फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) फरीदाबाद को नोयडा से जोडऩे वाले मंझावली यमुना पुल का शिलान्यास हुए करीब 12 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी इस पर आवागमन शुरू नहीं हो सका है। हर दूसरे-तीसरे महीने अखबारों में इससे सम्बन्धित कोई न कोई बयान सरकार की ओर से आता रहता है ताकि लोगों की आस बंधी रहे। इसी तर्ज पर $फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) के नाम से नया शगूफा बीते आठ साल से हवा में तैर रहा है। धरातल पर कोई काम नजर नहीं आता लेकिन अखबारों में इसे लेकर हर दूसरे-तीसरे महीने स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का बयान जरूर छपता रहता है।
इसमें वे यह बताना नहीं भूलते कि इस मार्ग के शुरू हो जाने से $फरीदाबाद के उन हजारों लोगों को कितना भारी लाभ होगा, जिन्हें प्रति दिन नोएडा व गाजियाबाद का आवागमन करना पड़ता है। हाल ही में प्रकाशित उनके बयान में बताया गया है कि अलाइनमेंट का काम पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए 900 करोड़ का बजट रखा गया है। अलाइनमेंट होने के बाद प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा। लेकिन यह नहीं बताया कि यह मुख्यालय हरियाणा सरकार का होगा या केन्द्र सरकार का अथवा एनएचएआई का? समझने वाली बात यह है कि बीते आठ साल से बजाए जा रहे इस ढोल को अभी तक किसी भी मुख्यालय से कोई मंजूरी नहीं मिली है। यह भी नहीं बताया जा रहा कि इस प्रोजेक्ट में यूपी सरकार की क्या भूमिका है?
विदित है कि मंझावली वाले यमुना पुल पार करने के बाद यूपी सरकार ने अपने हिस्से की सड़क बनाने के लिए अभी तक जमीन भी अधिग्रहीत नहीं की है। यही स्थिति एफएनजी वाले इस प्रोजेक्ट की प्रतीत हो रही है। हरियाणा क्षेत्र में इसके लिए बनने वाली मात्र नौ किलोमीटर लम्बी सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण तो दूर अभी, तक जमीन की नपत व निशानदेही तक नहीं हो सकी है। ये काम तभी हो पाएंगे जब मुख्यालय से मंजूरी मिलेगी। यानी अभी तक यह भी नहीं कहा जा सकता कि मंजूरी मिलेगी या नहीं। यूं भी मात्र मंजूरी मिलने भर से धरातल पर कोई काम हो नहीं जाता। न केवल हरियाणा सरकार द्वारा बल्कि केन्द्र सरकार द्वारा मंजूर सैकड़ों प्रोजेक्ट फाइलों के बीच बीते कई वर्षों से दबे पड़े हैं। बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं ईएसआई कॉर्पोरेशन के स्थानीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में दूसरी बिल्डिंग बनाने का वर्चुअल शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी ने 27 अक्टूबर 2024 को किया था जो आज तक फाइलों से निकल कर धरातल तक नहीं पहुंच पाया।
जानकारों का मानना है कि $फरीदाबाद को यूपी से जोडऩे वाले इन दोनों प्रोजेक्टों के पीछे मंत्री गूजर का एकमात्र लक्ष्य जमीनों का रेट बढ़ाना है, जो तेजी से बढ़ भी रहा है। यह किसी से छिपा नहीं है कि मंत्री जी ने इस क्षेत्र में जमीनों का अच्छा-खासा कारोबार जमाया हुआ है। उनके द्वारा आए दिन दिए जाने वाले उक्त बयानों से उनके कारोबार में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो रही है। जहां तक सवाल है, इस मार्ग पर आवागमन करने वालों की भलाई का, उसमें मंत्री जी की कोई रुचि नहंी है। उनकी भलाई का जिक्र तो केवल वोट बैंक बनाने के लिए किया जाता है। नि:संदेह इन दोनों मार्गों के चालू हो जाने से आवागमन करने वाले हजारों यात्रियों को आर्थिक लाभ होने के साथ-साथ समय की भी भारी बचत होगी। इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण भी काफी घट जाएगा। इन मार्गों के इतने वर्षों तक चालू न होने को लेकर जनता को मंत्री से सवाल पूछना चाहिए कि उनका जो नुकसान हो रहा है उसका जिम्मेदार कौन है?