फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दस साल तक जुमलेबाजी कर प्रदेश का बेड़ा गर्क करने वाले पूर्व सीएम खट्टर पार्टी के नए जनप्रतिनिधियों के प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। पलवल के विधायक और राज्यमंत्री गौरव गौतम ने बुधवार को दिल्ली में खट्टर से शिष्टाचार भेंट कर शहर के विकास कार्यों में तेजी लाने की बात की। जो खट्टर दस साल मुख्यमंत्री रहते हुए पलवल का विकास नहीं कर पाए, वह अब क्या कर लेंगे समझा जा सकता है। हां, यह जरूर है कि उनकी संगत में रहकर गौरव गौतम भी विकास के जुमले उछाल कर जनता को गुमराह करने की कला में माहिर हो जाएंगे।
शिष्टाचार भेंट में गौरव गौतम ने पलवल मैट्रो और मेडिकल कॉलेज बनवाने की मांग खट्टर से की। प्रदेश की सत्ता से बाहर हो चुके खट्टर ने भी बड़े आत्मविश्वास से सभी योजनाएं जल्द पूरी कराने के दावे कर डाले। ये वही खट्टर हैं जो बीते छह-सात साल से पलवल मैट्रो का ढिंढोरा बजा रहे थे लेकिन आज तक प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी नहीं बनवा सके। समझने वाली बात यह भी है कि सीएम सैनी तो चुप हैं लेकिन सत्ता के खुड्डे लाइन लगाए जा चुके खट्टर मेट्रो प्रोजेक्ट जल्द पूरा करवाने के दावे कर रहे हैं। यह वही खट्टर है जिनकी डबल इंजन सरकार में पलवल से दिल्ली के बीच चलने वाली अनेक लोकल ट्रेनें कोरोना के नाम पर बंद कर दी गईं, चंद चलाई गई तो उनका किराया तिगुना कर दिया गया। कोरोना समाप्त हुए लगभग तीन साल होने वाले हैँ लेकिन आज तक लोकल ट्रेनें बहाल नहीं कराई जा रहीं और मैट्रो के राग अलापे जा रहे हैं। दिल्ली-पलवल के बीच रेलवे ट्रैक चार लेन का हो चुका है, यदि इस पर लोकल ट्रेनों की संख्या पर्याप्त मात्रा में बढ़ा दी जाए तो मैट्रो की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। दूसरे, बल्लभगढ़ से पलवल तक मैट्रो का एलिवेटेड ट्रैक बनाना बहुत ही ज्यादा महंगा होगा। जमीन पर ट्रैक बिछाने से एलिवेटेड ट्रैक बनाने का खर्च कई गुणा ज्यादा होता है। यदि मैट्रो ट्रैक बन भी गया तो कितने लोग महंगा टोकन खरीद कर सफर करेंगे? अभी तक पलवल से दिल्ली का सफर लोकल ट्रेन से दस रूपये एक्सप्रेस से करीब तीस रुपये में हो जाता है, कितने लोग साठ रुपये देकर सफर करेंगे। मासिक सीजन टिकट वाले दैनिक यात्री तो रोजाना मैट्रो से आने जाने की हिम्मत भी नहीं करेंगे।
गौरव गौतम ने दूसरी मांग पलवल में मेडिकल कॉलेज खोलने की रखी। जो खट्टर छांयसा का बना बनाया मेडिकल कॉलेज-अस्पताल बीते पांच साल में नहीं चला सके वह नया मेडिकल खुलवाएंगे इससे हास्यास्पद और क्या होगा। खट्टर ने छात्रों से हर साल करोड़ों की फीस तो वसूली लेकिन पढ़ाई के लिए फैकल्टी, आवश्यक उपकरण तक नहीं उपलब्ध कराए, गौतम पहले उसे चलवा लेंगे रही नए मेडिकल कॉलेज की बात तो पूरे प्रदेश में आज तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं चल सका तो उनकी मांग वाला नया क्या बनेगा और क्या चलेगा? दरअसल, गौरव गौतम भी उसी बंदर की तरह बर्ताव कर रहे हैंं जो आफत पडऩे पर एक टहनी से दूसरी टहनी पर कूदता फिरता है, होता तो कुछ नहीं लेकिन कहता घूमता है कि मेरी मेहनत में कोई कसर हो तो बताओ। यही मेट्रो और अस्पताल के लिए हो रहा है।