फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्वच्छता, शुचिता, अनुशासन आदि आदर्शों का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा के प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में हार बचाने के लिए वोटरों को शराब बांटने की नीचता तक उतर आए हैं। पृथला विधानसभा क्षेत्र में गांधी जयंती यानी शराब बंदी वाले दिन शराब बांटने जा रहा भाजपा प्रत्याशी टेकचंद शर्मा का प्रचार वाहन चुनाव आयोग की स्टेटिक सर्विलांस टीम (एसएसटी) ने पकड़ा।
बौखलाए भाजपाइयों ने प्रशासन पर दबाव बना कर टेकचंद शर्मा के खिलाफ आचार संहिता का उल्लंघन करने का केस दर्ज नहीं होने दिया। इसके बजाय केवल चालक के खिलाफ एक्साइज एक्ट का केस दर्ज कराया मामला निपटा दिया गया। जब चुनाव आयोग ही भाजपा की गोद में बैठा हो तो यह तो होना ही था। सरकार द्वारा शराब नहीं बिकने और प्रशासन की मुस्तैदी के बावजूद खुलेआम मदिरा बांटा जाना सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले भाजपाइयों की बेचैनी बयान करता है। चुनाव ड्यूटी में लगे स्टेटिक सर्विलांस टीम 2 के एक्जीक्यूटिव ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ मंगलवार रात दस बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक जाजरू मोड़ पर तैनात थे। देर रात टीम को सूचना मिली कि पृथला से भाजपा प्रत्याशी टेकचंद शर्मा के प्रचार वाहन से अवैध शराब बांटी जा रही है। थोड़ी देर बाद टेकचंद शर्मा के बैनर पोस्टर लगी एक पिकअप उधर से गुजरी तो टीम ने उसके चालक को रोकने का इशारा किया। इस पर चालक ने बोलेरो भगा दी। टीम ने पीछा किया तो चालक ने बोलेरो से शराब की पेटियां निकाल कर सड़क पर फेकनी शुरू कर दीं। टीम ने पीछा कर डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेस वे पर सेक्टर 59 के पास ओवरटेक कर पिकअप रुकवा ली। पिकअप के चालक मुरारीलाल निवासी काकरीपुर परमिट नहीं दिखा सका।
टीम ने ड्राइवर द्वारा फेकी गई देशी शराब की पेटियां इकट्ठा कीं। सुरेंद्र सिंह के अनुसार कांच की बोतलें टूटने के कारण अंग्रेजी शराब की पेटी बेकार हो गई। चालक मुरारीलाल, इकट्ठा की गई शराब और पिकअप को पुलिस के हवाले कर दिया। टीम ने जिस पिकअप को पकड़ा था उसे भाजपा प्रत्याशी टेकचंद शर्मा के प्रचार वाहन के रूप में चुनाव कार्यालय में पंजीकृत कराया गया था, यानी यह पिकअप उनका वैध प्रचार वाहन था।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार कहानी कुछ और है, टीम ने शिकायत होने पर पिकअप पकड़ ली और उसमें से शराब भी बरामद हो गई थी लेकिन पिकअप चालक द्वारा सूचना दिए जाने पर भाजपा के सारे नेता सक्रिय हो गए और वाहन छोडऩे का दबाव बनाया जाने लगा, सख्त आदेश दिए गए कि पिकअप से शराब बरामद नहीं दिखाना है। इस पर पिकअप भगाने, शराब की पेटियां फेके जाने की कहानी रची गई। एसएचओ सेक्टर 58 अनिल कुमार के अनुसार पिकअप से 28 पव्वे बरामद हुए, सुरेंद्र सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की जांच का नाटक किया जा रहा है। सवाल ये है कि एक्जीक्यूटिव ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह ने भाजपा प्रत्याशी टेकचंद शर्मा के खिलाफ आचार संहिता का उल्लंघन करने, शराब बांटने का केस दर्ज क्यों नहीं करवाया, जबकि पिकअप टेकचंद शर्मा का अधिकृत प्रचार वाहन थी। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वही प्रशासनिक अधिकारी चुनाव के समय चुनाव आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं जो चुनाव से पहले सत्ता पक्ष की चरणवंदना कर रहे होते है और सत्तारूढ़ नेताओ द्वारा ंपर नौकरी पर लगवाए गए होते हैंं।
एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट भी उनसे अलग नहीं हो सकते। चुनाव की ड्यूटी तो चंद दिनों की है, नौकरी तो हर दिन करनी है ऐसे में सत्ता का विरोध क्यों और कैसे किया जाए, मानसिकता वाले अधिकारी ही लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहे हैं।