरा डोजियर तैयार करें, इनमें से 70-80 फीसदी एंटी सोशल एलिमेंट निकलेंगे। राज्य सरकारों ने उनके इस बयान को जुमले की तरह ही लिया यही कारण है कि आज तक किसी भी गोरक्षक का डोजियर तैयार नहीं हुआ, उल्टे डबल इंजन सरकारों की पुलिस गोरक्षक गुंडों को बचाने के हर प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। पशुपालक नासिर-जुनैद का हत्यारोपी मोनू मानेसर हो या नूंह के हाजी जमात अली के पशु लूटने वाला दंगाई बिट्टू बजरंगी या आर्यन को मुसलमान समझ कर हत्या करने वाला सरकारी स्पेशल गोरक्षा टास्क फोर्स का गुर्गा अनिल कौशिक समाज की नजर में भले ही ये हत्यारे और अराजक हों लेकिन इन सबको खट्टर-सैनी सरकार का संरक्षण प्राप्त है। प्रधानमंत्री मोदी भले ही इनको एंटी सोशल एलिमेंट कहें लेकिन उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि यही वो अराजकतत्व हैं जो फासिस्टवादी राज को मजबूती प्रदान करते हैं। भले ही पुलिस ने इन गुंडों को पकड़ लिया है लेकिन जैसे इस तरह के पहले के मामलों में आरोपियों को जेल से लेकर बेल तक और केस में बरी कराने के सारे प्रयास किए जाते रहे हैं सरकार के खर्च पर इन्हें भी यह सुविधा मिलने की पूरी संभावनाएं हैं।