फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हाल ही में मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए तीन एलाइनमेंट रूट में से एक को भी मुख्यमंत्री सैनी के कार्यालय ने मंजूरी नहीं दी है। सीएम को ये रिपोर्ट न मंजूर करनी थीं, न करनी हैं और न कभी होंगी। मज़दूर मोर्चा तो एफएनजी प्रोजेक्ट को जून 2022 से ही सरकारी पाखंड बताता आ रहा है.
जब पूर्व सीएम खट्टर ने इसकी घोषणा की थी। संघ की शाखाओं से झूठ, प्रोपेगंडा जुमलेबाजी सीख कर निकले प्रधानमंत्री मोदी हों, खट्टर या सीएम सैनी इनकी कार्यशैली है, काम नहीं करना उसका ढोल पीट कर मात्र दिखावा करना। मीडिया का इस्तेमाल भी बिना काम के काम का ढिंढोरा पीटने में करो। बीते ग्यारह साल से डबल- इंजन सरकारें यही करती आ रही हैं। एफएनजी भी इसी प्रोपेगंडा का हिस्सा है।
पूर्व सीएम खट्टर से लेकर केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और अब सीएम सैनी बीते तीन वर्षो में एफएनजी के सुनहरे ख्वाब जनता को दिखाते आ रहे हैं लेकिन इसे फरीदाबाद में कहां उतारा जाएगा, किस जगह यमुना नदी का पुल बनेगा, यह भी आज तक तय नहीं हो सका है। एफएमडीए की नगर योजनाकार मधुमिता मोइत्रा के अनुसार इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने तीन एलाइनमेंट रूट बना कर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे हुए हैं लेकिन उनमें से किसी को स्वीकृति नहीं मिली है। इसका कारण बताया जा रहा है कि तीनों एलाइनमेेंट रूट में अवैध कब्जे, अवरोध आदि की समस्याएं हैं। उनके अनुसार अब एफएमडीए की ओर से नया एलाइनमेंट रूट तलाशने के लिए सर्वे कराया जा रहा है, सर्वे रिपोर्ट बना कर स्वीकृति के लिए सीएम कार्यालय भेजी जाएगी।
भाजपाइयों से काम नहीं काम का ढिंढोरा पीटने का फार्मूला एफएमडीए के निकम्मे अधिकारियों ने भी सीख लिया है। उन्हें भी मालूम है कि कुछ होना नहीं है लेकिन दिखावे के लिए सर्वे का पाखंड करने जा रहे हैं। समझने वाली बात यह है कि जब लोक निर्माण विभाग तीन एलाइनमेंट रूट बना चुका है तो एफएमडीए के अधिकारी कौन सा नया रूट खोजेंगे। मान लिया जाए कि नया रूट तलाश भी लें तो क्या उस में अवैध कब्जे और अवरोध की अड़चनें नहीं होंगी। जब सीएम सैनी लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई तीन रिपोर्ट में से एक को भी मंजूरी नहीं दे रहे हैं तो एफएमडीए के सर्वे की भी नहीं ही देंगे।
दरअसल, सीएम सैनी हों, केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर या डबल इंजन सरकार के जनप्रतिनिधि सब जानते हैं कि जब जनता राम मंदिर, हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर उन्हें सत्ता दे देती है तो विकास कार्य क्यों कराए जाएं। जब जनता का काम विकास कार्य की घोषणा से ही चल जाता है तो विकास कार्य क्यों कराए जाएं। अधिकारी भी जानते हैं कि काम नहीं कराना है बस सरकार और नेताओं की जी हुजूरी करते रहना है, जनता का क्या, वो तो धर्मांधता की चाशनी चाट कर सामाजिक सरोकार और अधिकार भूले बैठी है। जब तक वह भुलावे में है भ्रष्ट नेता सत्ता की मलाई काटते रहेंगे और भ्रष्ट अधिकारी उसकी गाढ़ी कमाई लुटा कर जेबें भरते रहेंगे।
यदि काम ही करना होता यानी कि उक्त प्रोजेक्ट बनाना ही होता तो तीन साल पहले सर्वे करके जमीन अधिग्रहण का आदेश जारी करते ओर काम शुरू करके कहते कि हमने काम शुरू कर दिया और अब तक यह प्रोजेक्ट पू्र्ण हो गया होता, लेकिन ये तो करना नहीं है, करना वही है जो ये कर रहे हैें। रही बात अड़चनों व अवैध निर्माणों की तो काम करने वाली सरकार के लिए यह कोई समस्या नहीं होती, शायद ही कोई दिन खाली जाता होगा जिस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में डीटीपी व शहरी क्षेत्रों में हूडा व एमसीएफ के बुलडोजर तोडफ़ोड़ कर अवैध निर्माण न हटा रहे हों।