गूजर-अदलखा की लालच की भेंट चढ़ेगी मोटर मार्केट

गूजर-अदलखा की लालच की भेंट चढ़ेगी मोटर मार्केट
October 12 13:52 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी-खट्टर सैनी की ट्रिपल इंजन सरकारों ने बीते ग्यारह सालों में लोगों को रोजगार तो दिया नहीं, जो बेचारे स्वरोजगार के जरिए खुद और कई परिवारों का पेट पाल रहे हैं उन्हें भी उजाडऩे की साजिशें रची जा रही हैं। यह तो होना ही है जब भूमाफिया और डीलरों को जनता राजनेता बनाएगी तो ये लोग सत्ता का दुरुपयोग उनकी जमीनें हड़प कर अपने मॉल बनाने में ही करेंगे। बात हो रही है तिकोना पार्क स्थित करीब साढ़े पांच दशक पुरानी मोटर मार्केट की, बताया जा रहा है कि वैध रूप से बनाई गई 80 दुकानों को सत्ता के जोर पर तोड़ा जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बडख़ल विधायक को यहां की सड़क चौड़ी करने के लिए तिकोना पार्क का कायाकल्प किए जाने का प्लान सुनाते हुए देखा जा सकता है लेकिन जानकार कहते हैं कि विवादित जमीनों पर कब्जा करने में माहिर धनेश अदलखा की नजर इस जमीन पर तब से है जब एनआईटी बस अड्डे को मॉल बनाने का प्लान तैयार किया गया था। डीलर से लीडर बने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की भी इस बेशकीमती जमीन पर नीयत खराब बताई जा रही है।

जानकारों के अनुसार मोटर मार्केट की सारी अस्सी दुकानें पूरी तरह वैध हैं यानी इन्हें कानूनी तौर पर हटाया जाना आसान नहीं है। ऐसे में गूजर-अदलखा सत्ता के दम पर प्रशासन का दुरुपयोग कर इस मार्केट को तोडऩे की साजिशें रच रहे हैं। दुकानदारों में एकता नहीं होने के इनकी राह और आसान हो गई है। सुधी पाठकों को बताते चलें कि यह मोटर मार्केट पाकिस्तान से आए विस्थापितों को रोजगार देने के इरादे से 1969-70 में बसाई गई थी। तत्कालीन सरकार और फरीदाबाद विकास बोर्ड, जो बाद में फरीदाबाद कांप्लेक्स एडमिनिस्ट्रेशन और वर्तमान में नगर निगम हुआ, ने बाकायदा 99 साल की लीज पर ये दुकानें आवंटित की थीं। मोटर मार्केट तो बन गई लेकिन काफी पेटी दुकानदारों को भटकना पड़ता था। बताते हैं कि पूर्व मंत्री एसी चौधरी ने इन पेटी दुकानदारों को इसी मार्केट के पीछे खाली पड़ी करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बसा दिया था। इन दुकानदारों से कोई किराया आदि नहीं वसूला जाता था,यानी सत्ता के बल पर बसाए गए इन दुकानदारों का जमीन पर कोई कानूनी अधिकार नहीं था। इस तरह की जमीनों को तलाशने में माहिर अदलखा के आदेश पर बीते दिनों नगर निगम ने साढ़े तीन एकड़ में बसे सत्तर से अधिक पेटी दुकानदारों को उजाड़ कर मॉल बनाने की पहली बाधा पार कर ली।

जमीन तो खाली हो गई लेकिन मोटर मार्केट की लीज वाली अस्सी दुकानें सड़क पर होने के कारण मॉल का सपना पूरा होना मुश्किल है। पेटी दुकानदारों को तो हटा दिया गया लेकिन लीज की दुकानों को नहीं हटाया जा सकता। मार्केट में चर्चा है कि गूजर-अदलखा को बस अड्डे को मॉल में परिवर्तित करने की योजना बनाते समय ही यहां भी मोटी कमाई की संभावनाएं नजर आ गई थी। इसलिए उनके इशारे पर नगर निगम ने 2021 से ही इन दुकानदारों से लीज फीस व अन्य शुल्क लेना बंद कर दिया था ताकि भविष्य में कार्रवाई के लिए कोई बहाना बनाया जा सके।

