फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) वोट चोरी करके सत्ता हथियाने वाले भाजपाई आजकल का$फी परेशान नज़र आ रहे हैं। बीते 11 साल में तो कोई काम किया ही नहीं और अब भी करने को कुछ नज़र आ नहीं रहा। ऐसे में जनता को किसी न किसी तरह तो बहलाना-फुसलाना भी तो जरूरी है। इसी क्रम में केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर हथीन में जनता को मूर्ख बनाने जा पहुंचे। वहां उन्होंने 12 करोड़ की लागत के उन ‘बड़े-बड़े’ प्रोजेक्टों का शिलान्यास व उद्घाटन किया, जो कि स्थानीय पार्षद व विधायक आदि भी कर सकते थे। इन प्रोजेक्टों में नगर पालिका क्षेत्र में नाली बनाना, स्ट्रीट लाइट लगाना, पुस्तकालय खोलना, चौपालों की मरम्मत करना, तथा एक छोटी सी सड़क का निर्माण भी शामिल हैं।
बेशक गूजर समझें या न समझें एक केन्द्रीय मंत्री द्वारा इन ‘बड़े-बड़े’ प्रोजेक्टों के लिए उनका आना जनता के लिए कितना हास्यास्पद हो सकता है, यह किसी से छिपा नहीं है। हो सकता है कि इसी झेंप को उतारने के लिए उन्होंने वही मेट्रो राग अलापा जो वे बीते दस साल से अलाप रहे हैं। विदित है कि पूर्व सीएम खट्टर से लेकर तमाम भाजपाई नेता बल्लबगढ़ से पलवल तथा फरीदाबाद से गुडग़ांव मेट्रो रेल चलाने की घोषणा करते आ रहे हैं। कभी बताते हैं कि डीपीआर बन रही है तो कभी कहते हैं कि बन गई है। कभी कहते हैं कि सीएम ने मंजूरी दे दी है, फाइल मुख्य सचिव के दफ्तर पहुंच गई है, अब वहां से निकल गई है आदि-आदि।
इसके विपरीत ‘मज़दूर मोर्चा’ पहले दिन से ही लिखता आ रहा है कि मेट्रो न तो पलवल जानी है और न ही गुडग़ांव जानी है। हां, ‘मज़दूर मोर्चा’ ने यह भी लिख दिया था कि गुडग़ांव के लिए बदरपुर बॉर्डर से महरौली तक मेट्रो लाइन जरूर डाली जाएगी, जो अब लगभग पूरी होने को है। इसके द्वारा $फरीदाबाद से गुडग़ांव जाना काफी सरल हो जाएगा। सर्वविदित है कि मेट्रो कॉर्पोरेशन अभी तक एक विशुद्ध उपक्रम है। ये घाटे वाला कोई काम नहीं करता, जबकि राजनेता केवल वोट बैंक के लिए काम करते हैं। उससे सरकारी खजाने को चाहे कितना ही घाटा क्यों न हो जाए।
मेट्रो कॉर्पोरेशन को यह भली-भांति मालूम है कि 27 किलो मीटर की इस लाइन पर जो लागत आएगी उसके मुकाबले आमदनी इतनी कम होगी कि सारी उम्र भी लागत निकलने वाली नहंीं। दूसरी ओर मंत्री गूजर पर सवाल बनता है कि दिल्ली-पलवल के बीच जो रेलवे सेवाएं बीते पचासों वर्षों से चलती आ रही थी वे यकायक आधे से भी कम क्यों कर दी गई? अपनी रेल सेवा को सुधारने की बजाय वे आम जनता को मेट्रो का लालीपॉप क्यों दे रहे हैं? इसके अलावा गूजर क्यों नहीं बताते कि बल्लबगढ़-पलवल के बीच हाईवे पर गांव बघोला के पास जो अंडरपास दो साल से बन रहा है वह कब तक पूरा होगा? यदि एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण) की नीयत सही होती तो यह काम तीन-छ: महीने से अधिक का नहंी था। इसके निर्माणाधीन होने से बल्लबगढ़-पलवल का सफर तीन गुणा अधिक लम्बा हो गया है। यह मामला सीधे केन्द्र सरकार से जुड़ा है। केन्द्रीय मंत्री होने के नाते कृष्णपाल जो हथीन की नालियों का उद्घाटन करते फिर रहे हैं इस अंडरपास के काम को क्यों नहीं देख पा रहे?