विधायक अदलखा आया अपनी असलियत पर तैयारी फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा विधायक बनते ही खुद और अपने चहेते बिल्डर-ठेकेदारों को कमाई कराने के लिए सत्ता का दुुरुपयोग करने में जुट गया है। अपनी विधानसभा की जनता की आधारभूत जरूरतें बिजली, पानी, सड़क की बजाय अदलखा उन जगहों में टांग अड़ा रहा है जहां से उसे और उसके चहेते ठेकेदार लूट कमाई कर सकें। इसके लिए उसने एनआईटी एक-दो के व्यस्ततम और बड़े कारोबारी इलाके को चुना है। यातायात पुलिस होने के बावजूद अदलखा अपनी मर्जी से सड़क की यातायात व्यवस्था तय कर रहा है।
जिस समय भारत-पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था और पूरा देश भारतीय सेना की कामयाबी की दुआएं कर रहा था, बडख़ल विधायक धनेश अदलखा एनआईटी एक-दो के चौक पर सड़क के बीच में फ्लेक्सिबल डीलीनिएटर पोल यानी प्लास्टिक के नारंगी रंग सफेद पट्टी वाले ढाई फीट ऊंचे खंभे लगवा कर वाहनो के आवागमन का रूट निर्धारित करवा रहे थे। यह पढ़ कर पाठकों को लगेगा कि विधायक को शहर की यातायात व्यवस्था की कितनी चिंता है।
दरअसल उन्हें सड़क और यातायात की चिंता नहीं है वह तो अपने चहेते ठेकेदार को डीलीनिएटर पोल का ठेका दिलवाने के लिए यह नाटक कर रहे थे। ठेका उसे ही मिले इसलिए एक दो के चौक पर उससे चंद डीलीनिएटर पोल लगवा दिए, इसके बाद विधायक होने का दबाव निगम अधिकारियों पर डाल कर चहेते को ही ठेका दिला देंगे। उनकी विधानसभा की सभी प्रमुख सड़कों पर डीलीनिएटर पोल लगाने का ठेका निकाला जाए इसके लिए अदलखा जगह जगह स्लिप रोड तलाशने और बनाने का पाखंड कर रहे हैं। मुख्य सड़क से स्लिप रोड को बांटने के लिए ये अस्थायी प्लास्टिक के पोल लगाए जाते हैं। एक दो के चौक पर लगाए गए इन डीलीनिएटर पोल पर कितना खर्च किया गया निगम के अधिकारी फिलहाल इस पर चुप हैं। खुले बाजार में फाइबर प्लास्टिक यानी अच्छी गुणवत्ता वाले एक पोल की कीमत 275 से 349 रुपये तक है अब देखना ये है कि विधायक अपने चहेते ठेकेदार को इनकी कितनी कीमत दिलवाएंगे, माना जा सकता है कि कीमत तय करने या ठेका देने में योग्यता केवल विधायक का खास होना ही काफी होगा।
हालांकि बडख़ल की जनता ने अदलखा को विधायक चुना है लेकिन कभी वह नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते के भ्रष्ट कर्मचारी की तरह अपने चहेते बिल्डर की कीमती इमारत की खूबसूरती में दाग लगाने वाले अंधे व्यक्ति को आवंटित वैध बूथ तोड़ डालते हैं तो कभी वसूली के लिए घूम घूम कर अवैध निर्माण तलाशने वाले नगर निगम के जेई की तरह एनआईटी में चार मंजिल वाली इमारतों की तलाश कर गिराने की धमकियां देते डोल रहे हैं। कभी रोज गार्डन में साइकिल चला कर उसमें सिंथेटिक ट्रैक बिछवाने की लूट कमाई वाली योजना की घोषणा करते हैं तो कभी मोटे कमीशन की लालच में दशहरा ग्राउंड से सैनिक कॉलोनी तक और न जाने कौन कौन से एलिवेटेड रोड बनवाने का ऐलान करते हैं।
विधायक बनते ही उन्होंने सौ दिन में पूरी विधानसभा का नक्शा बदलने का दावा कर डाला, सौ दिन बीतने के बाद भी नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली स्थिति रही तो छह महीने का जुमला उछाला वह भी बीत गए। मोदी से बशर्मी और झूठ बोलने की प्रेरणा लेने वाले अदलखा अब लूट कमाई में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि अदलखा की चार मंजिल वाले सभी अवैध निर्माण तुड़वाने की धमकियों से घबराए बहुत से बिल्डर और भूमाफियाओं ने उसकी चरणवंदना की और मोटा चढ़ावा चढ़ाया और आइंदा होने वाले निर्माण के लिए उचित नजराना पहुंचाने की कसमें खाईं। मन की मुराद पूरी होते ही अदलखा ने अवैध निर्माण का राग अलापना बंद कर दिया।
बीते दिनों आई आंधी में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर फोन बंद कर भूमिगत हुआ अदलखा तब ही बाहर निकला जब बिजली निगम ने लगभग पूरे इलाके में बिजली आपूर्ति शुरू कर दी थी। जनता को मूर्ख बनाने के लिए अदलखा ने बिजली निगम के एसई को फोन पर धमकाते हुए अपनी एक वीडियो वायरल कर दी लेकिन जनता को अदलखा का नाटक समझ में आ गया। बताया जा रहा है कि अब अदलखा की नजर बिजली निगम पर है, वहां भी लूट कमाई के लिए वह अपने चहेते को ठेका दिलवाने की तैयारी कर रहा है। समझा जा सकता है कि अदलखा का लक्ष्य जन सेवा नहीं बल्कि हरियाणा फार्मेसी काउंसिल से भी कहीं ज्यादा लूट कमाई करना है। तभी तो विधायक का टिकट पाने के लिए उसने गूजर-खट्टर पर 18 करोड़ रुपये न्यौछावर किए थे। ये सारा धन मुनाफे और सूद ब्याज समेत वसूलना भी तो है।