फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनएच तीन स्थित ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज परिसर में दिनांक 06 मार्च को केन्द्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया पधारे। कहने को तो वे इस अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में लगी मेमोग्राफी की एक नई मशीन व फ्लूरोस्कोपी मशीन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जेनेटिक लैब का उद्धाटन करने आए थे। लेकिन असली मकसद यह समझ में आया कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) द्वारा संचालित ‘आरोग्य भारती का प्रचार-प्रसार करना था।
करीब 600 लोगों के बैठने के लिए लाखों रुपये के खर्च से तैयार किये गए पंडाल में श्रम मंत्री महोदय बामुश्किल 45 मिनट भी नहीं रुके होंगे क्योंकि उन्हें तुरन्त हैदराबाद के लिए फ्लाइट पकडऩी थी। अपने भाषण के दौरान मंत्री जी ने ईएसआई कॉर्पोरेशन की कारकर्दगी एवं भविष्य की योजनाओं के बारे में कुछ भी नहीं बताया लेकिन कोरोना महामारी के दौरान, बतौर स्वास्थ मंत्री अपने किए गए कारनामों का गुणगान भरपूर किया। जिन वैक्सीनों के बनने में 5 से 15 साल का समय लगता था वहीं मोदी जी के नेतृत्व में कोरोना का वैक्सीन चंद महीनों में ही तैयार करके जनता को लगा दिया गया था। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इन वैक्सीनों की खरीदो-फरोख्त के लिए क्या-क्या ड्रामे हुए थे? उन्होंने यह भी नहीं बताया कि कितने ही लोग ऑक्सीजन न मिलने से मारे गए थे। शमशानों में क्रियाकर्म के लिए लगने वाली लम्बी-लम्बी लाइनों तथा नदियों में बहते शवों का भी कोई जिक्र उन्होंने नहीं किया। इतना ही नहीं थाली बजाने व दीया जलाने को भी वे उचित ठहरा गए।
एमएनसी (मेडिकल नेशनल कमिशन) के लोगो से यूनान के भगवान को हटा कर अपने भगवान धनवन्तरि को लगाने को उन्होंने अपनी संस्कृति से जोड़ा। परन्तु यह नहीं बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बिना फैकल्टी व अस्पताल के चलने वाली कौन सी संस्कृति होती है? विदित है कि हरियाणा सरकार द्वारा संचालित फरीदाबाद के ही अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज में न तो पर्याप्त फैकल्टी है और न ही अस्पताल में कोई मरीज़।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए इन्होंने अंग्रेजी सेना के एक सिपाही मंगल पांडे की शहादत का उल्लेख तो किया लेकिन 1925 में बने आरएसएस द्वारा अंग्रेजो के प्रति निभाई गई स्वामीभक्ति का कोई जिक्र नहीं किया। इसी दौरान चले स्वतंत्रता आंंदोलन में उनके आरएसएस की क्या भूमिका रही इसका भी उन्होंने कोई उल्लेख नहीं किया। ‘विकसित भारत को लेकर उन्होंने मोदी जी के शब्दों को दोहराते हुए मामला 2047 तक के लिए टाल दिया।
बेशक ईएसआई कॉर्पोरेशन के इस परिसर में हुई मंत्री जी की यह सभा बीमाकृत मज़दूरों के नाम पर थी लेकिन यहां पर किसी भी मज़दूर संगठन को आमंत्रित करना तो दूर सूचित तक भी नहीं किया गया, और तो और प्रेस को भी आमंत्रित नहीं किया गया। हां, आमंत्रित थे तो केवल संघ से जुड़े हुए उद्योगपति व प्रचारक आदि ही। अपने भाषण के दौरान भी मंत्री जी ने मज़दूरों की समस्याओं की बात करना तो दूर उनका नाम तक लेना भी उचित नहीं समझा। संघ से जुड़े उद्योग भारती के उद्योगपति पदाधिकारियों का जरूर उन्होंने धन्यवाद किया।
मंत्री जी के चले जाने के बाद मंच एवं सदन आरोग्य भारती के हवाले कर दिया गया। उनके जाते ही संस्थान के श्रोता भी चलते बने, केवल सौ सवा सौ संघी ही पंडाल मेें बच गए। इसके बाद संघ प्रचारक संजीवन का करीब एक घंटे प्रवचन चला। मंच को उद्योगपति राजकुमार भाटिया व एक अन्य उद्योगपति ने भी संबोधित किया। यानी कि ईएसआई के नाम पर आयोजित किया गया यह आयोजन अंतत: आरएसएस का आयोजन बन कर रह गया। विशेष गौरतलब यह है कि स्थानीय भाजपा का न तो कोई विधायक और न ही कोई मंत्री इस आयोजन में शामिल होने आया। प्रशासन की ओर से भी कोई बड़ा अधिकारी केेंद्रीय मंत्री के स्वागत को नहीं आया। इससे यह सिद्ध होता है कि संघ ने इस आयोजन को सरकार एवं भाजपा से एकदम अलग रखा है। जानकारों की मानें तो आरोग्य भारती के विशेष आग्रह पर मंत्री जी यहां पधारे थे।