लूट कमाई का साधन बना ‘विकास’ गुडग़ांव (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर दस साल पहले सत्ता में आईं मोदी और खट्टर सरकार कार्यकाल में बनाया गया हीरो हॉंंडा फ्लाईओवर इन सरकारों के भ्रष्टाचार का जीवंत नमूना है। जुलाई 2017 में बन कर तैयार हुआ यह फ्लाईओवर छह महीने ही चल पाया था कि अप्रैल 2018 में इसमें खतरनाक गड्ढा हो गया था, इसे सही करवाया गया तो जून 2018 में छोटी मोटी नहीं, 8 गुणे 10 फीट की दरार पड़ गई थी। फ्लाईओवर में लगातार टूट-फूट और मरम्मत का काम चलता रहा। यहां तक कि 2021 में इसके एक बड़े हिस्से को तोडक़र दोबारा बनाया गया, क्योंकि उसे जर्जर घोषित करना पड़ा था। सोमवार को फ्लाईओवर एक बार फिर क्षतिग्रस्त हो गया, इस बार नीचे से कंकरीट सीमेंट निकल कर गिर गई और सरिया दिखाई देने लगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मरम्मत कराने के लिए जयपुर-दिल्ली लेन पर यातायात रोक दिया है। बताया जा रहा है कि पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच कराई जाएगी, फिर मरम्मत कराई जाएगी।
जांच तो पहले ही हुई पड़ी है, अप्रैल 2018 में पुल में गड्ढा बना था तब ही एनएचएआई के अधिकारियों ने आईआईटी बॉंबे की तकनीकी टीम से जांच कराई गई थी। टीम ने जांच में निर्माण सामग्री से लेकर कई बड़ी खामियां पाईं थीं लेकिन न तो कंपनी ने और न ही एनएचएआई के अधिकारियों ने आईआईटी बॉंबे की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की। करते भी कैसे, 2014 में केंद्र और राज्य में ताजी ताजी सत्ता पाने के कारण भाजपाई मंत्री से लेकर संतरी तक सब लूट कमाई में जुट गए थे। यही कारण है कि फ्लाईओवर निर्माण का ठेका बड़ी कंपनियों के होते हुए भी मात्र पांच सौ करोड़़ पूंजी वाली गडकरी-खट्टर के प्रिय तरुण दत्ता की वालेचा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया।
लूट कमाई और कमीशनखोरी के लिए महज 1.4 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर पर दो सौ करोड़ खर्च कर दिए गए । यदि ईमानदारी से निर्माण होता तो यह पुल इतना मजबूत बनता कि सौ साल भी कहीं न जाता, लेकिन जब निर्माण कंपनी से लेकर अधिकारियों और गडकरी तक लूट कमाई पहुंचती है तो ऐसे ही निर्माण कार्य होंगे। गौर तलब है कि मोदी सरकार में बेहतरीन काम करने का सेहरा बांधे फिर रहे नितिन गडकरी की लूट कमाई का यह तो हांडी में पक रहे चावलों में से एक नमूना मात्र है।
संदर्भवश पाठक जान लें कि फरीदाबाद से गुजर रहे निर्माणाधीन सिक्स लेन दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे की निर्माता कंपनी से दस प्रतिशत कमीशन मांगने की बात सार्वजनिक होने के कारण ही तत्कालीन सडक़ राज्यमंत्री कृष्णपाल गूजर को मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। क्योंकि गडकरी को यह मंजूर नहीं था कि उसके होते हुए गूजर जैसे लोग भी कमीशन के लिए मुंह मारें। हीरो हांडा फ्लाईओवर के निर्माण में भी कमीशनखोरी का यह खेल चला होगा। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि बॉंबे आईआईटी टीम की जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया। खुलासा होने पर भ्रष्टाचार भी उजागर होता और कंपनी के साथ ही अधिकारियों की कमीशनखोरी भी सामने आती। कंपनी और अधिकारी तो उल्टी सीधी मरम्मत कर मामला दबाने में ही जुटे थे।
वो तो आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किया तो मजबूरी में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कराना पड़ा था, राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण पुलिस चार साल तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। जुलाई 2023 में कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मधुसूदन राव, दिनेश निगम, रविंद्र यादव और राकेश कुमार को गिरफ्तार तो किया गया लेकिन लूट में हिस्सेइदार और राजनेताओं ने केस को इतना कमजोर बनाया कि तुर्त फुर्त चारों को जमानत मिल गई। यदि सरकारी ढांचा ज्यों का त्यों रह पाया तो न इनकी कोई सजा होनी है और न कुछ रिकवरी होनी है।
कंपनी के वेतनभोगी कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल दिया। केस तो उन अधिकारियों के खिलाफ भी दर्ज होना चाहिए था और उनकी गिरफ्तारी भी होनी चाहिए थी जिनकी देखरेख में यह प्रोजेक्ट तैयार हो रहा था। इन अधिकारियों के सामने और मंजूरी से ही इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया कि पुल छह महीने में ही टूटने लगा था। जाहिर है कि अधिकारियों ने मोटा कमीशन खाकर ही घटिया निर्माण को स्वीकृति दी थी, रही बात वालेचा कंपनी की तो राजनेताओं को अच्छा चढ़ावा चढ़ाने के कारण ही उसे यह ठेका दिया गया था। प्रोजेक्ट नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी की देखरेख में और एनएचएआई के दिशानिर्देश पर पूरा किया गया था यानी ये दोनों सरकारी संस्थाओं के संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही बनती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार जिस तरह जांच की जा रही है और अधिकारी टूटते पुल की मरम्मत कर भ्रष्टाचार की लीपापोती करने में जुटे हैं उससे तो नहीं लगता कि अदालत में किसी को दोषी ठहराया जाएगा, आखिरकार वकील भी सरकार के होंगे और कानून की अंधी देवी के रखवाले जज भी वही फैसला सुनाएंगे जो सरकार चाहेगी।