फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के चुने हुए निकम्मे और हरामखोर अभियंताओं में शामिल योग्य एसडीओ खेमचंद 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाला है। बताया जा रहा है सेवा विस्तार के लिए खेमचंद विधायक अदलखा की शरण में पड़ा हुआ है। भ्रष्टाचार के कीर्तिमान गढऩे वाले धनेश अदलखा का चहेता होने के कारण उसे जाते जाते बडख़ल विधानसभा की तोडफ़ोड़ शाखा का भी इंचार्ज बना दिया गया है। उसके पास निगम अधिकारियों की मोटी ऊपरी कमाई वाली विज्ञापन शाखा तो पहले से ही है।
बताया जा रहा है कि निगमायुक्त ने खेमचंद को यह तोडफ़ोड़ शाखा विधायक धनेश अदलखा के कहने पर दिया है। दरअसल, ये जेई आक़ा धनेश अदलखा के लिए नियम कानून ताक पर रख कर सारे काम करने को तैयार रहता है तो ऐसे पालतू वफादार की विदाई कैसे होने दी जाए। निगम में चर्चा है कि खेमचंद को सर्विस एक्सटेंशन दिलाने का आश्वासन विधायक की ओर से मिला हुआ है। क्योंकि निगमायुक्त भी खेमचंद के सजातीय बताए जा रहे हैं तो वह भी अपनी बिरादरी के एसडीओ के सेवा विस्तार कराने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते। ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबे शहरी स्थानीय निकाय में सेवा विस्तार पाने के लिए अच्छे दाम चुकाने पड़ते हैं। चर्चा है कि खेमचंद को तोडफ़ोड़ शाखा सौंपी ही इसलिए गई है कि सेवा विस्तार के लिए लगने वाले मोटे नजराने का बंदोबस्त कर सके।
जहां तक बात रही खेमचंद की कार्यशैली की तो सत्ता पक्ष के नेताओं के चरणों में रहकर नौकरी बचाने में महारत हासिल है।निगम सूत्रों केे अनुसार खेमचंद वैसे तो काबिल अभियंताओं में गिना जाता है लेकिन सत्ता पक्ष को खुश करने के लिए एस्टीमेट और प्रोजेक्ट में बदलाव करने से बाज नहीं आता है। यही कारण है कि एई या जेई रहते हुए जो भी काम किए शायद ही कोई भी पूरा किया हो। हां, यह जरूर है कि आक़ा के इशारे पर टेंडर की शर्त और डीपीआर को दरकिनार कर कोई भी काम उनकी मर्जी के अनुरूप कराने मे माहिर है। 102 करोड़ की पेरिफेरल रोड तो सबको याद होगी, आज तक यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका। इस रोड के निर्माण की जिम्मेदारी खेमचंद की थी, 76 करोड़ के प्रोजेक्ट को विधायक सीमा त्रिखा की मंशा पर जानबूझ कर 102 करोड़ रुपये पहुंचाया गया। तारकोल से बनने वाली इस पेरिफेरल रोड को खेमचंद ने सीमा त्रिखा के इशारे पर होटल डिलायट के सामने आरएमसी बिछा डाली। पेरिफेरल रोड में भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में भी उठा था तब सीमा त्रिखा ने अपने चहेते खेमचंद को बचाते हुए सदन में बयान दिया था। प्रोजेक्ट में करोड़ों की बंदरबांट हो गई विजिलेंस जांच बैठी, लेकिन विजिलेंस भी तो सत्ता की ही है इसलिए आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी।
सीमा त्रिखा का टिकट कटा तो थाली के बैंगन की तरह खेमचंद तुरंत ही भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा के दरबार में पहुुंचा चरणों में नतमस्तक हो गया। धनेश ने ही खेमचंद को विज्ञापन शाखा दिलवाई क्योंकि इसमें बहुत मोटी ऊपरी कमाई है, क्योंकि ऊपर तक हिस्सापत्ती जाती है इसलिए जांच भी नहीं होती। बताया जा रहा है कि विज्ञापन की मोटी कमाई में हिस्सापत्ती पाने के लिए कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का भतीजा अमन गोयल भी हाथ पैर मार रहा है। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के खेमे वाले अदलखा और विपुल गोयल के बीच खींचतान सबको पता है। चर्चा है कि इसी दो राजनेताओं के लड़ाई में खुद को पिसने से बचाने के लिए खेमचंद विज्ञापन शाखा छोडऩा चाहता है लेकिन अदलखा दबाव बना रहा है। फार्मेसी काउंसिल में गबन कर फरार होने वाले भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा को मालूम है कि कैसे सीएम का इस्तेमाल कर विजिलेंस से पीछा छुड़ाया जाता है। यही कारण है उसने निगम अधिकारियों से कह रखा है कि तुम काम करो विजिलेंस को तो मैं देख लूंगा। अब देखना यह है कि अदलखा की गोद में बैठे खेमचंद का सेवाविस्तार कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल होने देंगे या वह भी इन दोनों की लड़ाई की भेंट चढ़ जाएगा।