मज़दूर मोर्चा ब्यूरो डीजीपी ओपी सिंह ने हाल ही में बयान दिया था कि हरियाणा में बदसुलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों को घर भेज देंगे यानी बर्खास्त कर देंगे। उनके दावे को मीडिया ने खूब बढ़ चढ़ कर दिखाया लेकिन सच्चाई ये है कि डीजीपी महोदय के आदेशों का पालन उनके ही मातहत आईपीएस अधिकारी नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि सब इंस्पेक्टर जैसे छोटे पुलिसकर्मी भी उनके आदेशों को उनके ही दफ्तर से रुकवा ले रहे हैं।
आईपीएस पूरन कुमार द्वारा आत्महत्या किए जाने का बिहार चुनाव में नुकसान न हो इसलिए नायब सैनी सरकार ने आनन फानन शत्रुजीत कपूर जैसे तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी को छुट्टी भेज कर ओपी सिंह को कार्यवाहक डीजीपी बना दिया था। बिल्ली के भागों छींका टूटने की तर्ज पर डीजीपी पद मिलते ही ओपी सिंह अचानक हवा में उडऩे लगे। उन्हें डीजीपी का पद तो मिल गया लेकिन सोच मातहतों वाली ही रही। कुर्सी संभालते ही उन्होंने 14 अक्तूबर को सबसे पहले फरीदाबाद में तैनात इंस्पेक्टर रणधीर सिंह और सब इंस्पेक्टर उ मेद सिंह, राम अवतार, हर्ष वर्धन, विक्रम सिंह और संदीप के तबादले का आदेश जारी कर दिया था। इन सब पुलिसकर्मियों को फरीदाबाद से दूर फतेहाबाद, करनाल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल और जींद भेजने का फरमान सुनाया था। कार्यवाहक डीजीपी का आदेश पुलिस आयुक्त सतेंद्र गुप्ता ने भी मानो डस्टबिन में डाल दिया और किसी भी पुलिसकर्मी के रिलीविंग आर्डर जारी नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार रिलीव नहीं होने का अभयदान मिलते ही सारे पुलिसकर्मी डीजीपी के आदेश को बेकार साबित करने के लिए पैंतरेबाजी में जुट गए। बताया जाता है कि सब इंस्पेक्टर रामअवतार तो अपने तबादले का आदेश रद्द करवाने में सफल हो गया, बाकी सारे पुलिसकर्मियों ने पुलिस हेडक्वार्टर में जुगाड़ लगाकर तबादला आदेश ही निलंबित करा दिया। बताया जा रहा है कि डीजीपी ओपी सिंह के आदेश को भोथरा कर ये सभी पुलिसकर्मी फरीदाबाद में आराम से काम कर रहे हैं। ओपी सिंह का बयान कि बदसुलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों को घर भेज देंगे कम से कम फरीदाबाद के पुलिस वालों में हंसी ठिठोली का सबब बना हुआ है।
जानकार कहते हैं कि ओपी सिंह डीजीपी बन कर कभी पुलिसकर्मियों के नाम पत्र जारी करने, कभी सोशल मीडिया पर सनसनीखेज बयान जारी करने, कभी किसी अभियान की घोषणा आदि कवायदें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके पद के साथ कार्यवाहक शब्द जुड़ा है। दलित आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार ने जिस समय आत्महत्या की उस समय बिहार चुनाव होने वाले थे, दलित अधिकारी द्वारा आत्महत्या से बिहार चुनाव में नुकसान न हो इसके मद्देनजर सरकार ने तेजतर्रार आईपीएस शत्रुजीत कपूर को हटा कर ओपी सिंह को कार्यवाहक बनाया था। सूत्रों के अनुसार बिहार चुनाव समाप्त होने के बाद सरकार फिर से शत्रुजीत कपूर को पद सौंप सकती थी। ओपी सिंह इसी दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने तीन माह का सेवा विस्तार मांगा था लेकिन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। ऐसे में उनकी इच्छा कार्यवाहक ही सही डीजीपी के पद से विदाई लेने की है। विभाग में चर्चा है कि यही कारण है कि ओपी सिंह आए दिन कोई न कोई नया फरमान जारी कर खुद को बेहतरीन डीजीपी साबित करने के साथ अपनी कुर्सी बचाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि काम नहीं काम करने का नाटक करने वाली नायब सैनी सरकार भी ओपी सिंह की कार्यशैली की वजह से अब उन्हें सेवानिवृत्त होने तक कार्यवाहक रहने देना चाहती है।
ओपी सिंह के मातहतों को भी मालूम है कि बुझता चिराग ज्यादा तेज जलता है तो उनके आदेशों का सम्मान देने में जुटे हैं भले ही जमीन पर काम हो या न हो, इसका श्रेष्ठ उदाहरण अनुशासन और आला अधिकारी के आदेश का पालन करने वाले पुलिस महकमे में जिले से पांच सब इंस्पेक्टर और एक इंस्पेक्टर को तबादले के बावजूद रिलीव नहीं किया जाना है।