फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा सरकार के हर विभाग में भारी-भरकम भ्रष्टाचार को यूं तो राज्य भर की जनता झेल रही है, परन्तु शिक्षा विभाग में मची खुली लूट का दंश इन्द्रा कॉलोनी के छात्र झेलने को मजबूर हैं। कॉलोनी में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के करीब 525 छात्रों के बैठने के लिए कोई इमारत नहीं। वर्षों पहले घटिया निर्माण सामग्री से जो इमारत बनी थी, वह अब किसी लायक भी नहीं बची है। ऐसे में इन छात्रों को एनआईटी नम्बर एक के ब्वॉयज स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। खबर लिखते-लिखते ही उन्हें सैक्टर-9 के प्राईमरी स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। वहां पहले से ही अत्यधिक छात्रों के होने से स्कूल को दो शिफ्टों में कर दिया गया है। इंद्रा कॉलोनी से आने वाले छात्रों को 12:45 से बजे से सायं 6:15 तक का समय दिया गया है। स्कूल में इतने अधिक बच्चों के लिए न तो बिजली-पानी व शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कोई सफाई करने वाला है। ब्लैकबोर्ड अधिकतर कमरों में तो है ही नहीं और जो हैं भी वो किसी काम के नहीं। बेशक इस इमारत में दो स्कूल चल रहे हैं इसके बावजूद भी शिक्षकों व अन्य स्टाफ की भारी कमी है।
सरकार के पास एक सधा-सधाया तर्क ‘पैसे का अभाव’ होता है। सरकार किस प्रकार से राजकीय कोष को बर्बाद करती है उसका विस्तृत वर्णन ‘मज़दूर मोर्चा’ में समय-समय पर होता रहता है। फिलहाल उस धन की लूट को देखते हैं जो शिक्षा विभाग में हो रही है। अभी हाल ही में …पुन्हाना स्कूल के एक हेडमास्टर ने सेवानिवृत्त होने के मात्र चार दिन पहले वे 28 लाख रुपए बैंक से निकाल कर डकार लिए जो स्कूल में कुछ कमरे बनवाने के लिए आए थे। हेडमास्टर साहब बड़े आराम से सेवा निवृत्त होकर घर चले गए। जाते-जाते सेवा निवृत्ति पर मिलने वाला अपना तमाम पैसा भी ले गए। अब केवल उनकी पेंशन बचती है जिसके द्वारा उक्त 28 लाख की रिकवरी करने की विभागीय योजना है। यदि कानून नाम की कोई चिडिय़ां इस देश में होती तो न केवल हेड मास्टर को बल्कि उसके ऊपर के तमाम सम्बन्धित अधिकारियों को उठाकर जेल में बंद कर देते। परन्तु ऐसा न होने के चलते पिछले वर्ष बल्लबगढ़ बालिका वरिष्ठ माध्यमिक का प्रिंसिपल बड़े आराम से लाखों रुपए डकार कर निकल गया। इसी तरह ….शास्त्री नामक अध्यापक सेहतपुर गांव के स्कूल निर्माण के 65 लाख डकार कर भी मस्ती काट रहा है। जाहिर है यह सब सरकार चलाने वाले राजनेताओं व उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के बिना सम्भव नहीं हो सकता। इन उदाहणों से स्पष्ट है कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था एवं स्कूलों की दुर्दशा का कारण धनाभाव नहीं बल्कि विभागीय धन में हो रही सेंधमारी है।