फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नूंह में दंगा भड़काने और विरोध होने पर वहां से चप्पल छोड़ कर रोते हुए भागने वाले सत्ता के प्रिय दंगाई बिटुआ ने बीते रविवार को हिंदू एकता यात्रा निकाली। लेकिन बिटुआ ने जो बैनर पोस्टर लगाए और मंच से जो बातें कही गईं उससे तो लगता है कि यह यात्रा हिंदू एकता से ज्यादा मुसलमानों की भावनाएं भड़का कर नूंह जैसा दंगा एक बार फिर करवाने की बिटुआ का प्रयास था। उसके इस प्रयास में भाजपा विधायक सतीश फागना भी शामिल थे क्योंकि उन्होंने बिटुआ के कार्यों की जमकर प्रशंसा की।
इस बार खास बात यह रही कि बिटुआ ने हिंदू एकता यात्रा में भगवा शब्द भी जोड़ दिया, यानी हिंदू एकता भगवा यात्रा, मानो वह बताना चाहता हो कि इस तरह की यात्रा के जरिए वह भगवा आतंकवाद को पुष्पित पल्लवित करने में जी जान लगा देना चाहता है। इसीलिए उसने एनआईटी पांच दशहरा ग्राउंड में यात्रा प्रारंभ बिंदु पर ‘जेहादियों का जीजा बिट्टू बजरंगी’ लिखा बड़ा सा बोर्ड लगा रखा था। बिटुआ जेहादी शब्द मुसलमानों के लिए इस्तेमाल करता है, सुधी पाठकों को याद होगा कि नूंह जाने से पहले भी बिटुआ ने वीडियो बना कर वहां के मुसलमानों को ललकारा था कि स्वागत के लिए तैयार हो जाओ तुम्हारा जीजा आ रहा है, फिर न कहना बिट्टू बजरंगी बिना बताए आया था। बिटुआ कई वाहनों में हथियार, तलवार आदि लेकर पुलिस के संरक्षण में पहुंचा था, लेकिन नूंह वालों ने जब स्वागत किया तो चप्पल छोड़ कर रोता हुआ भागा था।
कानून के जानकारों के अनुसार बिटुआ ने यह बोर्ड लगाकर बीएनएस की धारा 196 यानी किसी समूह के बीच सामाजिक-धार्मिक या क्षेत्रीय आधार पर वैरभाव या घृणा फैलाना, और मुसलमानों को जेहादी कह कर देश के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाने का संज्ञेय अपराध किया, इसमें अधिकतम पांच साल कैद की सजा का प्रावधान है। यह सारा काम बिटुआ ने पुलिस की मौजूदगी नहीं बल्कि संरक्षण में किया। यदि पुलिस न होती तो यह फरीदाबाद में भी चप्पल छोड़ कर रोते हुए भागता। संरक्षण में इसलिए यदि पुलिस ईमानदारी से काम करती तो बिटुआ के खिलाफ तुरंत ही केस दर्ज करती, लेकिन इसके बजाय उसका बचाव करते हुए बोर्ड उतरवा दिया। हालांकि इसके बाद भी बिटुआ मंच से भौंकता रहा कि वह जेहादी ही बोलेगा।
बिटुआ तो खैर संभ्रांत समाज में अनपढ़ गंवार की श्रेणी में गिना जाता है और हिंदुत्व के नाम पर चंदा इकट्ठा कर अपनी दुकान चलाता है, इसलिए इस तरह की देश विरोधी-समाज विरोधी बात करना उसकी मजबूरी है। विधायक सतीश फागना तो निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं लेकिन उससे भी दो हाथ आगे निकल गए। बिटुआ की तारीफ करते हुए बोले कि बिट्टू बजरंगी हर साल चर्चाओं में रहते हैं, नूंह के विधायक पर तंज करते हुए कहा कि वह बिट्टू के प्रिय मित्र हैं। एक दिन विधानसभा में वह नूंह विधायक के साथ थे, बिट्टू का नाम लेते ही विधायक महोदय दो दो फुट उछल जाते हैं। अपनी बड़ाई करते हुए फागना बोले कि मैंने नूंह विधायक से कहा कि तुमसे कोई कुछ कहता थोड़े ही है, तुम तो जबरदस्ती बवंडर मचाते हो, किसी को मंदिर जाने से रोक रहे हो, ऐसे नहीं चलेगा, तुम अपना काम करो वो बिट्टू अपना काम करेगा। यानी विधायक फागना उस दंगाई बिटुआ के मंच पर आकर समर्थन दे रहे थे जो नूंह दंगे भड़काने का मुख्य आरोपी है, पुलिस जीप से हथियार छीनने जैसे गंभीर अपराध का आरोपी है। हाजी जमात अली और उनके जैसे न जाने कितने अन्य पशु पालकों की गायें-भैंसे लूटने का आरोपी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि बिटुआ जैसे दंगाईयों को सत्ता का संरक्षण और समर्थन प्राप्त है।
यही कारण है कि बिटुआ हिंदू एकता यात्रा के नाम पर दूसरे धर्म वालों के खिलाफ विष वमन करता रहा और पुलिस उसे संरक्षण देती नजर आई। पुलिस तो बिट्टू की नकेल कस दे लेकिन जब पूर्व सीएम खट्टर, केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर, विधायक सतीश फागना का यानी सत्ता का वरद्हस्त हो तो पुलिस भी कुछ नहीं कर रही, जानकार कहते हैं कि सत्ता परिवर्तन होते ही बिट्आ के काले चि_े खोले जा सकते हैं। बिटुआ के करीबियों के अनुसार विवाह न होने के कारण वह यौन कुंठा और अवसादग्रस्त रहता है, इसी कुंठा में वह जीजा-साला करता रहता है। बीते दिनों बिटुआ ने बेटी की उम्र वाली एक कन्या को विवाह के नाम पर करीब सवा लाख रुपये में खरीदने का प्रयास किया था। कन्या ने बूढ़े मोटे-थुलथुल बिट्टू को देखा तो बिकने का राजी नहीं हुई, जिस तरह नूंह दंगे में जीजा बन कर पहुंचे बिट्टू को आंसू बहाते हुए भागना पड़ा था उसी तरह बेटी जैसी कन्या के पत्नी बनने से इनकार करनेके बाद खुद को बजरंगी बताने वाला बिट्टू फूट फूट कर रोया था। इसी यौन कुंठा में वह सांप्रदायिकता फैलाने वाली बातें कर रहा है।