धनेश अदलखा : मंत्री का हाथ है तो सरकारी जमीन हमारी है

धनेश अदलखा : मंत्री का हाथ है तो सरकारी जमीन हमारी है
August 20 05:41 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) केंद्रीयमंत्री कृष्णपाल गूजर का वरद्हस्त होने के कारण हरियाणा फार्मेसी काउंसिल का डकैत चेयरमैन धनेश अदलखा सरकारी जमीन हमारी है नारे की तर्ज पर करोड़ों रुपये कीमत की भूमि पर कब्जा कर रहा है। हार्डवेयर के पास चौक काली माता मंदिर वाली गली में धनेश अदलखा सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से भवन बनवा रहा है। यहां अक्सर अतिक्रमण और अवैध कब्जा विरोधी अभियान चलाने वाले नगर निगम के अधिकारी भी मंत्री-अदलखा की हनक के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। तोडफ़ोड़ शाखा के एसडीओ सुमेर सिंह तो इतने डरे हुए हैं कि कहते हैं कि कौन कहां अवैध कब्जा कर रहा है उन्हें नहीं पता। संभवत: वो रिटायर होने से पहले किसी विवाद में उलझने से बच रहे हैं।

हार्डवेयर चौक के पास स्थित काली माता मंदिर वाली गली में करीब डेढ़ सौ मीटर आगे चलने पर लंबे चौड़े क्षेत्र में सरकारी जमीन खाली पड़ी हुई है। नगर निगम ने बीते वर्ष यहां तोडफ़ोड़ अभियान चलाकर अवैध कब्जे हटाए थे। अभियान के बाद से यहां इक्का दुक्का लोग झुग्गी, तिरपाल जैसे अस्थायी तरीकों से जमीन का घेराव कर रहे थे।
नगर निगम में दो बार पार्षद रहे धनेश अदलखा की कुदृष्टि भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही इस जमीन पर है। इस पर कब्जा करने के लिए उसने गरीब-मज़दूरों को बसवाया और उन्हें अस्थायी निर्माण करने को उकसाया लेकिन कभी पार्षद की शिकायत पर तो कभी विपक्षियों द्वारा हंगामा किए जाने के कारण नगर निगम तोडफ़ोड़ करा अवैध कब्जे हटवा देता था। हरियाणा फार्मेसी काउंसिल चेयरमैन पद से तीन महीने की छुट्टी लेकर आए धनेश अदलखा ने केंद्रीय मंत्री गूजर की अनुमति पर इस सरकारी जमीन पर करीब ढाई सौ गज का प्लॉट कब्जा लिया और उसमें तेजी से निर्माण करवा रहा है।

सरकारी जमीन होने के कारण निर्माणाधीन भवन का न तो कोई नक्शा है न सबडिविजन और न ही एनओसी। तेजी से निर्माण पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में मज़दूर- राजमिस्त्री लगाकर दिन-रात काम किया जा रहा है। इसके लिए दिन रात सरिया, सीमेंट, बजरी, गिट्टी, यमुना रेत की ट्रॉलियां आ रही हैं, जमीन की भराई के लिए मिट्टी भी लाई जा जारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नगर निगम या प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की तो दो सप्ताह में यह भवन पूरी तरह बना कर तैयार कर दिया जाएगा।

धनेश अदलखा के अवैध निर्माण की देखादेखी अन्य लोगों ने भी इस सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण शुरू करवाना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कुछ नहीं किया गया तो एनआईटी एक की यह बेशकीमती सरकारी जमीन अवैध कब्जों से पट जाएगी। धनेश द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कराए जाने की जानकारी निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास से लेकर एसडीओ सुमेर सिंह तक सबको है लेकिन कार्रवाई करने की हिम्मत जब निगमायुक्त नहीं जुटा पा रहीं हैं तो सुमेर सिंह किस खेत की मूली हैं। अवैध निर्माण सूंघ कर पहुंचने वाले सुमेर सिंह हार्डवेयर चौक पर अवैध निर्माण होना बताए जाने पर भी पल्ला झाड़ कर किनारे हो गए। मोना निगमायुक्त से अधिक मंत्री-विधायकों के रबर स्टांप की तरह काम कर रही हैं। यदि वे निगमायुक्त की तरह काम करतीं तो किसी धनेश की हिम्मत नहीं होती कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण तो दूर कब्जा कर पाता।

धनेश सरकारी जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत इसलिए कर सका कि उसे केंद्रीय मंत्री गूजनर के साथ ही खट्टर से भी लूट कमाई का अभयदान मिला हुुआ है। नगर निगम के फाइनेंस कमेटी का सदस्य होने के दौरान धनेश ने लूट कमाई के जो जौहर दिखाए उससे प्रसन्न होकर खट्टर ने उसे हरियाणा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का चेयरमैन बना दिया था। लेकिन अदलखा यहां कुछ खास नहीं कर सका। इस पर खट्टर ने उसे हरियाणा फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन बनाया, जहां उसने रजिस्ट्रार से लेकर अन्य पदाधिकारियों को दरकिनार कर एकछत्र राज्य चलाया और फार्मेसी छात्रों से लेकर लाइसेंस जारी करने, रिन्यूअल में करोड़ों रुपये पीटे।

यहां तक कि रिश्वत लेने के लिए उस पर एफआईआर भी हो गई, लेकिन खट्टर ने अपने चहेते अदलखा को जांच की आंच से बचा लिया। अदलखा की रिश्वतखोरी, हरामखोरी से प्रसन्न खट्टर ने उसे हरियाणा स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एचएसबीटीई) की परीक्षा कमेटी का सदस्य बना कर अपनी भ्रष्ट प्रतिभा का खुल का प्रदर्शन करने का मौका भी दिया है। भाजपा शासित अन्य प्रदेशों में जिस तरह प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, योग्य अभ्यर्थियों की प्रतिभा की हत्या कर मोटी रकम देने वाले अयोग्य अभ्यर्थियों का डॉक्टर-इंजीनियर सीटों पर सेलेक्शन कराया जा रहा है, धनेश जैसे ‘होनहारÓ के कारण हरियाणा में भी यह संभव हो सकेगा।

हालांकि खट्टर के उत्तराधिकारी नायब सिंह सैनी की नजर में धनेश की क्षमता सहकारी बैंक, काउंसिल-बोर्ड में छोटे मोटे कारनामे अंजाम देने से कहीं अधिक है, इसीलिए उन्हें विधानसभा चुनाव की तैयारियां कराई जा रही हैं।

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Mazdoor Morcha
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