नई दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) उपलब्ध जानकारी के अनुसार ईएसआई कॉर्पोरेशन आगामी एक साल में दस नए मेडिकल कॉलेज खोलने पर विचार कर रहा है। दरअसल यहां पर विचार कॉर्पोरेशन की बजाय केन्द्रीय श्रम मंत्री का चलता है। कॉर्पोरेशन द्वारा मज़दूरों से वसूले गए करीब एक लाख अस्सी हजार करोड़ को अपने खज़ाने में पड़ा देख कर केन्द्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने एक लाख करोड़ खर्च करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसी रोडमैप के तहत देश भर में दस मेडिकल कॉलेज बनाने के साथ-साथ कुछ नए अस्पताल व डिस्पेंसरियां आदि बनाने का इरादा बताया जाता है।
मंत्री जी की योजना तो अच्छी लगती है परन्तु देखने वाली बात यह है कि इस पर अमल किस ढंग से होता है। सबसे पहली बात तो यह है कि मौजूदा 10 और नए 10 मिलाकर 20 मेडिकल कॉलेजों का प्रबन्धन करने वाले कौन होंगे? मौजूदा 10 मेडिकल कॉलेजों का प्रबन्धन, मुख्यालय में बैठे जिन अधिकारियों को सौंप रखा है वे न तो इसके लायक हैं और न ही उनकी कोई इच्छाशक्ति है।
इसलिए बेहतर होगा कि नए मेडिकल कॉलेज बनाने से पहले इनके प्रबन्धन के लिये उचित एवं योग्य अधिकारियों का चयन कर लिया जाए। विदित है कि फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज को, पहले बनने से और फिर चलने से रोकने का भरपूर प्रयास मुख्यालय में बैठे इन अयोग्य अधिकारियों ने किया था। अब भी इसके चलने में अड़ंगेबाज़ी लगाने से बाज नहीं आ रहे। बसई दारापुर के मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा और मुंबई के मेडिकल कॉलेज का तो पूरी तरह से बंटाधार इन्हीं नालायक अधिकारियों का कारनामा हैं।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि नए मेडिकल कॉलेज कहां स्थापित किए जाएंगे? नियमानुसार ये वहीं खोलेे जा सकते हैं जहां पर्याप्त संख्या में बीमाकृत मज़दूर हों। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश के मंडी में जो मेडिकल कॉलेज खोला था, वहां बीमाकृत मज़दूर हैं ही नहीं। इसलिए बना-बनाया मेडिकल कॉलेज हिमाचल सरकार को दान में दे दिया गया। यह मज़दूरों के हकों पर कुठाराघात है। इसी तर्ज पर राजस्थान में अलवर, कर्नाटक में गुलबर्गा तथा बिहार में बिहटा के स्थान पर जो मेडिकल कॉलेज खोले गए थे वहां आज भी पर्याप्त बीमाकृत मज़दूर नहीं हैं। इसलिए यह जरूरी है कि केन्द्रीय श्रममंत्री इनके स्थान चयन करते वक्त इस बात का विषेष ध्यान रखें। दूर जाने की जरूरत नहीं दिल्ली के ही निकट गुडग़ाव क्षेत्र में 2000 बिस्तरों वाले अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज की सख्त जरूरत है। इस क्षेत्र में आज 15 लाख से अधिक बीमाकृत मज़दूर मौजूद हैं और आगामी कुछ वर्षों में यह संख्या 20 लाख के पार होने वाली है। इन हालात में यहां साढ़े सात एकड़ के प्लॉट पर 500 बिस्तरों वाले अस्पताल का खोला जाना ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इस अस्पताल का शिलान्यास करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन केन्द्रीय श्रम मंत्री भूपेन्द्र यादव, हरियाणा के श्रममंत्री दुष्यंत चौटाला व तत्कालीन सीएम खट्टर ने किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस अस्पताल के निर्माण हेतु वर्क ऑर्डर, कॉर्पोरेशन द्वारा जारी कर दिया गया है। कुल मिलाकर यह एक व्यर्थ की कवायद सिद्ध होने वाली है।
सर्वविदित है कि ईएसआई कॉर्पोरेशन एक स्वायत्त निकाय है। इसे मज़दूरों, मालिकों व सरकारी नुमाइंदों के द्वारा चलाया जाता है। परन्तु मज़दूर नुमाइंदों के पूरी तरह निष्क्रिय हो जाने के चलते सारा कामकाज केन्द्रीय श्रममंत्री तथा उनके अफसरशाहों ने काबू कर रखा है। इसलिए अब सारा दारोमदार मंत्री जी व उनके अ$फसरों पर रह गया है कि वे मज़दूरों के इस धन को बर्बाद करेंगे या उनके भले में इस्तेमाल।