मज़दूर मोर्चा ब्यूरो करीब एक वर्र्ष पूर्व केन्द्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने घोषणा की थी कि मोदीजी के आह्वान पर कॉर्पोरेशन 10 नए मेडिकल कॉलेज खोलेगा जिनमें 2025 से दाखिला शुरू हो जाएगा। इनमें एक बसई दारापुर का पीजी मेडिकल कॉलेज व ऐसा ही दूसरा अंधेरी मुंबई में स्थित है। यानी कि ये दोनों एक प्रकार से चले चलाए ऐसे मेडिकल कॉलेज हैं जहां एमबीबीएस की पढ़ाई तो नहीं लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई होती है। मुंबई में तो यह पढ़ाई भी कई वर्षों से बंद पड़ी है।
शुरू में मंत्री जी ने घोषणा की थी कि सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में 100-100 सीटें रखी जाएंगी। इस घोषणा के सुनते ही मुख्यालय में बैठे उन धूर्त एवं हरामखोर अफसरों पर तो मानो बिजली गिर गई, जो फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज को चलने से नहीं रोक पाए थे, अब उन्हें 10 और नए मेडिकल कॉलेज चलाने पड़ेंंगे। इन्होंने तुर्त-फुर्त रो-पीट कर मंत्री जी को इन कॉलेजों में 100 की बजाय 50 सीटों पर राजी कर लिया। केवल बसई दारापुर व मुंबई और इंदौर वाले कॉलेज के लिए ही 100 सीटें रखवाई गईं। इसके बावजूद भी इन निकम्मे अफसरों ने वे कोई काम नहीं किए जो मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए जरूरी होते हैं। इसके परिणामस्वरूप जब एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) निरीक्षण करने पहुंचा तो उसने पाया कि आने वाले छात्रों के लिए न तो कोई क्लास रूम हैं, न ही कोई लेबोरेट्री है और न ही कोई अन्य आवश्यक सुविधाएं हैं। और तो और छात्रों के रहने के लिए छात्रावास का भी कोई प्रबन्ध कॉर्पोरेशन उन्हें दिखा नहीं पाया।
दरअसल मंत्री जी ने 300 बेड वाले अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेज चलाने की एक अच्छी योजना प्रस्तुत की थी। इसके लिए जब तक नई आवश्यक बिल्डिंग का निर्माण न हो जाए तब तक काम चलाऊ तौर पर किराए पर, जरूरत के मुताबिक आवश्यक बिल्डिंग ले ली जाए। परन्तु जिन धूर्त एवं कामचोर लोगों के जिम्मे, यह काम सौंप कर मंत्री जी निश्चिंत हो गए थे, उन्होंने इस दिशा में तिनका तक नहीं तोड़ा। तिनका तोड़ते भी क्यों, इनकी प्रवृति ही नहीं कि इतने सारे मेडिकल कॉलेज खोल कर अपनी जान के लिए बखेड़ा खड़ा किया जाए। लिहाजा एनएमसी ने इन कॉलेजों को खबर लिखे जाने तक मान्यता नहीं दी। अब देखना यह है कि आगामी एक-दो माह में मंत्री जी कौन सा तीर चला कर ये मान्यता हासिल करके दाखिला प्रकिया शुरू करा सकेंगे।
जानकार बताते हैं कि मंत्री जी पूरी दृढ़ता के साथ इसी वर्ष इन कॉलेजों में दाखिला शुरू कराना चाहते थे। इसके लिए वे यदा-कदा अपने इन धूर्त अफसरों से प्रगति रिपोर्ट लेने के बाद इन्हें अच्छा-खासा लताड़ते भी थे। लेकिन ये लोग धूर्त होने के साथ-साथ पक्के बेशर्म साबित हुए। इन्हें आए दिन मंत्री की झाड़ खाना मंजूर था लेकिन काम नहीं करने की जिद पर अड़े रहे। आठ नए मेडिकल कॉलेजों की बात तो छोडि़ए दो पुराने पीजी मेडिकल कॉलेजों में भी ये लोग मान्यता प्राप्त करने लायक सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाए। मंत्री महोदय बेशक इनकी धूर्तता एवं हरामखोरी से अनभिज्ञ रहे हों लेकिन ‘मज़दूर मोर्चा’ इनकी हरामखोरी से पूर्णतया परिचित होने के नाते सदैव ये लिखता आ रहा है कि यदि मंत्री जी कुछ भी रचनात्मक करना चाहते हैं तो सबसे पहले इन धूर्त व निकम्मे अफसरों से मुख्यालय को मुक्त कराएं लेकिन मंत्री जी की समझ में यह बात आई नहीं जिसके परिणामस्वरूप आज उक्त 10 मेडिकल कॉलेजों में से एक भी चलने की स्थिति में नहीं है।
मुख्यालय के अधिकारी बेशक कितने ही निकम्मे हों लेकिन अपनी जान छुड़ाने के लिए मंत्री जी को भटकाने में पूरी तरह कुशल एवं शातिर हैं। अपनी नालायकी की ओर से उनका ध्यान भटका कर फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज की ओर करने में वे सफल हो गए हैं। उक्त दस मेडिकल कॉलेजों के अलावा मंत्रीजी ने 2026 के लिए दस और मेडिकल कॉलेजों को चालू करने की घोषणा कर रखी है। उन नए मेडिकल कॉलेजों के लिए सितंबर महीने में विभिन्न सरकारों व एनएमसी को आवेदन लगाने की प्रक्रियाएं शुरू हो जानी चाहिए। लेकिन जिस बेरुखी एवं काहिली से मुख्यालय के इन हरामखोरों ने काम किया है अगर वही कायम रहा तो अगले मेडिकल कॉलेजों का भी यही हश्र होना तय है। अब यह सोचना मंत्री जी का काम है कि खाली घोषणाएं करके इन हरामखोरों से माथापच्ची करने में ही व्यस्त रहना है या कुछ रचनात्मक भी करना है।