पंडाल लगाने का कोटेशन खुला दो अप्रैल को, काम एक दिन पहले ही शुरू हो गया फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी-शाह के गुजराती शासन मॉडल में खुली लूट कमाई कैसे की जाती है इसका बेहतरीन उदाहरण चार अप्रैल को सेक्टर 12 में होने वाली स्वच्छ भारत मिशन 2.0 रैली की तैयारियों में नजर आ रहा है। निगम ने दिखावे के लिए एक अप्रैल को एक तथाकथित राष्ट्रीय अखबार में कोटेशन प्रकाशित करवाया और इसी दिन से जेबी डेकोर नामक कंपनी ने बाकायदा टेंट लगाना भी शुरू कर दिया जबकि कोटेशन दो अप्रैल को खोला जाना था। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में भाजपाई सरकारों का जो भी काम हो, यही जेबी डेकोर ही करती है, जनता को मूर्ख बनाने के लिए टेंडर की औपचारिकता भी निभाई जाती है।
नगर निगम के अधिशासी अभियंता-।।। संजीव कुमार की ओर से उक्त में प्रकाशित कराई गई कोटेशन आमंत्रण सूचना में चार अप्रैल को सीएम नायब सैनी की उपस्थिति में सेक्टर 12 टाउन पार्क में विकसित फरीदाबाद रैली, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) आईईसी इवेंट के लिए जर्मन टेंट का इंतजाम करने के लिए कंपनियों से कोटेशन आमंत्रित किए गए। करीब एक करोड़ पंद्रह लाख 44 हजार रुपये में कंपनी को जनता के बैठने के लिए 48,600 वर्गफुट का वाटर प्रूफ पंडाल, उसमें 60 हजार वर्ग फुट का फैब्रिक कार्य, वातानुकूलित स्टेज, 95 हजार वर्ग फुट सिंथेटिक कारपेट, सीएम के लिए विशेष फायरप्रूफ एसी लाउंज, वीआईपी लाउंज, कलाकारों के लिए लाउंज, सात हजार कुर्सियां, 125 किलोवाट के 16 जेनरेटर, और 63 किलोवाट के सात जेनरेटर सहित अन्य सामान उपलब्ध कराना था, यानी कि अपनी बिजली का कोई भरोसा नहीं। विज्ञापन में बताया गया कि कोटेशन दो अप्रैल को दोपहर एक बजे खोला जाएगा। जबकि जेबी डेकोर नाम की कंपनी तो एक दिन पहले से ही काम कर रही थी। मौके पर पहुंचे संवाददाता को बताया गया कि जेबी डेकोर को काम मिला है, जब उनसे पूछा गया कि कोटेशन तो एक दिन बाद खुलना है, काम कैसे शुरू कर दिया तो चुप्पी साध गए। जानकारों के अनुसार इस तरह की इवेंटबाजी में बहुत मोटी लूट-कमाई होती है, कोटेशन में चीजें बढ़ा बढ़ा कर लिखी जाती हैं इसके विपरीत मौके पर वो काम होते ही नहीं।
उदाहरण देकर बताया कि सीएम कार्यक्रम में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बिजली महकमा पूरी तैयारी करेगा, बावजूद इसके 125 किलोवाट के 16 जेनरेटर की मांग की गई है, अव्वल तो ये लगाए ही नहीं जाएंगे, अगर लगाए भी गए तो बमुश्किल एक या दो। कार्यक्रम जब एक दिन का है तो 63 किलोवाट के सात जेनरेटर दो दिन तक क्या करेंगे? इसी तरह सात हजार की जगह बमुश्किल दो ढाई हजार कुर्सियां ही लगाई जाएंगी। इसी तरह के अनेक कार्य केवल कागजों पर होंगे जिनका धन आपस में बंदरबांट कर लिया जाएगा। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह कार्यक्रम भाजपा का है लेकिन इवेंटबाजी में होने वाला खर्चा जनता की जेब से निकालने के लिए इसे सरकारी कार्यक्रम का नाम दे दिया जाता है। संवाददाता ने अधिशासी अभियंता संजीव कुमार से 2 अप्रैल को शाम साढ़े चार बजे जानकारी ली तो उनका कहना था कि काम कर रहे हैं, अभी कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है। इस पर पूछा गया कि क्या कोटेशन फाइनल नहीं हुआ है तो उन्होंने कहा कि फाइनल हो गया है, कोई डीएन नाम की कंपनी है, कागज तैयार करवाए जा रहे हैं। यानी दो अप्रैल की शाम तक भी कंपनी को स्वीकृति पत्र नहीं मिला था और उसे काम करते हुए दो दिन हो रहे थे। जानकारों का यह भी कहना है कि कोटेशन में बताई गई रकम तो अनुमानित है बिल बनते बनते यह रकम दोगुनी होने की पूर्ण संभावना है। रही बात सरकार
सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा रैली के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर शहर के समाजसेवी वरुण श्योकंद ने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट डाल कर लिखा है कि चार तारीख को मुख्यमंत्री जी की रैली होने जा रही है, सेक्टर 12 फरीदाबाद में। एमसीएफ ने टेंडर निकाला है 1.15 करोड़ का 1/4/26 को टेंट लग भी चुका कब कोटेशन भरेंगे ठेकेदार, हर काम में अफसरों को पैसा खाना है टेंडर निकाल के। उनकी पोस्ट पर सुरिंदर कुमार ने लिखा कि भारत की चाहे ऐसी तैसी हो जाए रैलियां नहीं रुकनी चाहिए। देविंदर सिवास लिखते हैं कि ये बीजेपी वालों ने अफसरों को भी पैसा खाना सिखाया, पहले कितने भोले थे हमारे अफसर। इस पर वरुण सिंघल ने लिखा कि अफसर तो कभी भोले नहीं हुए। रमेश जोशी ने लिखा इनमें 90 प्रतिशत हरामखोर हैं जबकि अरविंद पंवार ने लिखा कि आप इसकी गहराई में जाओ बहुत कुछ निकलेगा, ऑनलाइन में सब गोलमाल चल रहा है। यानी सीएम की रैली अभी हुई नहीं लेकिन उसके भ्रष्टाचार के चहुंओर चर्चे शुरू हो गए हैं। द्वारा स्वच्छता और विकास के ढोल पीटने की वह पूरी जनता को दिखाई दे रहा है कि पूरा शहर कितना साफ सुथरा है और सीवर उफन रहे हैं किसी से छिपा नहीं है, जगह जगह संघियों की गाय माता कूड़े में मुंह मारकर अपना भोजन तलाश करती फिरती है और विकास के नाम जो इस शहर और राज्य का विनाश हो रहा है उसका विवरण जन जन की नजरों के सामने है उसे सरकार कितना ही छिपाना चाहे, छिपा न सकेगी।