गज़़ल

गज़़ल
September 25 06:07 2025

कुछ औरों के बारे में कुछ
अपने विषय में ग़लतफ़हमियांं
लोग पालते मिले शौक से
तरह तरह की ग़लतफ़हमियां ।

ग़लतफ़हमियां भी जुकाम सी
बीमारी है सबको होती
इसको उसको तुझको मुझको
किसको नहीं हैं ग़लतफ़हमियां ।

वे हमको जैसा हैं समझते
हम खुद वैसा नहीं मानते
या तो उनको हैं या हमको
पर जरूर हैं ग़लतफ़हमियां ।

शौहर औ बीबी का प्यार
भी हो जाता है लाचार
जब मन में मीथेन गैस सी
उठें विषैली ग़लतफ़हमियां ।

प्यार मोहब्बत रिश्ते नाते
सारे दुनियावी सम्बन्ध
चाट जातीं जड़ से दीमक सी
दिल में बैठी ग़लतफ़हमियांं ।

न तो कोई गिला न शिकवा
फिर भी खफ़़ा खफ़़ा है मितवा
बिन बोए ही उग आती हैं
खरपतवार सी ग़लतफ़हमियां ।

दिल में गहरी बैठ गईं तो
सारी उमर परेशां करतीं
एक बार हो जाती हैं तो
मुश्किल मिटतीं ग़लतफ़हमियां।

शायद क़ुदरत नहीं चाहती
कोई किसी को पूरा जाने
इसी लिए पर्दा रखने को
पैदा करती ग़लतफ़हमियां।

सच्चाई को छिप कर रहने
की सी आदत पड़ी हुई है
आमफ़हम गर होती हकीकत
तो क्यों होतीं ग़लतफ़हमियां ।

ग़लतफ़हमियां होते हुए भी
बनी रहती है यह खुशफ़हमी
होंगी और किसी को होंगी
हमें नहीं हैं ग़लतफ़हमियां

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles