फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के फर्जी डिग्री वाले एक्सईएन पद्मभूषण नासवा की पारिवारिक सदस्य स्वाति नासवा की गैर लाइसेंसी क्षेत्र में बनी अवैध बहुमंजिला इमारत को बचाने के लिए निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास बेताब नजर आ रही हैं। लाइसेंसी सैनिक कॉलोनी के पड़ोस में बनाई गई इस अवैध इमारत को वैध करने के लिए पूरे चार एकड़ में बनाई गईं तीस अन्य इमारतों को कॉलोनी बता कर रेगुलराइज करने की कवायद की जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस काम को अंजाम देेने के लिए ही भ्रष्टाचारी सीटीपी सतीश पाराशर को नगर निगम का चार्ज दिलवाया गया है क्योंकि गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा होने के कारण निगम के कई अधिकारियों ने हाथ खींच लिए थे। माना जा सकता है कि यह सारा काम मोटे नजराने और पद्मभूषण की बेशकीमती अवैध इमारत को बचाने के लिए ही किया जा रहा है।
सेक्टर 49 में सैनिक कॉलोनी से ठीक लगते हुए चार एकड़ कृषि भूमि पर भूमाफिया ने तीस प्लॉट काट दिए। इन अवैध प्लॉटों पर अवैध निर्माण करने पर नगर निगम का बुलडोजर न चले इसके लिए भूमाफिया ने नगर निगम के एक्सईएन पद्मभूषण नासवा को बहुत ही सस्ते दाम पर 220 गज का एक प्लॉट दे दिया। यह प्लॉट नासवा की पारिवारिक सदस्य स्वाति नासवा के नाम पर लिया गया। इसके एवज में भूमाफिया को नगर निगम द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने का आश्वासन मिल गया।
डीटीपी कार्यालय के अनुसार यह तीस प्लॉट गैर लाइसेंसी क्षेत्र में कृषि भूमि पर काटे गए हैं। गैर लाइसेंसी इलाके में थे तो नगर निगम से सीएलयू भी नहीं होता। बावजूद इसके स्वाति नासवा ने प्लॉट में निर्माण के लिए 13 मई 2021 को ऑनलाइन फार्म ऑफ सेंक्शन अंडर सेल्फ सर्टिफिकेशन के तहत भरा था। पद्मभूषण के रसूख के कारण तीन दिन में ही इसकी स्वीकृति भी मिल गई। अपना मकान बचाने के लिए नासवा ने एक अन्य प्लॉट धारक से नगर निगम में उसका प्लॉट रेगुलराइज करने का आवेदन करवाया। एक प्लॉट रेगुलराइज नहीं किया जा सकता तो सभी प्लॉटों को कॉलोनी बना कर पेश करने और हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक अमेनिटीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट म्यूनिसिपल एरिया स्पेशल प्रोविजल एक्ट 2016 का फायदा पहुंचाने का खेल किया गया।
हालांकि इसमें बहुत बड़ा पेंच फंस गया। एक्ट के मानक और नियम के पैरा 4 (1ढ्ढ) में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जो अवैध कॉलोनी किसी सेपरेट पॉलिसी, रूल या बाईलॉ के तहत सरकारी जमीन या नोटिफाइड एरिया में बनाई गई है उस पर यह एक्ट लागू नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार यह चार एकड़ का टुकड़ा फरीदाबाद एक्स सैनिक एंड कर्मचारी को ऑपरेटिव बिल्डिंग समिति के ले आउट प्लान में शामिल था लेकिन इसे अप्रूवल नहीं मिला था। यानी यह तीस प्लॉट सेपरेट बाइलॉ के तहत बनाया गया है, इसलिए यह एक्ट लागू होना मुमकिन नहीं है। दूसरा पेंच यह फंस रहा है कि यह चार एकड़ कृषि भूमि है और तीसरा पेंच डीटीपी द्वारा इसे लाइसेंस नहीं दिया जाना है। निगम सूत्रों के अनुसार बावजूद इसके एक्सईएन पद्मभूषण नासवा, सीटीपी सतीश पाराशर और निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास इन प्लॉटों को अवैध कॉलोनी दर्शाकर सरकार से वैध कराना चाहते हैं। यदि इन तीस प्लॉटों को अवैध कॉलोनी मान भी लिया जाए तो इसे वैध कराने का अधिकार सदन का है, यानी पहले सदन प्रस्ताव पारित करेगा, और निगमायुक्त इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए सरकार को भेजेंगी। विशेष परिस्थितियों में निगमायुक्त भी प्रस्ताव सरकार को भेज सकती हैं।
प्रदेश में नगर निकायों के चुनाव की तैयारियां हो रही है, अगली फरवरी तक सदन का गठन भी हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार इन 30 प्लॉटों को अवैध कॉलोनी बता कर इसे रेगुलराइज कराने के लिए सरकार को जल्द सिफारिश भेजे जाने की तैयारी हो रही है, यानी निगमायुक्त सदन के गठन और उसमें प्रस्ताव पास होने का भी इंतजार नहीं करना चाह रहीं। उनकी जल्दबाजी की वजह अच्छी तरह से समझी जा सकती है। करोड़ों रुपयों की कॉलोनी मुफ्त में तो रेगुलराइज हो नहीं जाएगी। हालांकि, कुछ जागरूक नागरिकों ने इस खेल की शिकायत सीएम सैनी सहित शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय पंचकूला में की है, अब देखना ये है कि सरकार निष्पक्षता से काम करती है या भ्रष्ट अधिकारियों की राह ही पकड़ती है।