बिना आमदनी वाले काम में पुलिस रुचि नहीं लेती

बिना आमदनी वाले काम में पुलिस रुचि नहीं लेती
February 06 12:58 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिल्ली ब्लास्ट वाले दिन यानी 10 तारीख को एसडी त्यागी के जवाहर कॉलोनी स्थित उनके घर के सामने कोई कार खड़ी कर गया। एस्कॉर्टंस यूनियन के पूर्व प्रधान एवं हिन्द मज़दूर सभा के राष्ट्रीय मज़दूर नेता त्यागी ने एक दिन इंतजार करने के बाद अपनी सीसीटीवी की फुटेज देखने पर पाया कि उस कार से उतरने वाले दो व्यक्तियों ने डिक्की में से दो बड़े-बड़े थैले उतारे और गली की ओर चलते बने। त्यागी ने सोचा कि होंगे कोई मुहल्ले वाले, थोड़ी-बहुत देर में गाड़ी ले जाएंगे दो-तीन दिन बीतने के बाद भी जब काई नहीं आया तो त्यागी ने कार का फोटो लेकर थाना सारण में इसकी सूचना दी। फोटो में कार का नम्बर साफ-पढ़ा जा रहा था, इसके बावजूद भी थाने वालों का ढुलमुल रवैया देख कर त्यागी ने खुद ही रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को फोन लगा कर मालिक का नाम पता लगाया तो उसने मालिक होने से साफ मना कर दिया।

इसके बाद त्यागी जी तो थाने से चले गए लेकिन दो दिन बाद भी पुलिस के कान पर जूं न रेंगती देख कर उन्होंने 112 नम्बर पर फोन किया। जबाब में आई पुलिस पार्टी ने धूल से ढकी गाड़ी को देखने के बाद बताया कि वे तो थाना मुजेसर से आये हैं इसलिए आप अपने थाने सारण से सम्पर्क करें। लेकिन जब त्यागी ने थाना सारण का हाल उन्हें बताया तो वे कुछ कार्रवाई करने का भरोसा देकर चले गए। अगले दिन सिविल कपड़ों में कोई पुलिसकर्मी आ कर कहने लगा कि इस गाड़ी को हटाने के लिए तो क्रेन की जरूरत पड़ेगी जो उसके पास है नहीं। किराए पर लाने का खर्च 1000 रुपए लगेगा। त्यागी ने उसकी भावना को समझते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे उसे खोटी चवन्नी भी देने वाले नहीं हैं, गाड़ी यहां खड़ी है तो बेशक खड़ी रहे, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

इस सारी कवायद में करीब एक हफ्ता बीत जाने के बाद 16 तारीख को मुंह फुलाए एक थानेदार आया और त्यागी पर गुर्राते हुए बोला कि आपने तो ऐसा डंडा चढ़ा रखा है कि हमारी नींद हराम हो गई है। अतत: बड़बड़ाता वह जैसे-तैसे क्रेन के द्वारा उस कार को घसीट कर ले गया। अब देखने वाली बात यह है कि कोई नागरिक पुलिस को सूचना दे तो कैसे दे? एक तरफ तो सरकार एवं पुलिस अधिकारी जनता से सहयोग की मांग करते हैं और दूसरी तरफ सूचना देने के बाद ऐसी-ऐसी प्रतिक्रियाएं करते हैं। यह हाल तो तब है जब ब्लास्ट की घटना अभी-अभी हो कर चुकी थी, चहुं ओर आतंकवादियों की तलाश जारी थी। एक प्रबुद्ध नागरिक के नाते मज़दूर नेता एसडी त्यागी ने एक लावारिस वाहन की सूचना पुलिस को देकर क्या गुनाह कर दिया था? यदि उस वाहन से कोई वारदात जुड़ जाती तो त्यागी जी पर पुलिस सवाल उठाने में देर न लगाती कि उन्होंने उसे सूचित क्यों नहीं किया? पुलिस के ऐसे रवैये को देखते हुए भला कौन नागरिक उनके साथ सहयोग करना चाहेगा? पुलिस का यह रवैया सिद्ध करता है कि बिना आमदनी वाला कोई काम करने में उनकी कोई रुचि नहीं रहती।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles