नई दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) ईएसआई कॉर्पोरेशन के बढ़ते सरकारीकरण का संज्ञान लेते हुए ऑल इन्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में गम्भीरत से विचार किया। विदित है कि कॉर्पोरेशन न तो कोई सरकारी महकमा है और न ही सरकार इस पर कोई पैसा खर्च करती है। कॉर्पोरेशन एक स्वायत संस्था है जिसे मज़दूरों, उद्योगपतियों व सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जाता है। इसके काम-काज तथा तमाम नीतिगत फैसले कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधियों द्वारा लिए जाते हैं। इसके विपरीत पिछले कुछ समय से, सरकार इन फैसलों को बदल कर अपने मनमाने फैसले लागू कर रही है। इसी संदर्भ में एटक के राष्ट्रीय कार्यकाकरणी ने दिनांक 8-9 नवम्बर को एक प्रस्ताव पारित करके निम्नलिखित फैसले लिए ।
हमारी माँगें :- 1. निगम की बैठक में लिए गए निर्णयों को सर्वोच्च माना जाना चाहिए और प्रशासनिक तंत्र द्वारा लिए गए निर्णयों से उन्हें पलटा नहीं जाना चाहिए। क्षेत्रीय बोर्डों, अस्पताल विकास समितियों और सुविधा सम्मेलनों में ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के सुझावों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप चिकित्सा देखभाल में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उदाहरण के लिए 2008 में, निगम ने निर्णय लिया कि निगम के अस्पतालों में उपलब्ध न होने वाली सुविधाएँ, संबद्ध अस्पतालों के माध्यम से प्रदान की जाएँगी। इस निर्णय के विपरीत, 2023 में, निगम ने एक परिपत्र जारी कर घोषणा की कि अपनी रेफरल नीति के तहत, ईएसआई अस्पतालों में उपलब्ध न होने वाली सुविधाओं के लिए, मरीजों को संबद्ध अस्पतालों के बजाय सफदरजंग व एम्स, पीजीआई चंडीगढ़ आदि जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेफर किया जाएगा। इससे अक्सर मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है और कुछ मौतों की भी खबरें आती हैं। इसलिए, 2023 के परिपत्र को वापस लिया जाना चाहिए और पिछले परिपत्र को बहाल किया जाना चाहिए, जिसके तहत गंभीर स्थिति वाले मरीजों को सीधे पैनलबद्ध अस्पतालों में भेजने की आवश्यकता थी। क्षेत्रीय बोर्डों और स्थानीय समितियों को अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने क्षेत्रों में अस्पताल प्रशासन के साथ मिलकर मरीजों की भलाई में सुधार कर सकें। राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर कार्यरत प्रत्येक ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों को सभी ईएसआईसी समितियों में शामिल किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय कार्यालयों, शाखा कार्यालयों, ईएसआईसी/ईएसआईएस अस्पतालों और औषधालयों में स्थिति सुधार सम्मेलन आयोजित किए जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक बीमाकृत व्यक्तियों (आईपी) की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
2. निगम लगातार ईएसआईसी कवरेज का विस्तार कर रहा है, लेकिन अस्पतालों सहित, अनुरूप सुविधाएँ प्रदान करने में विफल रहा है। हालांकि कवरेज का विस्तार स्वागत योग्य है, लेकिन उससे पहले, बीमाकृत व्यक्तियों और उनके परिवारों को सेवाएँ प्रदान करने के लिए बुनियादी ढाँचा स्थापित किया जाना चाहिए।
3. शुरुआत में, बीमाकृत कर्मचारियों के बच्चों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता था, और उनकी पात्रता के लिए पाँच साल के कर्मचारी के अंशदान की आवश्यकता होती थी। बाद में इस आवश्यकता को घटाकर उसी वर्ष 31 मार्च से पहले भर्ती होने की शर्त कर दिया गया। इस बदलाव के कारण वैध कर्मचारियों के बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा है, जबकि उद्योगपति और ठेकेदार अपने रिश्तेदारों को पंजीकृत व्यक्ति बताकर अपने बच्चों का नामांकन करा रहे हैं। इसलिए, हेराफेरी की गुंजाइश कम करने के लिए पिछले पाँच साल के नियम को लागू किया जाना चाहिए। सभी ईएसआईसी कॉलेज केवल वहीं खोले जाने चाहिए जहाँ पर्याप्त संख्या में बीमाकृत कर्मचारी हों। अगर इन्हें राष्ट्रीय महत्व के कॉलेज घोषित किया जाता है, तो कर्मचारियों के बच्चों को अधिक कोटा और अन्य लाभ मिलेंगे।
