फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) तिगांव क्षेत्र के मुजेड़ी गांव में विकास कार्यों के नाम पर करीब तीस करोड़ रुपया घोटाला करने की आरोपी पूर्व बीडीपीओ पूजा शर्मा और ठेकेदार हीरालाल को गिरफ्तार किया गया। यह घोटाला भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के काल में हुआ था। पूर्व एनआईटी विधायक ने तो सीएम खट्टर को इस घोटाले के बारे में बार बार जानकारी देकर दोषी बीडीपीओ सहित अन्य लोगों पर कार्रवाई और रिकवरी कराने की मांग की थी। संघ की शाखाओं से कथनी कुछ करनी कुछ का पाठ पढऩे वाले खट्टर ने कार्रवाई के नाम पर पूजा शर्मा को आराम से फरार हो जाने दिया। भ्रष्टाचारी सरकारी कर्मचारी को ढूंढ के गिरफ्तार कराने के बजाय लंबे अर्से बाद पूजा शर्मा को फिर से पुन्हाना में बीडीपीओ पद पर तैनाती दे दी।
जानकार कहते हैं कि शिकायतकर्ता मुजेड़ी ग्राम पंचायत के पूर्व पंच सतबीर कपासिया ने फरवरी 2022 में ही गबन की शिकायत करनी शुरू की लेकिन लगता है कि सरकार की छवि खराब होने के डर से किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। कपासिया ने आरोप लगाया था कि 9 अक्तूबर 2020 से 22 फरवरी 2021 के बीच कार्यवाहक सरपंच ब्रह्मपाल, ग्राम सचिव जोगेंद्र और तिगांव की बीडीपीओ पूजा शर्मा ने विभिन्न विकास कार्यों में 24 करोड़ रकम हड़पी है। 16 अक्तूबर 2022 को मुख्यमंत्री के जनता दरबार में कपासिया ने शिकायत दी तो खट्टर को एफआईआर करने के आदेश देने पड़े। एफआईआर तो हो गई लेकिन सत्तापक्ष के नेताओं की खुशी के कारण किए गए इस गबन को छिपाने के लिए प्रशासनिक जांच कराने का खेल शुरू कर दिया गया। इस दौरान पूजा शर्मा फरार हो गईं और पुलिस से लेकर विभाग तक उनके घर व छिपने की जगह तक नहीं पहुंच सके। इस दोरान पूर्व प्रधान ब्रह्मपाल को दस्तावेज खुर्द बुर्द करने का भी मौका दिया गया। गबन के दस्तावेज गायब करने के बाद ब्रह्मपाल से 30 मई 2021 को तिगांव थाने में शिकायत दिलाई गई कि वह 13 अप्रैल 2021 की सुबह कैशबुक, बैंक बिल, वाउचर आदि जमा कराने बीडीपीओ तिगांव के कार्यालय गया था, लेकिन सारे दस्तावेज गुम हो गए। समझा जा सकता है कि जब बीडीपीओ महोदया ही मिली हों तो यही बहाने बनाए जाते हैं। जाहिर है कि बिना दस्तावेज के पुलिस की जांच ढीली पडऩी ही थी लेकिन कपासिया लगातार केस का पीछा करते रहे।
मजबूरी में तत्कालीन डीसी ने एडीसी को जांच सौंपीं, एडीसी ने जांच में पाया कि बीडीपीओ पूजा शर्मा ने अपने सगे भाई ललित मोहन शर्मा की कंपनी मेसर्स रसिक बिहारी इन्फ्रा स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी सोहना, गुडग़ांव को एक करोड़ आठ लाख रुपये का भुगतान किया है लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं था, उनकी ही तरह कुल 14 कंपनियों को करीब 15 करोड़ रुपये का भुगतान बिना रिकॉर्ड के किया गया। ग्राम सचिव जोगिंदर ने अपने भतीजे सागर के नाम मेसर्स दि डिजायन कंपनी नेवादा खुलवा कर बिना रिकॉर्ड के 1 करोड़ 95 लाख रुपये का भुगतान कर डाला। यही नहीं ब्रहमपाल और जोगिंदर ने तो पंचायत के बैंक खाते से करीब बारह लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। एडीसी की रिपोर्ट में सच्चाई सामने आने के बाद मामले को लटकाने के लिए फिर एक संयुक्त जांच कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने भी लगभग एडीसी वाली ही रिपोर्ट दी। इस दौरान पूर्व विधायक नीरज शर्मा की मांग पर मई 2022 में विजिलेंस जांच कराई गई। इधर, कुछ समय बाद फरार बीडीपीओ भी वापस आ गई और दूसरे शहर में उन्हें पदभार भी ग्रहण करवा दिया गया। नीरज शर्मा का सवाल है कि किस नेता या अधिकारी की सिफारिश पर पूजा शर्मा पर बहाली की मेहरबानी की गई।
हालांकि एसीबी ने पूजा शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन नीरज शर्मा का मानना है कि पांच साल में बहुत से सुबूत, दस्तावेज तो खत्म कर दिए गए हैं, मामले में और भी बहुत सारे आरोपी हैं, उनकी गिरफ्तारी नहीं होने से केस कमजोर होगा।