मज़दूर मोर्चा ब्यूरो रेवाड़ी नगर परिषद में गंभीर अनियमितताओं के आरोप में मुख्यालय पंचकूला बुलाए गए ईओ सुशील कुमार भुक्कल अपने बचाव के लिए सारे दांव पेंच इस्तेमाल कर रहे हैं। चर्चा है कि जांच कमेटी को कुछ न मिल सके इसलिए ईओ महोदय महत्वपूर्ण सबूत ही अपने साथ उठा ले गए हैं। माना जा सकता है कि ईओ महोदय अपने कब्जे में रखे इलेक्ट्रॉनिक और कागजी दस्तावेजों को नष्ट कर सकते हैं या उनके साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। हालांकि सरकारी दस्तावेज अपने साथ ले जाना भी जुर्म की श्रेणी में आता है।
नगर परिषद कार्यालय में चर्चा है कि ईओ सुशील कुमार भुक्कल रिलीव होकर जाते समय अपने साथ एक डेस्कटॉप और एनओसी जारी करने वाला रजिस्टर भी उठा ले गए हैं। यह डेस्कटॉप उन्होंने अपने आवास पर ही रख रखा था और वहीं से सरकारी फाइलें आदि निपटाते थे। बताया जा रहा है कि इस डेस्कटॉप में नगर परिषद के बहुत से महत्वपूर्ण दस्तावेज और ऑनलाइन एक्टिवटीज की हिस्ट्री दर्ज हैं। कंप्यूटर के साथ ही यह सारा महत्वपूर्ण दस्तावेज भी ईओ साहब के साथ चला गया। ईओ सुशील कुमार का डेस्कटॉप अपने साथ ले जाना ही बताता है कि उन्हें डर था कि यदि इसकी सामग्री बाद में आने वाले ईओ या किसी आला अधिकारी के हाथ लग गई तो उनके लिए मुश्किलें हो सकती हैं। विधायक चाची गीता भुक्कल के दम पर उन्हें लग रहा था कि उन्हें कोई हटा नहीं सकता लेकिन अचानक ही उनके तबादले का पत्र जारी हो गया। ऐसे में शायद उनके पास डेस्कटॉप को अपने साथ ले जाना ही इकलौता विकल्प बचा होगा। बहुत संभव है कि इस डेस्कटॉप में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी जारी करने का पूरा खेल ही बंद हो।
ईओ साहब अपने साथ नगर परिषद का एनओसी से संबंधित रजिस्टर और डिस्पैच रजिस्टर भी ले गए हैं। पाठकों को बताते चलें कि नगर परिषद में ईओ द्वारा अवैध इमारतों को अनैतिक ढंग से एनओसी जारी करने की भी चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि नाला कब्जा कर बनाए गए प्राइम हॉस्पिटल को एनओसी दी गई, इसी तरह शहर में अवैध और नियमों के विरुद्ध एक दर्जन से अधिक हॉस्पिटलों को ईओ साहब ने एनओसी जारी की है। अवैध निर्माणों की गिनती इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। यह जानकारी इन रजिस्टरों से ही मिल सकती है। ईओ साहब के कार्यकाल में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी भी बड़ी संख्या में बनाई गईं। बीते अंकों में मज़दूर मोर्चा ने फर्जी प्रॉपर्टी आईडी का ब्यौरा प्रकाशित किया था। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार इनके अलावा हाल ही में प्रॉपर्टी आईडी 3Q4NRTK6 और 3QFEYC21 भी प्रकाश में आई हैं जिनमें से डेवलपमेंट चार्ज बचाने आदि के लिए हेराफेरी की गई है।
ईओ साहब जरूरी सुबूत साथ ले जाने के साथ अपने दो चेलों सीवर मैन जगमिंदर और कंप्यूटर ऑपरेअर रॉबिन यादव को यहीं छोड़ गए हैं। बताते चलें कि सीवरमैन जगमिंदर राठी स्वयं को बिल्डिंग इंस्पेक्टर बता कर वसूली करता रहा है। रॉबिन यादव ईओ साहब का खास चेला था और कंप्यूटर में फाइलें पास करने का शुकराना वसूलता था। माना जा रहा है कि नगर परिषद में ईओ साहब के खिलाफ जो कुछ भी सुबूत बचे हुए हैं यही दोनों चेले मिलकर उन्हें भी ठिकाने लगा सकते हैं। भरोसेमंद सूत्र कहते हैँ कि यदि जांच कमेटी गंभीरता से सिर्फ प्रॉपर्टी आईडी की जांच कर ले तो लाखों नहीं करोड़ों का घोटाला खुलेगा। हैप्पी और हरीश कुमार गौतम का छुट्टी के बावजूद वेतन जारी किया जाना तो ईओ साहब के अति आत्मविश्वास को दर्शाता है जो उन्होंने फर्जी प्रॉपर्टी आईडी और बिल्डिंगों को एनओसी जारी कर हासिल किया था। अब देखना है कि क्या ईओ साहब के खिलाफ सरकारी सामान निजी तौर पर इस्तेमाल करने की कार्रवाई होती है या नहीं। हैरानगी तो इस बात की होती है कि अब तक ईओ सुशील कुमार के खिलाफ सरकारी रिकॉर्ड के गबन करने का मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया है।