4. ईएसआईसी अधिनियम के अंतर्गत कर्मचारियों के बच्चों की परिभाषा का विस्तार कम से कम 25 वर्ष की आयु तक का किया जाना चाहिए।
5. 9.10 जनवरी, 2024 को आयोजित अपनी 193वीं बैठक के एजेंडा (पूरक) मद 2 के अनुसार, निगम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन के 3 प्रतिशत अंशदान के साथ सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह उन कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है जिन्होंने अपने अंशदान से इस संपूर्ण संरचना का निर्माण किया है, क्योंकि निगम स्वयं अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से कुल वेतन का लगभग 1 प्रतिशत ही एकत्र करता है और सभी सुविधाएँ प्रदान करता है। इसलिए, यह अंशदान कर्मचारी के अंतिम वेतन का 0.75 प्रतिशत होना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी अभी भी अंशदान करते हैं। निगम को शेष व्यय वहन करना चाहिए, जैसा कि नियोक्ता उनके रोजगार के दौरान करता है।
6. कर्मचारियों के माता-पिता के इलाज के लिए आय सीमा 1,08,000 रुपये के बजाय कम से कम 1,80,000 वार्षिक होनी चाहिए, जैसा कि सभी सरकारी योजनाओं में लाभ के लिए न्यूनतम पात्रता सीमा है।
7. ईएसआईसी अस्पतालों और औषधालयों में किसी भी व्यक्ति का इलाज बिना अंशदान के नहीं किया जाना चाहिए, चाहे अंशदान सरकार द्वारा किया जाए या किसी अन्य एजेंसी द्वारा। राज्य सरकार से संबंधित मुद्दे:- राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रही हैं। केवल दिल्ली में ही प्रति बीमाकृत परिवार पर लगभग 10,000 रुपये खर्च हो रहा है,(यह सारा धन कॉर्पोरेशन द्वारा ही खर्च किया जाता है,) जबकि अन्य तीन राज्य लगभग 3,000 रुपये की अधिकतम सीमा के आसपास खर्च कर रहे हैं, जबकि शेष राज्य इस स्तर से नीचे हैं। निगम नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर रहा है, लेकिन वे उन्हें राज्य सरकारों के अधीन खोल रहे हैं, जबकि पूरा धन निगम द्वारा खर्च किया जा रहा है।
8. राज्य के प्रत्येक ईएसआई औषधालय में आठ प्रकार के प्रारंभिक रोग संबंधी परीक्षण (जैसा कि ईएसआईसी परिपत्र द्वारा पूर्व में जारी किया गया है।, ड्रेसिंग और इंजेक्शन आदि की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए, प्रत्येक औषधालय को उपकरण, लैब तकनीशियन और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
9. राज्य सरकारों को अस्पतालों और औषधालयों को पर्याप्त दवाइयाँ उपलब्ध करानी चाहिए और समय पर बजट उपलब्ध कराना चाहिए ताकि कमी की स्थिति में औषधालय के चिकित्सा अधिकारी दवाइयाँ खरीद सकें और मरीजों को उपलब्ध करा सकें।
10. बेहतर द्वितीयक देखभाल प्रदान करने के लिए ईएसआईसी अस्पतालों में सभी प्रकार के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
11. महंगाई भत्ते में वृद्धि के कारण, कई कर्मचारी धीरे-धीरे ईएसआईएस पात्रता सीमा से बाहर हो रहे हैं, इसलिए इसकी वेतन पात्रता सीमा को बढ़ाकर कम से कम 42,000 रुपये मासिक किया जाना चाहिए। कॉर्पोरेशन में एटक का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को समय का आभाव रहता है इसलिए एटक फरीदाबाद के नेता कामरेड बेचू गिरी को विशेषाधिकार देते हुए ईएसआईसी मामलों का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। इसके चलते अब वे कॉर्पोरेशन मुख्यालय से सीधे सम्पर्क साध सकेंगे।