नई दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) ईएसआई कॉर्पोरेशन ने अपने 72 वर्ष के समय में जहां केवल 10 मेडिकल कॉलेज स्थापित किए थे वहीं अब केन्द्रीय श्रममंत्री मनसुख मांडविया ने एक साथ 10 मेडिकल कॉलेज खोलने की न केवल घोषणा की है बल्कि अगले ही वर्ष उनमें एमबीबीएस छात्रों के दाखिले शुरू करने के भी आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं एमबीबीएस के साथ-साथ पीजी के दाखिले भी शुरू करने की बात कही है। गौरतलब है कि नए खोले जाने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना वहीं की जा रही है जहां इनकी आवश्यकता है, यानी कि जहां पर्याप्त संख्या में बीमाकृत मज़दूर कार्यरत हैं।
इसके विपरीत पहले अनेकों मेडिकल कॉलेज वहां खोले गए थे जहां बीमाकृत मज़दूर या तो थे ही नहीं अथवा बहुत कम थे। सबसे बड़ा उदाहरण हिमाचल प्रदेश के मंडी में खोला गया मेडिकल कॉलेज है जहां गिनती के चंद हजार बीमाकृत मज़दूर ही है। ऐसे में कॉर्पोरेशन इसे बनाने के बाद भी चला नहीं सकता था, लिहाज़ा मज़दूरों की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से बने इस मेडिकल कॉलेज को मुफ्त में हिमाचल सरकार को दान में दे दिया गया। इसी तरह राजस्थान में अलवर, कर्नाटक में गुलबर्गा तथा बिहार में बिहटा आदि खोले गए थे। शुक्र यह है कि इन तीनों स्थानों पर अब कुछ हद तक बीमाकृत मज़दूर उपलब्ध होने लगे हैं। सर्वविदित है कि ये मेडिकल कॉलेज मज़दूरों की आवश्यकता के अनुरूप न होकर राजनीतिक जरूरत पर खोले गए थे।
इतना ही नहीं पुराने 10 मेडिकल कॉलेजों में से एक मुंबई वाले मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह से बर्बाद करने में मुख्यालय में बैठे कामचोर एवं निकृष्ट अधिकारियों ने कोई कोर-कसर न छोड़ी। सन 2012 से दिल्ली के बसई दारापुर स्थित मेडिकल कॉलेज में, तमाम सुविधाएं होने के बावजूद एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं कराई गई, इसे केवल पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) के लिए ही रखा गया। इतना ही नही इस पढ़ाई के लिए भी यहां कभी संतोषजनक माहौल नहीं रहा। इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बतौर एमएस रहे डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. दीपिका गोविल तथा डॉ. कमलेश हरीश ने अपनी नालायकी के चलते इस अस्पताल को इतना बर्बाद किया कि यहां आक्युपेंसी 40 प्रतिशत से अधिक कभी बढ़ न पाई। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता होगा जब यहां से दर्जनों मरीज़ों को फरीदाबाद रेफर न किया जाता हो। इसके बावजूद भी इन तीनों को समय-समय पर पदोन्नत करके मेडिकल कमिश्नर (मेडिकल एजुकेशन) बना दिया गया ताकि कॉर्पोरेशन के अन्य मेडिकल कॉलेजों को भी बर्बाद कर सके । अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए इन तीनों ने ही मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए सबसे बड़ा हथियार तबादला नीति रहा है।
यद्यपि कॉर्पोरेशन द्वारा अभी कोई घोषणा तो नहीं की गई है, लेकिन मुख्यालय से छन-छन कर आने वाली खबरों से पता चल रहा है कि फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज अस्पताल की उत्कृष्ट सेवाओं विशेष कर सुपरस्पेशलिटी ट्रीटमेंट को देख कर न केवल कॉर्पोरेशन के डीजी बल्कि स्वयं मंत्री जी भी पूरी तरह से प्रभावित हैं। इसे देखते हुए संस्थान को एम्स दिल्ली के मुकाबले में लाने के लिए हर सम्भव प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए संस्थान की तमाम आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। इसमें विशेष ध्यान फैकल्टी को विकसित करने पर दिया जाएगा।
यहां फैकल्टी को ऐसी तमाम सुविधाएं प्रदान करने पर विचार हो रहा है जिन्हें पाने के लिए ये लोग इस्तीफा देकर अन्यत्र कहीं चले जाते हैं। विदित है कि मंत्री जी इससे पहले केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री भी रह चुके हैं। इसलिए उन्हें इस बात का पूरा ज्ञान है कि एम्स, सफदरजंग तथा ऐसे ही अन्य संस्थानों के मुकाबले में कॉर्पोरेशन अपनी फैकल्टी को क्या कुछ दे रहा है?मंत्रीजी के इरादे तो बहुत ही उत्साहवर्धक एवं संतोषजनक दिखाई पड़ रहे हैं। यदि ये सभी वास्तव में ही पूरे हो जाएं तो मज़दूरों को इससे काफी लाभ होना निश्चित है। अपने इन इरादों को यदि मंत्री जी वास्तव में ही मूर्त रूप देना चाहते हैं तो सर्वप्रथम कॉर्पोरेशन के मुख्यालय में बैठे मूर्ख एवं हरामखोर अधिकारियों को तुरन्त निकाल बाहर करें और उनके स्थान पर कर्मठ एवं ईमानदार अधिकारियों को तैनात करें।