डॉ. रामवीर चौबीस घंटे सातों दिन जो नफरत में ही रत रहते सम्भव नहीं उन्हें समझाना यही सोच कर हम चुप रहते।
फिर भी हद हो जाती है तो मन में आता है कुछ बोलें क्या है सच औ क्या है झूठ इस को पूरा पूरा तोलें।
यूं तो अन्य भी तोल रहे हैं किन्तु तराजू बन्दर वाली रोटी पर लड़ती बिल्लियों की रोटी बन्दर ने ही खा ली।
सत्ता की गोदी में बैठा मीडिया पूरा नहीं तोलता आका जो कहता है उसे ही ऊंचे स्वर में रोज बोलता।
एंकर नौकर हैं सत्ता के झूठ बोलना ही है नौकरी जानते हैं सच बोल दिया तो नहीं बचेगी उनकी चाकरी।
अभिनव शर्मा पुण्य प्रसून श्याम मीरा सिंह नवीन कुमार इत्यादि एंकर्स हैं जिन पर सच कहने की पड़ी है मार।
सच का दुश्मन झूठ का यार सुधीर चौधरी है मक्कार पन्द्रह करोड़ वार्षिक वेतन उसको दे रही है सरकार।
डीडी न्यूज पे झूठ फैलाने का उसका छूटा है ठेका क्या दुनिया में और कहीं भी ऐसा मीडिया गया है देखा।
मीडिया की मंडी में झूठ का इतना ऊंचा क्यों है रेट एक ही कारण है कि सत्ता चाहती सच का बन्द हो गेट।
मीडिया का मरना है देश में दुर्दिन आने की पहचान जर्मनी में विनाश से पहले हुआ था हिटलर का गुणग