डीआईपीआरओ से आरटीआई द्वारा सूचना मांगी तो लेखापाल ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करा दिया

डीआईपीआरओ से आरटीआई द्वारा सूचना मांगी तो लेखापाल ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करा दिया
February 03 16:29 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जिला सूचना एवं जन संपर्क कार्यालयों (डीआईपीआरओ) में पत्रकारों के चाय-बिस्कुट, सरकारी कार्यक्रमों की मद में आई रकम की बंदरबांट से लेकर चतुर्थ श्रेणी और एचकेआरएन कर्मचारियों का जमकर शोषण किया जा रहा है ! ऐसी शिकायतें सामने आने पर समाजसेवी एसएस राठौर ने सभी 22 जिलों के डीआईपीआर कार्यालयों में आरटीआई डाल कर जवाब मांगा। जवाब देने पर पोल खुल जाने और भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से घबराए फरीदाबाद के जिला सूचना अधिकारी दिनेश कुमार और लेखापाल हिना विरमानी सूचना देने के बजाय उन्हें प्रताडि़त करने लगे। यहां तक कि हिना विरमानी ने दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस, राज्य महिला आयोग में भी झूठी शिकायतें देकर गिरफ्तार करवा दिया, लेकिन मांगी गई सूचना नहीं दी। न्यायालय से जमानत मिलने के बाद एसएस राठौर ने भी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है।

सोशल मीडिया एटीएन न्यूज चैनल के संचालक एसएस राठौर के मुताबिक उन्हें शिकायतें मिल रहीं थीं कि हिसार, फरीदाबाद सहित अन्य जिलों कें डीआईपीआरओ कार्यालय में एचकेआरएन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का वेतन जानबूझ कर लटकाया जाता है, पांच से दस प्रतिशत तक नजराना दिए जाने के बाद ही इन लोगों की अटेंडेंस शीट आगे बढ़ाई जाती है। लेखापाल आदि अधिकारी खुद तो समय पर नहीं आते लेकिन अगर छोटे कर्मचारी थोड़ा सा भी लेट हो जाएं तो उनकी अनुपस्थिति लगा देते हैं। पत्रकारों के जलपान की मद में मोटे मोटे बिल बनाकर खूब लूट की जा रही है। यही नहीं गीता जयंती जैसे कार्यक्रमों में भी मोटा खर्च दिखा कर सरकारी धन की खूब बंदरबांट होती है।

इस पर उन्होंने स्थानीय डीआईपीआरओ कार्यालयों में आरटीआई लगाई। इसमें उन्होंने पूछा कि बीते पांच साल में सरकार की ओर से विभाग को किस किस मद में कितना-कितना बजट दिया गया, और विभाग ने किस-किस मद में कितना धन खर्च किया, इसका ब्यौरा। दफ्तर के हाजिरी रजिस्टर की सत्यापित प्रतिलिपि और देर से आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा। विभाग में किस-किस अधिकारी को सरकारी वाहन सुविधा हासिल है, इन वाहनों की लॉग बुक, यात्रा और ईंधन विवरण। गीता जयंती महोत्सव आदि कार्यक्रम में सरकार द्वारा कितना फंड जारी किया गया और कितना खर्च हुआ, विवरण सहित विभाग से जुड़ी अन्य जानकारियां मांगीं। शक गहराने पर उन्होंने 14 अक्तूबर 2024 को सभी जिलों के डीआईपीआरओ कार्यालय में भी यही आरटीआई लगाई।

जवाब तो मिला नहीं लेकिन 12 नवंबर 2024 को उन्हें पत्र मिला की आपने आरटीआई में पहचान पत्र नहीं लगाया है, जबकि उन्होंने आधार की प्रति लगाई थी। इस पर उन्होंने डीआईपीआरओ दिनेश कुमार को फोन किया तो उन्होंने छुट्टी पर होने और लेखापाल हिना विरमानी का फोन नंबर देकर उनसे जानकारी लेने को कहा। हिना विरमानी ने भी पहचान पत्र मांगा, राठौर ने उनके वाट्सएप पर भेज दिया और कार्यालय की मेल पर भी ईमेल कर दिया।

