डीएसपी राणा ने टुच्चे राजनेता से माफी मांग कर पुलिस की ही नहीं कानून की भी नाक कटवा दी

डीएसपी राणा ने टुच्चे राजनेता से माफी मांग कर पुलिस की ही नहीं कानून की भी नाक कटवा दी
May 06 03:03 2025

सिरसा (मज़दूर मोर्चा) मनीष सिंगला न तो कोई विधायक है न कोई मंत्री, मुख्यमंत्री के दबाव में उसके घर जाकर डीएसपी जीतेंद्र राणा ने माफी मांग कर पूरे पुलिस महकमे की तो नाक कटाई ही है साथ में कानून के शासन की भी इज्जत मिट्टी में मिला दी। इस तरह की बेइज्जती कराने से बेहतर तो नौकरी छोड़ देना होता। सर्वविदित है कि राणा को मिली ये नौकरी न तो मुख्यमंत्री सैनी ने दी है और न मनीष सिंगला ने दी है और न ही वह उनका नौकर है। वह संविधान द्वारा तय नियमों के अनुसार इस नौकरी पर तैनात है। राजनेताओं के नाराज होने पर उसका तबादला अथवा अधिक से अधिक निलंबन, वह भी कुछ समय के लिए किया जा सकता था।

हुआ यह कि अपनी आदत के मुताबिक ड्रामेबाजी करने के लिए गवर्नर और मुख्यमंत्री सिरसा में साइकिल बाजी करके लोगों को नशामुक्ति का संदेश देने की नौटंकी कर रहे थे। इस तरह की नौटंकी के लिए सिरसा जिले की पुलिस जिसमें छह डीएसपी हैं कम पड़ रही थी, ऐसे में डीएसपी जीतेंद्र राणा को जींद से इस विशेष ड्यूटी के लिए बुलाया गया था।

इस तरह के ड्रामों में प्रोटोकॉल के अनुसार ही लोगों को सीएम एवं गवर्नर के नजदीक पहुंचने दिया जाता है। इसके लिए बाकायदा एक लिस्ट जारी की जाती है कि कौन कौन से व्यक्ति मंच पर इन नेताओं के पास पहुंच सकते हैं। चापलूसी के अवसर ढूंढने वाले अनेकों लोग भी इस प्रोटोकॉल को तोड़कर इन नेताओं के पास पहुंचने का प्रयास करते हैं। यदि पुलिस इनको खुली छूट दे दे तो पुलिस की मुसीबत! और उनको रोके तो डीएसपी राणा जैसों की मुसीबत । उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्व राज्यपाल गणेशी लाल के पुत्तर मनीष सिंगला का नाम प्रोटोकॉल लिस्ट में नहीं था और जींद से आए राणा उसको पहचानते भी नहीं थे, लिहाजा उन्होंने उसको ट्रैक के पास जाने से रोक कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया था। बस इतने भर से मनीष सिंगला की तो बड़ी भारी बेइज्जती हो गई।

मामला गवर्नर तक पहुंचा। मनीष की मांग थी कि उसकी बेइज्जती का बदला लेने के लिए डीएसपी को निलंबित किया जाए। सीएम ने समझा बुझा कर मामले को माफीनामे तक मनीष को राजी कर लिया और डीएसपी मनीष के घर माफी मांगने चला गया। अपने टुच्चेपन की तमाम सीमाओं को पार करते हुए मनीष ने माफी मांगते हुए डीएसपी की बाकायदा वीडियो बनाई और वायरल कर दी। शायद उसको यह वहम रहा होगा कि इस तरह की वीडियो से उसकी इज्जत और शान में इजाफा हो जाएगा। लेकिन हुआ सब कुछ इसके विपरीत, पूरे इलाके में भाजपा की तो थू- थू हो ही रही है और पुलिस महकमे में भी भारी आक्रोश है। सामाजिक तौर पर जाट इसे अपने जातीय अपमान के तौर पर ले रहे हैं।

चलो, डीएसपी ने जो किया सो किया, सवाल उन उच्चाधिकारियों, जिले के एसपी तथा रेंज के आईजी/एडीजीपी केके राव पर भी खड़ा होता है कि वे क्यों नहीं अपने डीएसपी के समर्थन में खड़े हुए? उन्होंने क्यों नहीं उसका बचाव करते हुए उसे निर्दाेष साबित किया ? ऐसे मौके पर एसपी मयंक गुप्ता की विशेष जिम्मेवारी भी बनती थी जिसने बाहर से आए अधिकारी को यह काम सौंपा ही क्यों था? क्यों नहीं अपने जिले के किसी अधिकारी को वहां तैनात किया जो इन टुच्चे-पुच्चे नेताओं को पहचान सकता।

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Mazdoor Morcha
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