भाजपा की सत्ता को एक साल पूरा होते ही अदलखा-गूजर की जोड़ी मॉल का सपना पूरा करने के लिए पावर का बेजा इस्तेमाल करने में लग गई है। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने अस्सी दुकानदारों को कोई नोटिस नहीं दिया है लेकिन अधिकारी दुकानों को तोडऩे की बातें कह कर दबाव बना रहे हैं। विधायक अदलखा भी सार्वजनिक रूप से इन दुकानों को तोडऩे की बात कह रहा है। इन दुकानों को तोडऩे के लिए यह बहाना बता रहा है कि मोटर मार्केट में गाडिय़ां सड़क तक खड़ी रहने से जाम लगता है, इसलिए दुकानें तोड़कर सड़क चौड़ी की जाएगी।

डरे-दबे और चुके हुए दुकानदारों का कहना है कि यदि सड़क चौड़ी करनी है तो पहले वैष्णों माता मंदिर द्वारा सड़क पर किया गया 15 फुट चौड़ा और 150 लंबी अवैध दीवार तुड़वाए, दीवार के बाद भी चार फीट सड़क और दबा रखी है। दुकानें तो नगर निगम और बिजली महकमे द्वारा लगाए गए खंभों से भी दस से पंद्रह फीट पीछे हैं। मंदिर की अवैध दीवार नहीं तोड़ेंगे वैध दुकानें तोड़ेंगे।

अस्सी-अस्सी गज वाली इन अस्सी दुकानों के लीज होल्डरों की दूसरी या तीसरी पुश्त काम कर रही है। यानी एक दुकान में एक से अधिक मालिक हैं और इनमें औसतन आठ से दस कारीगर काम कर रहे हैं, यानी मार्केट से करीब एक हजार परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। दुकानें टूटने से एक हजार परिवार बेरोजगार हो जाएंगे। बड़ी बात यह है कि इन सबको बेरोजगार होने की चिंता तो है लेकिन अदलखा-गूजर का विरोध में खड़े होने हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा। इसका कारण मार्केट में बैठे जयचंद टाइप के विश्वासघाती हैं, दरअसल अदलखा ने उन्हें लॉलीपॉप दे रखा है कि मॉल में उन्हेें प्राइम लोकेशन पर मनपसंद दुकान देगा, इसी झांसे में आकर ये जयचंद दुकानें तोड़े जाने की घोषणा पर उसे माला पहना-लड्डू खिलाकर उसका स्वागत करने में लगे हैं। जयचंदों के कारण बाकी दुकानदार पृथ्वीराज बनने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। यहां समझने वाली बात यह है कि सारे दुकानदारों को अच्छी तरह मालूम है कि कानूनी तौर पर उन्हें कोई हटा नहीं सकता, लेकिन सत्ता का खौफ इतना है कि अपनी दुकानें तोडऩे की बंदरघुड़की पर ही मान बैठे हैं कि यह सब होकर रहेगा। बताया जा रहा है कि दरअसल, अदलखा ने तो नहीं लेकिन निगम अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दुकानें तोडऩे के बाद उन्हें पीछे दुकानें बना कर दी जाएंगी। चर्चा यह है कि अदलखा-गूजर ने तो मॉल का खाका भी तैयार कर लिया है, जिसमें 280 दुकानें बनाई जाएंगी। अस्सी तो इन दुकानदारों को दी जाएंगी, बाकी दो सौ में आधी अदलखा और आधी गूजर बांट लेंगे। लोगों में यह भी चर्चा है कि यदि सारा माल गूजर-अदलखा ही बांट लेंगे तो नगर निगम का असली मालिक यानी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल क्या भाड़ झोंकने के लिए बैठा है।

बेचारे दुकानदार बता रहे हैं कि लीज में उन्हें अस्सी गज जगह दी गई थी, इसके बदले केवल छत्तीस गज जगह ही देने की बात की जा रही है, उस पर निर्माण भी खुद ही कराना होगा। सुधी पाठकों को यह मजेदार बात भी जाननी चाहिए कि अदलखा को विधायक बनाने में पूरी मोटर मार्केट में जोर शोर से समर्थन किया था। चुनाव से पहले प्रत्याशी अदलखा का पूरी मार्केट ने फूल माला पहना कर भव्य स्वागत किया और वोट और नोट देकर जिताया। अहसान फरामोश को सत्ता मिली तो अब वह अपने असली रूप में आ गया है, दुकानदारों में यदि दुकानें बचाने के एकजुट होकर लडऩे की हिम्मत नहीं है तो आज उसकी, कल मेरी बारी की तर्ज पर बर्बाद होने के लिए तैयार रहें।

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Mazdoor Morcha
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