इसकी सूचना हिना को दी तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि पत्र का जवाब पत्र से दो, कार्यालय में आओ। दूसरे दिन वह पहचान पत्र लेकर कार्यालय पहुंचे, साथ में एक कवरिंग पत्र भी लगाया कि हालांकि मूल दस्तावेज में पहचान पत्र लगा है लेकिन मांगे जाने पर दोबारा दे रहा हूं। डीआईपीआरओ और हिना विरमानी दोनों ने इस पत्र की रिसीविंग देने से इनकार कर दिया और अभद्रता पर उतर आईं, राठौर ने उनकी अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर दिया। इससे नाराज होकर हिना विरमानी ने राठौर को सबक सिखाने की ठान ली।

सबसे पहले सेक्टर तीन पुलिस चौकी में उन्हें ब्लैक मेल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी। मामले की जांच चौकी प्रभारी स्वीटी ने की और 27 नवंबर को मामला बेबुनियाद होना दर्ज कर केस खत्म कर दिया। निर्दाेष साबित होने पर राठौर ने एसीपी बल्लभगढ़ कार्यालय में हिना विरमानी के खिलाफ उन्हें जानबूझ कर प्रताडि़त करने का शिकायती पत्र दिया जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एसएस राठौर का आरोप है कि हिना ने अपने पद और रसूख का इस्तेमाल कर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष से उन पर अवैध रूप से दबाव बनवाया। महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने 4 जनवरी 2025 को उन्हें फोन कर 6 छह जनवरी को उनकी पलवल में होने वाली जन सुनवाई में आने को कहा, उन्होंने शिकायतकर्ता और शिकायत की जानकारी मांगी लेकिन रेनू भाटिया ने नहीं दी। देतीं भी कैसे तब तक उनके पास हिना ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी। रेनू भाटिया ने 12 जनवरी को उन्हें फिर फोन किया और 13 जनवरी को सेक्टर 12 में होने वाली जन सुनवाई में शामिल होने को कहा, इसके लिए हिना विरमानी द्वारा 9 जनवरी को दी गई शिकायत का हवाला दिया गया। इसके बाद उन्हें आयोग की ओर से एक पत्र मिला जिसमें पेश होने की तिथि तीन जनवरी और सुनवाई के दो स्थान लिखे थे, पत्र का आशय अस्पष्ट होने के कारण वह नहीं गए।

बात नहीं बनती देख हिना ने 17 जनवरी को सेेंट्रल थाने में एसएस राठौर के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। खास बात यह है कि शिकायती पत्र में कहीं भी हिना ने एसएस राठौर पर शारीरिक शोषण या छेडख़ानी करने का आरोप नहीं लगाया, यानी शिकायत के आधार पर जो धाराएं लगतीं उनमें गिरफ़्तारी नहीं हो सकती थी। आरोप नहीं होने के बावजूद सेंट्रल पुलिस ने दुष्कर्म यानी बीएनएस की धारा 65 जोड़ दी, यह धारा 16 साल से कम उम्र की महिला से दुष्कर्म करने वाले पर लगती है, जबकि लेखापाल विवाहित हैं और उनकी उम्र कम से कम चालीस साल है। नोटिस पर सेंट्रल थाने पहुंचे एसएस राठौर को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया और अदालत में पेश किया, जहां न्यायालय ने उन्हें तुरंत जमानत दे दी।

एसएस राठौर ने हिना विरमानी के खिलाफ न्यायालय में मानहानि का केस दायर किया है, साथ ही सीएम सैनी को पत्र लिख कर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया की शिकायत कर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि आरटीआई से जानकारी नहीं दिया जाना बता रहा है कि जिला सूचना एवं जन संपर्क कार्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त है, चतुर्थ श्रेणी और एचकेआरएन कर्मचारियों का आर्थिक मानसिक शोषण किया जा रहा है।

संदर्भवश एसएस राठौर ने यह भी बताया कि हिना विरमानी झूठे मुकदमे दर्ज करा लोगों केा परेशान करने की आदी हैं। उन्होंने 2020 में भी एक विवाहित युवक को बलात्कार के आरोप में जेल भिजवाया था जिसका केस अदालत में विचाराधीन है। पीडि़त युवक ने राठौर से मिलकर आपबीती सुनाई। उसके अनुसार दोनों में आपसी सहमति थी, यहां तक कि मैडम उसे अपने खर्च पर दुबई घुमाने भी ले गई थीं। संबंध खराब हुए तो मैडम ने बलात्कार का केस दर्ज करा दिया, जांच में सब स्पष्ट हो चुका है। पलवल में एक टेंट हाउस संचालक ने हिना विरमानी पर टेंट का बिल पास करने के एवज में मोटी रिश्वत मांगने की शिकायत तत्कालीन एसडीएम वैशाली से की थी। इतना ही नहीं मैडम ने सेक्टर तीन हाउसिंग बोर्ड के पार्क की चार फीट जमीन पर कब्जा कर अपने मकान 2319 में मिला लिया है। इस अवैध निर्माण को गिरवाने के लिए डीसी और नगर निगम में शिकायत की गई है।

गोदी सोशल मीडिया को भुगतान में घोटाले की बू
आरटीआई में जानकारी नहीं दिए जाने से समझा जा सकता है कि डीआईपीआरओ कार्यालय में भ्रष्टाचार केवल महोत्सव, पत्रकारों के अल्पाहार, वाहन-यात्रा भत्ते के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट करने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया न्यूज चैनलों को विज्ञापन देने में भी लूट कमाई हो सकती है। एसएस राठौर का आरोप है कि सोशल मीडिया चैनलों को विज्ञापन के नाम पर सरकारी धन लुटाया जा रहा है। उन्होंने आरटीआई में पूछा सोशल मीडिया चैनलों को विज्ञापन देने की सरकार की क्या नीति है? इस नीति के मानकों के तहत शहर के कितने सोशल मीडिया चैनलों को पैनल पर लिया गया। जिन चैनलों को नहीं लिया गया उन्होंनें कौन से मानक पूरे नहीं किए थे। पैनल पर लिए गए सोशल मीडिया चैनलों द्वारा प्रति माह लगाए जाने वाले बिलों की प्रति, उनको किए गए भुगतान की जानकारी और बिलों पर की गई कटौती की जानकारी मांगी। जानकारों के अनुसार केवल उन्हीं सोशल मीडिया चैनलों को पैनल पर लिया गया जो सरकार के गुणगान करते हैं या गोदी न्यूज चैनल हैं। इसके विपरीत मानक पूरे करने के बावजूद उन सोशल मीडिया- न्यूज चैनलों को पैनल पर नहीं लिया गया जो सरकार की कमियां और भ्रष्टाचार उजागर करते हैं। आरटीआई में जवाब आने पर बहुत सी सच्चाइयां सामने आएंगी।
वैसे भी प्रधानमंत्री मोदी को सोशल मीडिया इंन्फ्लुएंसर से प्यार जबकि सरकार की सच्चाई बताने वाले यूट्यूबर या सोशल मीडिया पत्रकारों से बैर है। सोशल मीडिया में भी गोदी और दलाल पत्रकार पैदा किए जा रहे हैं। खुद को शहर का प्रथम न्यूज चैनल बताने वाले कुछ पत्रकार विधायक-मंत्री की पत्तलकारी कर खुलेआम लूट कमाई और वसूली में लगे हुए हैं। चर्चा है कि पत्रकारिता की आड़ में ये लोग पुलिस से मिलीभगत कर जुआ अड्डों, हुक्का बार आदि से वसूली करते हैं। वहीं नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों से दोस्ती कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे करने में लगे हैं, अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होने का ठेका भी लेते हैं। कुछ तो खम ठोंक कर अपनी रिश्वत का रेट कम से कम एक लाख रुपये बताते हैं।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles